4 अनोखी लघु कहानियां : लाचारी है मुंशी लालाराम की | नाखून | वरदान | बहू बेटी Short Stories in Hindi

Dr. Mulla Adam Ali
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4 Laghu Kathayen : Best Heart touching Short Stories in Hindi

Best Heart touching Short Stories

हिंदी की चार लघु कथाएं : आपके लिए लेकर आए है सर्वश्रेष्ठ लघु कथाएं 1. लाचारी है मुंशी लालाराम की 2. नाखून 3. वरदान 4. बहू बेटी ये 4 अनोखी लघु कहानियां  बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत की गई है। लघु कहानी लाचारी है मुंशी लालाराम, लघुकथा नाखून, शॉर्ट स्टोरी वरदान, छोटी सी लघुकथा बहू बेटी।

हिंदी की लघु-कहानियां

Short Story Lachari Hain Munshi Lalaram

1. लाचारी है मुंशी लालाराम की

लाला मुंशी की तूती देमारा गाँव के हल्के में दूर-दूर तक बज रही थी। कोई भी आदमी हो उसके चंगुल में फंस जाता तो निकलना टेढ़ी खीर था।

लालाजी का कोई घर-बार भी नहीं था। वह इस दुनिया में अकेला प्राणी था। खेती-बारी, जमीन-जायदाद का कोई भी मामला उसके पंजे में फंसना चाहिए। बस लालाजी उसे अपने चक्रव्यूह में उलझा उलझा कर सम्बन्धित व्यक्ति को तबाह कर देते थे।

दूसरों को तबाह करने में उन्हें बड़ा मजा आता था। इसी उधेड़बुन में वे बुढ़े हो गये। वे बीमार अवस्था में भी अपने दिमाग में गाँव को तबाह करने की योजना बलाने लगे।

एक दिन उसके दिमाग में सारे गाँव को तवाह करने का भूत सवार हुआ। उसने गाँव के इस-बीस लोगों को बुलवाकर सबसे प्रार्थना पूर्वक एक बात कही।

लालाजी लम्बी-लम्बी आहे भरकर बोले- "गाँव में रहकर मैंने आप सबको खूब सताया। अब मेरा आखिरी वक्त आ गया है। मेरे दोनों कानों से अब मरते वक्त कोई भी अच्छाई-बुराई सुनकर घोर नरक में जाने से आप सब मुझे बचा लो।"

एक बुजुर्ग ने पूछा आपकी इस इच्छापूर्ति के लिए हम क्या करें? लालाजी गहरी आहे भरते हुए बोले- "दो बांस की बनी कीले लाकर आज गोधूली बेला में मेरे कान में सारे गाँव के सामने ठोक देना। मेरे कर्मों का प्रायश्चित इसी लोक में हो जाएगा तो कम से कम परलोक तो सुधर जाएगा। लालाजी का प्रस्ताव सब लोगों ने मान लिया। गोधूली वेला में सारे गाँव के लोग इकट्ठे हुए। बांस की कीलें जब ठोकी जा रही थी तब पुलिस के चार-पांच सिपाही आ धमके। पुलिस ने लालाजी के दस्तखत वाला पत्र सबको दिखाया। इस पत्र में शिकायत लिखी थी कि सारा गाँव मुझे पापी करार देकर मेरे कानों में कीले ठोकने की साजिश कर रहा है।


Short Story Vardan in Hindi

2. वरदान !

धन्नी धोबन हैण्डपम्प पर पानी भरते भरते बुदबुदाई क्या करें बाई साहब आज मौसम बहुत ठण्डा है। शैला सुख की सांस छोड़ते हुए चहक पड़ी, आप लोगा ने भी ठण्डा लागेगा तो गजब वेई जाएगा।

धन्नी भुआ अपनापन पाकर खिलते फूल की तरह मुस्करा उठी। बाल्टी उठाते हुए बोली- "कई करां यों धन्धों घणों खराब है।" शैला अपनी बाल्टी भरने का काम रोककर बोली धन्नी भुआ, आपणा धन्धा ने गारया मत दो। थांकी जात में निमोनिया से कोई भी आज तक नी मर्यो। (आपने धन्धे को गाली मत दो)

