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Short Essay on Truth in Hindi : सच्चाई का महत्व पर लघु निबंध हिंदी में

Short Essay on Truth in Hindi : सच्चाई का महत्व पर लघु निबंध

Essay on Truth in Hindi : सच्चाई का महत्व पर लघु निबंध

कहते हैं कि वक्त के साथ चलना कोई जरूरी नहीं, सच के साथ चलना जरूरी है। सच के साथ चलेंगे तो एक दिन वक्त भी आपके साथ चलेगा। भले ही अच्छा या सच्चा इंसान के जीवन में सच्चाई से कई बाधाए होती है, अच्छाई के रास्ते पर न चलने पर भी बुरा इंसान सुखी रहता है, मगर आखिरकार सच्चाई का ही जीत होती है, सच्चे रास्ते पर चल इंसान मन से सुखी रहता है, चैन से सो पाता है। बुराई का रास्ता आखिर में आपको विनाश की ओर ही ले चलता है।

सत्य से परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं। इस संसार में हर धर्म, हर धर्म ग्रंथ इंसान को सच्चाई के रास्ते पर चलने के लिए ही कहता है। सनातन संस्कृति में सत्य को ईश्वर का रूप माना जाता है, इसलिए कहते हैं truth is god (सत्य ही भगवान है)। 

सूरज, चांद और सत्य को छुपाना न मुमकिन है, सत्य आग की तरह है इसे छुपाए रखना मुश्किल ही नहीं न मुमकिन भी है। सत्य किसी न किसी रूप में एक दिन लोगों को सामने आ जाता है, इसलिए कहते है कि झूठ बोलकर बचने से बेहतर है, सच बोलकर सजा मिलने पर भी उसे स्वीकार करना अच्छा है, क्योंकि झूठ से हम सिर्फ उसी वक्त बच सकते है, किसी दिन सच लोगों तक पहुंचता ही है।

सत्य की बात करते तो जरूर हम सत्य हरिश्चंद का नाम लेते है। सत्यवादी राजा हरिशचंद्र न्याय के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने आजीवन सत्य का पालन किया। राजा हरिशचंद्र की कहानियां आज भी बच्चों को हम पढ़ते हैं।

सत्य हमेशा कड़वा होता है : यह कहावत प्रसिद्ध है की सत्य कड़वा होता है, कुछ लोग अंधेरे में जीना चाहते हैं वह सत्य सुनना नही चाहते। खासकर आज के दौर में बहुत से निराहवादी लोग देखने को मिलते है। वे आंख बंद करके जीते है, उनको सच्चाई का सामना करना नहीं चाहते हैं।

वास्ताविकत ही सत्य है : वास्तविकता ही सत्य है, सच को पहचानना और यथार्थ में जीना आवश्यक है। कर्म, वचन, मन से सच्चाई के रास्ते पर चलना सत्य को स्वीकार करना ही वास्तविक जीवन कहलाता है। सत्य की पहचान (Qualities of Truth), जीवन में सत्य का पालन कैसे करें (How to follow truth), सत्य का आचरण (Conduct of truth) ये सब आज के लिए बहुत जरूरी है।

Short Essay on Truth in Hindi : Sachai ka Mahatva Par Laghu Nibandh

kahate hain ki vakt ke saath chalna koi jaruri nahi, sach ke saath chlana jaruri hai. sach ke saath chalenge to ek din vakt bhi aapke saath chalega. bhale hi achha ya sachha insan ke jivan mein Sachai se kayi baadhyen hote hai, achhayi ke raste par na chalne par bhi bura insan sukhi rahta hai, magar aakhirakar Sachai ka hi jeet hoti hai, Sachai raste par chal insan man se sukhi rahta hai, chain se so paata hai. burayi ka rasta aakhir mein aapko vinash ke or hi le chalta hai.

satya se pareshan ho sakta hai lekin parajit nahin. is sansar mein har dharm, har dharm granth insan ko Sachai ke raste par chalne ke liye hi kahte hai. sanatan sanskrti mein satya ko eshwar ka roop maana jaata hai, isaliye kahte hain truth is god (satya hi bhagavan hai). 

sooraj, chand aur satya ko chupana na mumakin hai, satya aag ki tarah hai ise chupaye rakhana mushkil hi nahin na mumakin bhi hai. satya kisi na kisi roop mein ek din logon ke saamane aa jaata hai, isaliye kahte hai ki jhooth bolakar bachne se behtar hai, sach bolkar saja milne par bhi use swekar karna achha hai, kyonki jhooth se ham sirf usi wakt bach sakte hai, kisi din sach logon tak pahunchata hi hai.

satya ki baat karte to jarur ham Satya Harishchandra ka naam lete hai. satyavadi raja Harishchandra nyay ke liye jaane jaate hain. unhonne ajivan satya ka palan kiya. raja Harishchandra ke kahaniyan aaj bhi bachchon ko ham padate hain.

satya hamesha kadva hota hai : yah kahawat prasiddh hai ki satya kadva hota hai, kuchh log andhere mein jeena chahate hain vah satya sunana nahi chahte. khaasakar aaj ke daur mein bahut se nirashavadi log dekhne ko milte hai. ve aankh band karke jeete hai, unko Sachai ka saamna karna nahi chahte hain.

vastavikta hi satya hai : vastavikta hi satya hai, sach ko pahchanana aur yatharth mein jeena aavashyak hai. karm, vachan, man se sachai ke raste par chlana satya ko swikar karna hi vastavik jivan kahlata hai. satya ki pahchan (qualities of truth), jivan mein satya ka palan kaise kare (how to follow truth), satya ka aacharan (conduct of truth) ye sab aaj ke liye bahut jaruri hai.

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