Ishq Ghazal by Ashok Srivastava Kumud : हिंदी ग़ज़ल इश्क

Dr. Mulla Adam Ali
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कविता कोश में आज आपके समक्ष अशोक श्रीवास्तव "कुमुद" जी द्वारा लिखी गई गजल इश्क (Ishq Ghazal), हिंदी ग़ज़ल इश्क। Ishq Ghazal in Hindi.

इश्क

कुछ सिमटते कुछ सहमते पास दिलवर आ गये।

पास आई मंजिलें जब साथ रहबर आ गये।


इश्क में दुनिया गुलाबी पल गुलाबी हर लगे,

जब गुलाबी इश्क में तन मन डुबोकर आ गये।


ना रहा काबू दिलो पे आस अब रहमो करम,

कर लिया सजदा सनम का जब मचलकर आ गये।


बिन चुभन बिन कसक के ये जिन्दगी थी बेमजा,

दर्द भी मीठा लगे अब जब सितमगर आ गये।


साज साजिन्दे गवैया रौनकें पुरअसर ना,

अब हुई महफ़िल मुकम्मल जब सुख़नवर आ गये।


वो सितमग़र वो सुखनवर बन सनम रहबर लगे,

"कुमुद" कर जीवन हवाले अब रहमग़र आ गये।

अशोक श्रीवास्तव "कुमुद"

राजरूपपुर, प्रयागराज (इलाहाबाद)

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