🌳प्रकृति और नारी 🚺
एक प्रकृति एक नारी दोनों
कर्तव्य के बोझ की मारी।
आंचल में आंसू लेकर,
सींचे रिश्तों की क्यारी।
एक हरा-भरा जीवन देती,
सांसों में प्राण भर देती।
बेटी, बहू माता बनकर
दूजी जीवन अर्पण कर देती।
कितना भी हो दुख चाहे?
कितना भी हो कठिन सफर?
कभी ना ये जीवन से हारी
एक प्रकृति एक नारी दोनों
कर्तव्य के बोझ की मारी।
निधि "मानसिंह"
कैथल, हरियाणा
ये भी पढ़ें
* अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष: महिला समाज की असली शिल्पकार होती है
* Women's Day Special: सामाजिक खुशहाली की कसौटी है स्त्री की दशा
* International Women Day 2026: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व, उद्देश्य इतिहास और थीम
* International Women's day Poetry: स्त्रियाँ कलाकार होती हैं

