Poonam Srivastava’s children’s story “Homework” beautifully teaches kids the importance of time management, responsibility, and discipline. Through Dublu’s innocent experiences, the story delivers a valuable lesson that completing work on time helps us enjoy every part of life happily and successfully.
Homework Story for Kids – Inspirational Hindi Moral Story About Time Management and Responsibility
पूनम श्रीवास्तव की बाल कहानी “होमवर्क” बच्चों को समय का महत्व, जिम्मेदारी और मेहनत का सही अर्थ बहुत सरल और रोचक तरीके से समझाती है। डबलू की मासूम सोच और उसके अनुभवों के माध्यम से यह कहानी सिखाती है कि जो बच्चा अपना काम समय पर पूरा करता है, वही जीवन में हर खुशी का आनंद सही ढंग से ले पाता है।
समय का महत्व और जिम्मेदारी सिखाने वाली प्रेरणादायक हिंदी कहानी
होमवर्क
जैसे ही डबलू स्कूल से घर लौटा माँ बोली-“अरे मेरा राजा बेटा आ गया।अच्छा चलो अब हाथ-मुँह धो लो फिर फटाफट हम दोनों खाना खाते हैं।तब तक मैं खाना भी गरम कर लेती हूँ।”जब दोनों खाना खा चुके तो माँ ने प्यार से उसका सिर सहलाते हुए पूछा—“बेटा आज का दिन कैसा रहा?” डबलू बोला- “माँ रोज की तरह। हाँ माँ,आज हमारे स्कूल में नए टीचर जी आये हैं।वो हमें अंग्रेजी पढ़ाएंगे।”
“अच्छा,ये तो बहुत ही अच्छी बात है। तुम्हारी अंग्रेजी भी थोड़ी कमजोर है।ध्यान से मन लगा कर पढ़ना।” माँ ने उसे समझाया।
“पर माँ,ये टीचर भी हर विषय में इतना ढेर सारा होमवर्क दे देते हैं कि अलग से कुछ पढ़ने का समय ही नही मिलता।”
“हूं, तुम्हारी बात भी ठीक है बेटा पर पढ़ना तो पड़ेगा ना तभी तो आगे चल कर एक अच्छे इंसान बनोगे।बिना पढाई के आगे कैसे बढ़ोगे इसलिए हमको भविष्य में कुछ बनने के लिए मेहनत तो करनी ही पड़ती है। अच्छा अब सो जाओ होमवर्क भी तो करना है।”—माँ हँसते हुए बोलीं।
समय पर माँ ने डबलू को जगाया पर डबलू तो जागने का नाम ही नहीं ले रहा था। बड़ी मुश्किल से उठा तो माँ ने उसे गरम-गरम दूध पकड़ाया और बोलीं—बेटा, “थोड़ी देर होमवर्क करने के बाद खेलने चले जाना।”
डबलू बैठ गया होमवर्क करने। अभी डबलू का होमवर्क आधा ही हुआ था कि उसके दोस्त उसे बुलाने आ गए।
“अरे डबलू, क्या कर रहे हो, देखो खेलने का समय हो गया है चलते हैं।” रामू बोला।
“पर मेरा काम अभी पूरा नही हुआ है।” डबलू रुआंसा हो रहा था।
“तो क्या हुआ लौट कर पूरा कर लेना।”रामू ने जिद की।और बस डबलू चल पड़ा दोस्तों के साथ।
डबलू दोस्तों के साथ खेलने में इतना व्यस्त हो गया कि उसे समय का ध्यान ही नहीं रहा। जब माँ ने आवाज दी तब उसे होश आया।वह घर आकर काम पूरा करने बैठ तो गया पर स्कूल से मिला काम इतना ज्यादा था कि पूरा होने का नाम ही नहीं ले रहा था। फिर डबलू उठ कर खाना खा कर सो गया।सुबह उठने पर उसे ध्यान आया कि काम तो पूरा किया ही नहीं अब आज तो डांट खानी ही पड़ेगी। और वही हुआ, होमवर्क पूरा न होने की सजा में उसे दिन भर बेंच पर खड़े रहना पड़ा।
जब डबलू घर लौटा तो माँ ने उसे थका देख कर पूछा—“क्या बात है डबलू? तुम इतने थके क्यों लग रहे हो?” तो डबलू ने माँ को सारी बात बताई। माँ ने कहा—“चलो अब आगे से काम पूरा करके ही जाना समझे।”
बड़े मन से वो स्कूल का काम करने बैठा और मन में सोचा कि आज काम करके ही सोऊंगा। पर फिर काम पूरा होते होते उसे नींद आने लगी और वो सो गया।
सोते-सोते वो सपना देखने लगा कि वो बैठा घर में होमवर्क कर रहा है और उसकर दोस्त मजे से खेल रहे हैं।दीनू काका का लड़का तो स्कूल भी नही नहीं जाता घर में बैठे बैठे खाता,खेलता और सो जाता। और तो और उसे कोई काम भी नहीं करना पड़ता।और उसका दोस्त पूरब वो भी तो बस अपने पापा के साथ इधर-उधर घूमता रहता है और उसके पापा उसे कुछ नहीं कहते। एक वो है जो होमवर्क के पीछे रोज स्कूल में डांट खाता है और माँ भी तो पढ़ो-पढ़ो करती हैं।वो भी नहीं सोचती कि आखिर बच्चा हूँ थक जाता हूँ। वो भी तो पापा के ऑफिस जाने के बाद आराम से रहती हैं। जो मन आये वो करती हैं। टी०वी० भी देखा करती हैं और अपनी दोस्तों से बातें भी।बस एक वो ही है कि उसको अपनी पढाई से फुर्सत ही नहीं मिलती कि वो भी और बच्चों की तरह मस्ती करे।
तभी उसकी माँ ने जगाया—“बेटा उठो,स्कूल को देर हो जायेगी।“ तभी वो गुस्से में बोला—“फिर स्कूल,ओफ्फो।”
“अरे क्या हुआ बेटा ऐसा क्यों कह रहे हो कुछ बात है क्या?”
