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बाल कविता: परियों का देश - निधि मानसिंह

बाल कविता

🧚🧚 परियों का देश 🧚🧚

दादी मेरी, प्यारी दादी

मुझकों कहानी खूब सुनाती ।

पंख लगाकर सपनों के

परियों का देश दिखाती।

पहुंच गई में परी देश में,

कितना खुश होकर इतराती?

देखा वहां सुख ही सुख

दुख की तो छाया ना आती ।

लाल, नीली, पीली परियां,

तितली बनकर उड जाती।

चांदी जैसे पंख पसारे

परियों की रानी है आती।

भेदभाव को त्यागकर

करूणा का पाठ सिखाती।

सारी रात, परियों के साथ

मै उडती - फिरती नाचती गाती।

हुआ सवेरा मां कहे उठ जा

परियां हाथ छोड़ उड जाती।

दादी मेरी प्यारी दादी,

मुझकों कहानी खूब सुनाती ।

निधि "मानसिंह"
कैथल हरियाणा
nidhisinghiitr@gmail.com

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