Maa Par Kavita : Poem on Mother in Hindi - माँ पर कविता

Dr. Mulla Adam Ali
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Mother's Day 2024 : Poem on Mother in Hindi by B.L. Achha

मई 12, 2024 रविवार मातृ दिवस पर विशेष कविता कोश में आज आपके समक्ष बी. एल. आच्छा जी द्वारा लिखी गई सर्वश्रेष्ठ हिंदी कविता "माँ", पढ़े और शेयर करें।

माँ

घट्टी की घम्मर में जो, 

गोद  सुलाए माँ

निंदिया के झूले में, 

जो गीत सुनाए माँ।


बच्चे की किलकारी से, 

रूह मचल जाए माँ

जैसे लहरों पर चमक गई हो, 

सूर्य किरण सी माँ।


कच्ची पहली में जाने पर, 

तिलक लगाए माँ 

गुड़ या दही खिलाकर,

जीवन-राह बनाए माँ।


धड़के दिल भी, हुलसे मन भी,

पर तरसाए माँ

बच्चा घर आ जाए तो,

छाती से लग जाए माँ।

भारी बस्ता होमवर्क में,

साथी सी बन जाए माँ।


आँख पिता की टेढ़ी देखे,

कनखी से सरसाये माँ  

हलवे से  पिज्जा तक,

लालच दे समझाए माँ।


कभी मनौती, कभी चुनौती, 

रंभाती गौ- वाणी में 

देवल-देवल जाए माँ,

चढ़ौती- व्रत निभाए माँ।


तपती नन्नू की काया से,

आँखें तर हो जाए माँ 

यों बच्चे की देखरेख में,

पिघल मोम हो जाए माँ


बेटे को घोड़ी चढ़वा कर,

या बेटी के हथलेवे में  

गोद भराई के मौके पर,

छाती से भर जाए माँ  

कंठ भरे मधु गीतों संग,

कुंकुम थाल सजाए माँ।


कंधे पर से पार निकलते, 

पोथी के रट्टों में उलझे 

देर रात पढ़ते बच्चों को,

चुपचाप दूध दे जाए माँ

अँगरेजी ग्रामर को भी,

दिल का पाठ पढ़ाती माँ। 


- बी. एल. आच्छा

फ्लैटनं-701टॉवर-27
स्टीफेंशन रोड (बिन्नी मिल्स)
पेरंबूर, चेन्नई (तमिलनाडु)
पिन-600012
मो-9425083335

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