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Shorts: Khud Ki Talash Kavita By Nidhi Mansingh - खुद की तलाश

 Khud Ki Talash Kavita By Nidhi Mansingh Shorts

खुद की तलाश

मै खुद को तलाशती हूँ

और फिर छोड़ देती हूँ।

हर रोज अपनी जिंदगी का

एक पन्ना मोड़ देती हूँ ।

जिंदगी के सभी ख्वाब अधूरे हैं मेरे

ख्वाबों का घरौंदा बनाती हूँ।

ओर फिर तोड़ देती हूँ।

सफर लंबा है मजिंल दूर है

अनजानी राहों पर मै

चलना छोड़ देती हूँ।

ये मेरा दिल अकेला ही

निकल पड़ा तलाशने

खुद को

नहीं मिलता जब कुछ

तो खुद को ही

झिंझोड देती हूँ ।

मै खुद को तलाशती हूँ

और फिर छोड़ देती हूँ।

निधि 'मानसिंह'

कैथल, हरियाणा

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