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Happy New Year 2022: गाँव में नववर्ष कविता - अशोक श्रीवास्तव 'कुमुद'

गाँव में नववर्ष

चेहरा पे हल्की हल्की

रौनक दिखत बा

हिला हिला हथवा 

बधाई चलत बा

        फीकी मुस्कान में  

        गँउवा रँगत बा

        नववर्ष मनत बा


नाच रहे मानिंद  

गाना चलत बा

अफसर दरोगा के

उपहार बँटत बा

        काजू के संगे संगे

        बोतल चलत बा

        नववर्ष मनत बा 


मधुशाला में जगह ना 

तलब लगत बा

पैसा ना जेब जिनके

यार संग जुटत बा

        दर्द छिपाय अंदर

        चेहरा हँसत बा

         नववर्ष मनत बा 


खेत में बशेसर  

रतिया बितत बा

बिजली रहै रात में  

सिंचाई चलत बा

        हाड़ कँपावत ठंडी 

        खुनवा जमत बा

        नववर्ष मनत बा


बिरजू के मड़ई 

पुआल बिछत बा

कथरी ओढ़े बच्चे 

ठंडी लगत बा

        कच्ची पिये बिरजू सोवै

        मदहोश रहत बा

        नववर्ष मनत बा 


पढ़ पढ़ थकी अँखियाँ

मुनुआ ना थकत बा

भँवर नौकरी फँसा 

कैसो ना उबरत बा

        नए सिरे से फिर तैयारी

        नौकरी ढूंढत बा 

        नववर्ष मनत बा 


नींद न आवै सिद्धू  

रात ना कटत बा

चम्पा की उमर का

हिसाब करत बा

        कैसे दहेज बियाह 

        बिठावत जुगत बा

        नववर्ष मनत बा


अँखियन में आँसू 

भीखू रोवत बा

माई मरी दिनवा यही

याद सब आवत बा

         पड़ोस में आतिशबाजी 

         धक्का लगत बा

         नववर्ष मनत बा 


भरी आँत जिनकी गँउवा 

उत्सव वहीं मनत बा

खाली आँत आँख खाली ना

बैठा आँसू बहत बा

          सारे उत्सव सारी खुशियाँ 

          पैसा ही जनत बा

           नववर्ष मनत बा 


जाति-धर्म खेल वोट का

चक्कर खूब चलत बा

राजनीति चाहे हो जितनी

नाही फर्क पड़त बा

       शोषित-शोषक दुइ खेमा

       गँउवा बँटत बा

       नववर्ष मनत बा

अशोक श्रीवास्तव 'कुमुद'
राजरूपपुर,
प्रयागराज (इलाहाबाद)
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