मन भावन बात सुनकर धन्नी भुआ का रक्तिम चेहरा गुलाब की तरह खिल उठा।

- राजमल डांगी

Laghu katha Nakhun in Hindi

3. नाखून

प्रातःकालीन सभा में प्रार्थना के बाद विद्यालय के सभी बच्चे पंक्ति में बैठे थे। अध्यापक कक्षावार साफ-सफाई की जाँच कर रहे थे। पाँचवीं श्रेणी के एक बच्चे के बड़े हुए नाखून देखकर कक्षा इंचार्ज को गुस्सा आ गया उसने बच्चे की गाल पर एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। थप्पड़ लगाते ही बच्चे की गाल पर एक तीखा निशान पड़ गया और उसमें से खून निकलने लगा। निशान ऐसा लग रहा था, मानो किसी न ब्लेड मार दिया हो।

मासूम बच्चे की गाल से इस तरह अचानक खून निकलता देख पास खड़े सभी अध्यापक सत्र रह गए। उनकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था। उधर उस बच्चे के पास बैठे कुछ बच्चे फुसफुसा रहे थे। उनमें से एक बच्चा बार-बार उस नये आए अध्यापक की ओर इशारा कर रहा था। फिर वह हिम्मत करके उठा और मुख्याध्यापक के पास जाकर डरते-डरते धीर से बोला-"सर, वो देखो, उन सर की उंगली का नाखून लग गया है रवि को।"

बच्चे की बात सुन कर सभी अध्यापकों ने हैरानी के साथ उस नये आए अध्यापक की ओर देखा। उसके अप्रत्याशित रूप से बढ़े हुए नाखून देख कर सभी अध्यापक दंग रह गए। कोई कुछ नहीं बोल पाया। वह अध्यापक अब अपराधबोध से ग्रस्त खामोश खड़ा, अपने बड़े नाखूनों को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रहा था।

Laghu Kahani Bahu Beti in Hindi

4. बहू बेटी

मधु और उसकी ननद राधा रसोई घर में सफाई कर रही थीं। मधु के हाथ से अचानक ट्रे छूट गई और उसमे रखे तीन-चार कीमती कप टूट गए। कप टूटने की आवाज सुनते ही मधु की सास गुस्से से लाल होकर आई और उस पर चीखती हुई बोली, "कमबख्त, तू सफाई कर रही है या घर का सत्यानाश? क्या ये कप तेरे बाप के दिए हुए हैं, जो इस तरह मने लेकर तोड़ रही है?" तू क्यों हमें बरबाद करने पर तुली है?

टूटे हुए कंपों के बिखरे टुकड़ों को देखकर सास फिर दहाड़ी, "करमजली, तू चुप क्यों है? आखिर बोलती क्यों नहीं? क्या इनकी कीमत तेरा बाप चुकाएगा?"

बेचारी मधु खामोश थी। वह सास के आगे कुछ नहीं बोल पा रही थी। वह सहमी हुई रसोई के एक कोने में दुबकी खड़ी थी। उपर माँ की आँखों में भड़की क्रोध की ज्वाला को देख राधा भी सहम गई। वह बार-बार खामोश नजरों से भाभी की ओर देख रही थी। कुछ देर बाद हिम्मत करके वह माँ के पास गई और रुआंसी हो धीरे से बोली, "शॉरी मम्मी, वे कप तो मेरे हाथ छूट गए थे। भाभी का इसमें कोई दोष नहीं है।"

बेटी के मुख से इस प्रकार का अप्रत्याशित जवाब सुन कर माँ ने उसकी ओर गौर से देखा और फिर एकदम से शांत हो गई। ऐसा लगा जैसे किसी ने खौलते हुए दूध में तनिक शीतल जल डाल दिया हो। उघर मधु ननद राधा की ओर आश्चर्य मिश्रित कृतज्ञता भरी नजरों से देख रही थी।

- वेगराज कलवांसिया

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