“Otter Tuntun” is a delightful Hindi children’s story by Dr. Rakesh ‘Chakra’ that teaches valuable lessons about unity, patience, kindness, and forgiveness. Through interesting characters and engaging events, the story inspires children to live peacefully and help others.
Otter Tuntun Story in Hindi | Inspirational Moral Story for Children About Unity and Kindness
डॉ. राकेश ‘चक्र’ की बाल कहानी “ऊदबिलाव टुनटुन” बच्चों को मित्रता, सहनशीलता, एकता और दया का सुंदर संदेश देती है। रोचक घटनाओं से भरपूर यह कहानी सिखाती है कि शरारत और अहंकार का अंत हमेशा बुरा होता है, जबकि समझदारी और करुणा से हर समस्या का समाधान संभव है।
एकता, समझदारी और दया की प्रेरणादायक हिंदी कहानी
ऊदबिलाव टुनटुन
सुंदर वन अपने नाम के अनुरूप बहुत सुंदर और मनोहारी था। इस वन में अनेकानेक किस्म के पेड़ पौधे, झीलें, सरोवर, पशु पक्षियों की कलरव और साथ ही कहीं-कहीं बहुत दलदल था। इस जंगल में अन्य जंगली जानवरों के साथ-साथ बहुतायत में बलशाली चीते पाए जाते हैं।
इसी जंगल में एक बहुत छोटा-सा सरोवर था, जिसमें काफी ऊदबिलाव रहते थे। ऊदबिलाव का मुखिया टुनटुन बहुत समझदार और शांति प्रिय था। वैसे भी स्वभाव से सभी ऊदबिलाव बहुत शान्ति प्रिय होते हैं। वे सरोवर में मछली खाते और मस्ती से रहते। खूब खेलते-कूदते।
इसी सरोवर के पास बंदरों का एक समूह था, जिसका मुखिया चम्पी बहुत ही अहंकारी और उद्दंड था। वह कभी-कभी ऊदबिलावों को परेशान की नियत से सरोवर के पास आ धमकता । उसे और उसके साथियों को ऊदविलावों का सुख न सुहाता। उदण्डी बन्दर नई नई हरकतें करके उन्हें घण्टों परेशान करते रहते। कई बार प्यार से बंदरों के मुखिया चम्पी को ऊदविलावों के मुखिया टुनटुन ने समझाया कि भाई हमें परेशान मत किया करो। हमें भी सुख से जीने दो और तुम सब भी सुख जिओ। अपना खाओ और अपना कमाओ। जीवन में सदा मुस्कराओ। हो सके तो दूसरों को सुख पहुंचाओ।
लेकिन आतताई समझाने से कहाँ मानते हैं, उन्हें तो दूसरों को तंग करने में बहुत ही आनन्द की अनुभूति होती है।
फिर भी ऊदबिलाव काफी दिनों तक उनकी शैतानियों को सहते रहे। लेकिन जब सिर से पानी उतरने लगा तो मुखिया टुनटुन ने अपने साथियों के साथ विचार विमर्श किया और अंतिम निर्णय लिया कि बंदरों को कड़ा सबक सिखाया जाय।
उन्होंने मिलजुल कर ऐसा जाल तैयार किया कि जो भी बन्दर शैतानी करें, वे सब उसमें आसानी से फँस जायँ।
शाम का समय था। पंछीगण अपने बसेरों की ओर लौटने लगे थे। मौसम सुहावना था। हवा शीतल मन्द सुगंध बह रही थी। कल से बंदरों का मुखिया चम्पी अपने साथियों के साथ तंग करने नहीं आया था। लेकिन वह कहाँ माननेवाला था, उसे तो दूसरों को परेशान करने में ही बहुत सुख मिलता था। वह अपने साथियों के साथ उस सरोवर पर आज फिर आ धमका। सभी ऊदबिलाव सबक सिखाने की प्रतीक्षा कर ही रहे थे। बंदरों को फंसाने का जाल तैयार कर ही रखा था। जैसे ही चार-पाँच बन्दरों ने ऊदविलावों पर तंग करने की नीयत से हमला किया, वे सभी जाल में फँसते गए। जो भी जाल में फंसे उन्हें टुनटुन ने अंदर पानी में खींच लिया। देखते ही देखते चम्पी और उसके साथियों की हालत खराब होने लगी। जो बन्दर सरोवर के आसपास बैठे थे, वे यह दृश्य देखकर ऐसे डरे कि वहाँ से बहुत जल्दी पूंछ दबाकर भागे।
कुछ ही देर में चम्पी और उसके साथियों की हालत जब ज्यादा ही खराब होने लगी, तब चम्पी ऊदविलावों के मुखिया टुनटुन से क्षमा याचना करते हुए बोला।
“भैया हमें अब क्षमा कर दीजिए। हमने अपनी करनी का फल भोग लिया है। मैं और मेरे साथी कभी भी भविष्य में तुम्हें तंग नहीं आएंगे।“
टुनटुन को दुष्ट बंदरों पर दया आ गई, क्योंकि वह बहुत दयालु था। उसने तुरत-फुरत साथियों की सहायता से सभी बंदरों को जाल से मुक्त कर दिया।
चम्पी और उसके साथी ऐसे दुम दबा करके भागे कि फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इस घटना के बाद सभी ऊदबिलाव सुख और शांति पूर्वक रहने लगे थे।
- डॉ. राकेश ‘चक्र’
निष्कर्ष; इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है कि दूसरों को परेशान करना गलत है। धैर्य, एकता और समझदारी से हर कठिनाई का सामना किया जा सकता है, तथा दया और क्षमा सबसे बड़े गुण हैं।
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