डैमेज कंट्रोल की असलियत: अहंकार, सत्ता और व्यवहार की सीख देने वाली कहानी

Dr. Mulla Adam Ali
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This is a sharp and thought-provoking satirical story by Manoj Jain 'Madhur', which uses jungle characters to reveal the reality behind power, ego, and image management. It highlights that true change comes not from manipulation, but from genuine transformation in behavior.

Damage Control Exposed: A Powerful Story on Ego, Power, and Real Change

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यह मनोज जैन ‘मधुर’ की एक व्यंग्यात्मक और शिक्षाप्रद कहानी है, जिसमें जंगल के पात्रों के माध्यम से सत्ता, अहंकार और छवि सुधार (डैमेज कंट्रोल) की वास्तविकता को दर्शाया गया है। कहानी यह संदेश देती है कि केवल दिखावे से नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव से ही विश्वास और सम्मान प्राप्त किया जा सकता है।

मनोज जैन 'मधुर' की बाल कहानी

डैमेज कंट्रोल

कूनो चीते ने, जबरा बबर के, कानों में फुसफुसाकर कहा, "जबरू महाराज, डैमेज कंट्रोल कर दिया है। अब तुम्हें सारा जंगल कुछ ही दिनों में अहिंसक समझने लगेगा। फिर भी ऐसा होने में कम से कम चार छह महीने तो लग ही जाएंगे। 

इस बार अपना मुँह बंद रखना और अपनी तरफ से कोई ऐसी-वैसी हरकत मत पटकना।"

कूनो की बात सुनकर, जबरू जोर से हँसा और बोला, "अगर ऐसा होता तो सारे हिरण मेरे आस-पास कुलाँचे भर रहे होते। "हर बार की तरह इस बार मैं , तुम्हारी बातों में नहीं आऊँगा।" तुम मुझे नादान बना रहे हो।" फिलहाल तो मुझे, तुम्हारी किसी बात पर यक़ीन नही हो रहा। यहाँ तो दूर-दूर तक सन्नटा परसा है। एक चिड़िया तक दिखाई नहीं दे रही!"

बबर कसमसाया और बोला, "कसम से, अकेले बैठने की भी कोई हद होती है; सुबह से शाम होने को है, और अभी तक पेट में मांस का एक टुकड़ा तक नही गया" खैर,

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बबर की बात सुनकर कूनो के सब्र का बाँध टूट ही गया, कूनो इस बार बीच में बोल ही पड़ा, "महाराज मेरा मुँह मत खुलवाओ, "मैंने जब-भी तुम्हारे पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की, ठीक तब- तब तुमने अपनी ताकत के दम्भ में, कोई न कोई एक नई हरकत पटककर सारा बना-बनाया खेल बिगाड़ दिया।" 

"पिछली बार भी तुमने, मोंटू मंकी को पटक लिया था, और फिर तुम्हारी पोल खुल गई थी। बंदर तो बंदर ठहरे, भला कहाँ तक चुप रहते। पूरे जंगल में तुम्हारे पोस्टर गुस्से से तमतमाए उन्हें बंदरों ने बाँटे थे।"

"आखिर कब तक हम तुम्हारे कठोर प्रवृत्ति को छुपाकर रखें। इस बार तुमने फिर उनके सरदार को नदी का जल पीने और स्नान करने से मना कर दिया।" अरे

"गलती पर गलती खुद करते हो और दोष हमारे सिर पर मढ़ते हो, इससे ज्यादा अब और बर्दाश्त नहीं होता।"

"आखिर मंत्री हूँ कोई अर्दली नहीं!"

लो, पकड़ो - यह रहा मेरा इस्तीफा, मैं चला। मेरे अनुभव की जरूरत तुम्हारे जैसे सैकडों को है। कूनो पहले से ही बहुत गुस्से में था। आँखें लाल पीली करके, बर्बर बबर से बोला, बुरे फँसे हो "इस बार तुम्हारा बचना मुश्किल है। "तुम्हें अपने-पराए की समझ है कि नही! "तुमने अपनी तुफैल में, अहिंसक हिरणों को छेड़ दिया; वे तुम्हें छोड़ेंगे नहीं।"

अपनी झब्बर पूछ उठाकर बबर ने गुर्राते हुए कूनो से कहा, "जा, जा, बड़ा आया समझाने वाला।

"हम शेर हैं, गीदड़ नहीं।

- मनोज जैन 'मधुर'

निष्कर्ष; यह कहानी हमें सिखाती है कि केवल दिखावटी बदलाव या “डैमेज कंट्रोल” से सच्चाई नहीं छिपाई जा सकती। अहंकार और गलत व्यवहार अंततः व्यक्ति की असलियत उजागर कर ही देते हैं, इसलिए सुधार दिखावे में नहीं, बल्कि स्वभाव में होना चाहिए।

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