बाल कहानी : रोहन का पश्चाताप - निधि मानसिंह

Dr. Mulla Adam Ali
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बाल कहानी

रोहन का पश्चाताप

निधि "मानसिंह"

      रोहन 8वी क्लास में पढता था। वह अपनी क्लास का सबसे शरारती व नालायक बच्चा था। उसका होमवर्क कभी पूरा नहीं होता था। टीचर्स के कारण पूछने पर वह रोज नये-नये झूठ बोलता और बहाने बनाता। उसके टीचर व परिवार वाले उसके झूठ बोलने की बुरी आदत से बहुत परेशान थे। लाख कोशिश करने के बाद भी रोहन सुधरने का नाम नही ले रहा था। रोहन के दादा जी ने भी उसे बहुत समझाया और कहा - बेटा रोहन, तुम्हारे झूठ बोलने की आदत के कारण किसी दिन तुम्हें बहुत बड़ा परिणाम भुगतना पड सकता है। लेकिन, रोहन कहाँ किसी की बात सुनने वाला था?

     शनिवार, रविवार की छुट्टी के बाद स्कूल खुला। गर्मी के कारण सभी बच्चों का बुरा हाल हो रहा था। बच्चे गर्मी के बारे में ही बात कर रहे थे कि तभी क्लास में हिंदी के सर शिवकुमार का प्रवेश हुआ और सभी बच्चे शांत हो गये। शिवकुमार सर ने सब बच्चों को बताया कि दो दिनों के बाद हम सब पास के गांव में पिकनिक पर जाने वाले है। ये सुनकर बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा क्योंकि एक तो पढ़ाई से छुट्टी दूसरा गांव के सुंदर वातावरण में घूमने का मौका मिल रहा था।

    आज पिकनिक का दिन है सभी बच्चे अच्छा - अच्छा खाना पैक करवाकर लायें है। रोहन ने भी मम्मी से कुछ स्पेशल बनवाया है। स्कूल बस में बैठकर सभी गाँव में पहुंच जाते हैं। वहाँ बहुत सुंदर फलों के बाग में सब के ठहरने का इंतजाम था। बाग में बने बडे से चबूतरे पर बैठकर बच्चे ठंडी और ताजी हवा का आनंद लेने लगे। बाग के माली ने फलों से भरी टोकरी शिवकुमार सर को बच्चों के खाने के लिए दी। माली ने सभी बच्चों से कहा-कि बाग के पीछे से एक नदी बहती है कोई भी वहां न जाये। सब बच्चे खाने का, खेलने, कूदने का व गांव का मजा ले रहे थे। रोहन ने देखा कि सभी अपने-अपने कामों में व्यस्त हैं तभी उसने अपने दोस्त 'अजय और राजू' से नदी में नहाने के लिए बोला - लेकिन, उन्होंने ये कहकर मना कर दिया कि उन्हें तैरना नही आता। और अगर सर को पता चला तो बहुत डांट पडेगी। लेकिन, रोहन को तो नदी पर जाना था। इसलिए उसने अजय और राजू से झूठ बोल दिया कि उसे तैरना आता है। और हम सर के पता चलने से पहले ही वापिस आ जायेंगे। काफी आनाकानी करने के बाद आखिर अजय और राजू को रोहन के साथ नदी पर जाना पड़ा। वे तीनों नहाने के लिए जैसे ही नदी में उतरे अचानक अजय का पैर फिसल गया।

अजय गिरने ही वाला था कि राजू और रोहन ने उसका हाथ पकड़ लिया। लेकिन, पानी का बहाव बहुत तेज होने के कारण वे तीनों बहने लगे। तभी उन्हें एक पत्थर दिखाई दिया उन्होंने उसे कसकर पकड लिया और चिल्लाने लगे। अजय ने रोहन से कहा - "रोहन तुम्हें तो तैरना आता है।" तुम हम तीनों की जान बचा सकते हो। रोहन ने रोते हुए अजय से कहा - मुझे माफ कर दो, मुझे तैरना नही आता मैने तुम दोनों से झूठ बोला था। ये सुनकर अजय और राजू के होश उड़ गये और वो दोनों जोर - जोर से "बचाओं - बचाओ" चिल्लाने लगे। नदी के पास से गुजरते हुए गांव के एक आदमी ने उनकी आवाज सुनी और वह उन तीनों को बचाने के लिये नदी में कूद पडा। आज रोहन को दादाजी की कही वो बात "कि झूठ के कारण किसी दिन तुम्हें बहुत बडा परिणाम भुगताना पडेगा" याद आ रही थी। जैसे - तैसे गांव वाले ने उन तीनों को नदी से बाहर निकाला। इतने में शोर सुनकर शिवकुमार सर और बाकी बच्चें भी वहां आ गये। अजय और राजू ने सर को पूरी बात बताई, जिसे सुन कर सर को बहुत गुस्सा आ रहा था। सर ने रोहन को बहुत डांटा और कहा - आज तुम्हारे झूठ के कारण तुम तीनों मरते - मरते बचे हो।रोहन अगर तुम्हें आज भी अक्ल नही आई तो कभी नही आयेगी। रोहन रोता - रोता सर के पैरों में गिर पडा। उसने सर से अपनी गलती की माफी मांगी, उसे अपनी भूल का अहसास हो गया था। उसकी आंखों में पश्चाताप के आंसू थे। आज रोहन मे बदलाव देखकर सर बहुत खुश हुए, उन्होंने रोहन को उठाया और अपने गले से लगा लिया।

निधि "मानसिंह"

कैथल, हरियाणा
nidhisinghiitr@gmail.com

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