"Barkha Rani Aa Gayi Re" is a delightful Hindi children's poem by Kamlesh Chandrakar. Through simple, rhythmic verses, it beautifully celebrates the arrival of the rainy season, highlighting nature's joy, freshness, and the happiness it brings to people, animals, and the environment.
Barkha Rani Aa Gayi Re – Popular Hindi Children's Rain Poem by Kamlesh Chandrakar
"बरखा रानी आ गई रे" सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार कमलेश चंद्राकर की एक मधुर, लयात्मक और आनंदमयी बाल कविता है। यह कविता वर्षा ऋतु के आगमन से प्रकृति में आए उल्लास, हरियाली और नवजीवन का सजीव चित्र प्रस्तुत करती है। सरल भाषा, आकर्षक तुकांत और गेय शैली से भरपूर यह कविता बच्चों को प्रकृति के सौंदर्य से जोड़ते हुए पर्यावरण के महत्व का सहज बोध भी कराती है।
कमलेश चंद्राकर की सुंदर बाल कविता
बरखा रानी आ गई रे
आ गई, आ गई, आ गई देखो
बरखा रानी आ गई रे
बादल को धिड़काते आई
बिजली को थिरकाते आई
रिमझिम, रिमझिम गाना गाते
अमरित जल बरसाते आई
प्यासी धरा की एक सांस में
सारी प्यास बुझा गई रे
झुलस गए थे बदन हमारे
व्याकुल थे पशु, पक्षी सारे
जाने कैसे दिन कटते थे
कैसी रातें उमस के मारे
बड़ी बेरहम मुई गरमी को
दूर, सुदूर भगा गई रे
कितने लगे थे रूखे-सूखे
ठूंठ-ठूंठ हो झाड़-झरूखे
और धूप को तो सूरज जी
चट कर बैठे थे बन भूखे
अब तो हरियाली की सब-कहीं
भारी धूम मचा गई रे
कुएं, ताल और नदिया, नाले
सबके सब थे दुखड़े वाले
अमरित उसको मिल जाता था
जो घुंडी भर पानी पा ले
अब तो पानी को पानी के
मोल सभी तक ला गई रे
मेंढक जो थे नजर न आते
निकल पड़े सब शोर मचाते
निकले बरसाती सेट घरोघर
निकले फिर से तनकर छाते
खेत-खार को झम्मक, झम्मक
श्रम से फिर गमका गई रे
आ गई, आ गई, आ गई देखो
बरखा रानी आ गई रे
- कमलेश चंद्राकर
ये भी पढ़ें; बरखा आई रे : बाल कविता - प्रभुदयाल श्रीवास्तव
निष्कर्ष; "बरखा रानी आ गई रे" बच्चों के मन में वर्षा ऋतु के प्रति आनंद, उत्साह और प्रकृति-प्रेम का भाव जगाने वाली सुंदर बाल कविता है। अपनी सरल, सरस और गेय शैली के कारण यह कविता बच्चों के साथ-साथ सभी पाठकों को भी आनंदित करती है।

