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कबीर के दोहे : प्रेम न बाड़ी ऊपजै प्रेम न हाट बिकाय का अर्थ

Kabir amritwani : प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय - Kabir Das ke Dohe 

प्रेम न बाड़ी ऊपजै, प्रेम न हाट बिकाय।

Prem Na Baadi Oopjai, Prem Na Haat Bikay.

राजा परजा सो रुच, शीश देय ले जाय।।

Raja Paraja So Ruch, Sheesh Dey Le Jay..

लोगों को सकारात्मक मार्ग पर चलने के लिए कबीर दास के दोहे प्रेरित करते हैं। कबीर दास ज्ञानमर्गी शाखा के प्रमुख संत कवि हैं। कबीर दास की रचनाएं भक्ति आंदोलन को बहुत प्रभावित किया है।

The couplets of Kabir Das inspire people to walk on the positive path. Kabir Das is the main saint poet of Gyanmargi branch. The works of Kabir Das greatly influenced the Bhakti movement.

नकारात्मकता को हटाकर लोगों में सकारात्मकता की भावना भरकर सफलता की ओर अग्रसर करते हैं कबीर के दोहे, कबीर अमृतवाणी।

Kabir's couplets, Kabir Amritvani move towards success by removing negativity and filling people with positivity.

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