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सिंदूर के फूल : सिंदूर के पेड़ में शीत ऋतु में आते हैं फूल और फल

सिंदूर के फूल 

सिंदूर के पेड़ में शीत ऋतु में आते हैं फूल और फल

शिवचरण चौहान

सिंदूर के पेड़ (Plant of Sindoor) में नवंबर से लेकर जनवरी तक लाल रंग के फूल आते हैं। मार्च-अप्रैल में सिंदूर के पेड़ में फल आते हैं। सिंदूर के फल की फलियों के दाने पीस का सिंदूर बनाया जाता है। इसी सिंदूर को विवाहित स्त्रियां अपने मस्तक पर और अपने मांग में लगाती थीं।

सिंदूर के पेड़ को सुहाग बिरवा भी कहा जाता है। गांवों में आज भी बेटी की शादियों में सुहाग बिरवा के गीत गाए जाते हैं।

इनके बाबा लगाये न सुहाग बिरवा।

आज की महिलाएं सिंदूर लगाती ही नहीं हैं। कुछ सुहागिन महिलाएं सिंदूर लगाती हैं। यह सिंदूर कृतिम सिंदूर होता है जो केमिकल और कच्चे शीशे के मिश्रण से बनाया जाता है। केमिकल वाला सिंदूर त्वचा को बहुत नुकसान पहुंचाता है। प्राकृतिक तरीके से प्राप्त सिंदूर थोड़ा महंगा होता है किंतु इसके औषधीय फायदे बहुत हैं। सिंदूर मन शांत करता है, रक्तचाप को नियंत्रित करता है।

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बहुत से लोगों को और महिलाओं को अब यह भी नहीं मालूम है कि सिंदूर एक पेड़ के पौधे की फलियां हैं जिन्हें पीसकर सिंदूर बनाया जाता है। प्राकृतिक सिंदूर ना तो पानी में घुलता है और ना अपना रंग छोड़ता है।

सिंदूर के पेड़ को आम बोलचाल की भाषा में कमीला आप एंड कहते हैं। कमीला का पेड़ अमरूद के पेड़ की तरह 20 फीट तक पहुंचा हो जाता है। इसका तना गुलाबी और फूल भी गुलाबी आते हैं। इसे रोरी सेनिया, सरस्वती वृक्ष आदि कई नामों से पुकारा जाता है।संस्कृत भाषा में इसे कंपिल्लक, रक्तांग,रक्त चूर्नक आदि कई नामों से पुकारा जाता था। लैटिन भाषा में से माला तेस कहते हैं। अंग्रेजी में से लिपस्टिक ट्री कहते हैं। क्योंकि लिपस्टिक बनाने में सिंदूर के पेड़ की फलियों के बीजों का प्रयोग किया जाता है।

वैसे तो सिंदूर का पेड़ पहाड़ों में ज्यादा होता है किंतु मंदिरों धर्म स्थलों और मैदानी क्षेत्रों में भी सिंदूर के पेड़ उगाए जाने लगे हैं। एक सिंदूर के पेड़ से साल भर में 25 से 30 किलोग्राम तक सिंदूर प्राप्त होता है ।

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कथा है कि सीता जी वनवास काल में सिंदूर वृक्ष की फलियों से सिंदूर निकालकर अपनी मांग मिल्क भरती थीं और हनुमान जी इसी सिंदूर को पेड़ों से प्राप्त कर अपने शरीर पर लगाया करते थे। आज भी भक्त हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाते हैं। महिलाएं देवियों को सिंदूर चढ़ाते हैं किंतु पुरुष देवियों को सिंदूर नहीं चला सकते। उनके लिए सिंदूर देवी को अर्पित करना मना है, वर्जित है।

आज सिंदूर का पेड़ सिंगापुर मलाया श्रीलंका अफ्रीका चीन सहित अनेक देशों में पाया जाता है किंतु मूल रूप से सिंदूर का पेड़ भारत का है। विदेशी यात्री भारत से सिंदूर का वृक्ष लेकर अपने अपने देश गए हैं।

सिंदूर का पौधा फूल और फल अनेक औषधियों के बनाने के काम आते हैं। सौंदर्य प्रसाधन की अनेक चीजें सिंदूर के बीजों से बनती हैं। खाने में सिंदूर की फलियों का उपयोग खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है।

©® शिवचरण चौहान
कानपुर
shivcharany2k@gmail.com

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