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Shorts: Hindi Kavita Jag Ye Manav by Nidhi Mansingh: जाग ऐ मानव

जाग ऐ! मानव : निधि 'मानसिंह' - shorts

जाग ऐ! मानव - निधि 'मानसिंह'

अब तो ठहर जा ऐ! मानव

और कब तक भागेंगा?


मृत्यु तांडव करती सिर पर

कब निद्रा से जागेंगा?


उठ! खड़ा हो अर्जित कर शक्ति

दें मात इस काल को।


विजय पताका लहरा दें

भेद के इस जंजाल को।


निधि 'मानसिंह'

कैथल हरियाणा

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