“कुछ नही माँ”—वो अनमने से बोलकर तैयार होने लगा।तभी माँ ने उसको बुलाया और प्यार से बोली—“अगर आज स्कूल जाने का मन नहीं है तो मत जाओ।”
“सच माँ ” डबलू के चहरे पर खुशी आ गयी।
“अरे हाँ,चलो आज घर पर ही रहो।”
डबलू को तो मनचाही मुराद मिल गई।चलो आज स्कूल से छुट्टी।
“आज तो हम भी दिन भर मजे करेंगे।हुर्रे”—चिल्लाता हुआ वो अपने कपड़े बदलने भागा। और थोड़ी ही देर में अपने दोस्त के घर जा पहुंचा।
“रवि,चलो खेलने चलते हैं।”
“अरे,तुम्हें स्कूल नहीं जाना क्या?”
“नहीं आज तो मैं घर पर मौज मनाऊंगा, तुम भी मत जाओ।”
रवि—“ना बाबा ना मैं तो स्कूल चला। एक दिन का होमवर्क तो किसी तरह पूरा हो जाता है। और फिर दूसरे दिन का भी काम एक साथ करना पड़ेगा, अच्छा-बॉय।”
रवि के जाने के बाद उसने सोचा चलो दीनू काका के लड़के के साथ खेलता हूँ। दीनू के घर पर जाकर उसने आवाज दी--, “किशन----”
तभी काकी बाहर निकल कर आई। बोलीं-“बेटा तू आज स्कूल नहीं गया?”
“नहीं चाची।” उसने छोटा सा जवाब दिया।
“चाची, किशन कहाँ है? मैं खेलने आया हूँ।”
चाची ने बताया—“बेटा वो तो तेरे काका के साथ काम पर गया है।”
किशन काम भी करता है ये सुनकर उसे अचम्भा हुआ।
“पर काकी वो तो स्कूल जाता नहीं फिर क्या करता है?”
काकी थोड़ा सा रुआंसी होकर बोली—“बेटा हम गरीब लोग हैं।मेहनत मजूरी करते हैं। तब दो जून की रोटी खाते हैं।ऐसे में स्कूल उसको कैसे भेजें भला? वो तेरे काका के साथ घूम घूम कर मूंगफली और रेवड़ियां बेचने जाता है।”
“अच्छा?” किशन की माँ की बातें सुन कर डबलू की आँखें आश्चर्य से खुली रह गयी। फिर और कहीं जाने का उसका मन नहीं हुआ। वह सीधे घर में आया तो माँ ने पूछा—“बेटा खेल आया?”
“नहीं माँ----।“ वो उदास होकर बोला।“कोई मिला नहीं खेलने को।”
“अच्छा कोई बात नहीं। मैं थोड़े और काम करके तेरे साथ खेलती हूँ। तब तक तू टी वी देख ले।” माँ ने समझाया।
“जी माँ---” कहकर वो टीवी देखने लगा। फिर उठ गया माँ को देखने के लिए।माँ तब भी काम ही कर रही थी। उसने पूछा—“माँ-काम खत्म हो गया?”
“नहीं बेटा बस जरा सा और है—तब तक तू थोड़ा और टीवी देख ले।” फिर डबलू ने अपना पसंदीदा चैनल कार्टून लगाया। थोड़ी देर तो उसे कार्टून देखना अच्छा लगा फिर उसका मन वहां से हट गया ।
वो फिर उठ कर माँ को देखने गया। माँ अभी भी अपने काम में मशगूल थीं। वो फिर वापस आ कर अपने बिस्तर में लेट गया और सोने की कोशिश करने लगा। पर नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी। उसका मन भटक रहा था। रवि, किशन और दोस्तों के साथ माँ की ओर भी। इसका मतलब है कि सब लोग अपने-अपने काम पर ध्यान देते हैं। आखिर रवि को भी तो स्कूल का काम मिलता है। फिर भी वो काम पूरा करता और खेलता भी है। और किशन? डबलू तो सोचता था कि किशन तो कुछ काम ही नहीं करता जबकि वो अपने पापा के काम में हाथ बंटाताहै और खुश भी रहता है। उसके अपने पापा भी तो रोज़ ऑफिस काम से ही तो जाते हैं। और छुट्टी भी नहीं लेते। जब कभी वो पूछता—“पापा आपकी छुट्टी है?” तो वो हंस कर बोलते—“बेटा छुट्टी तो है पर काम ज्यादा है। तो उसे पूरा करना पड़ेगा ना ।”
तो इसका मतलब कि माँ भी मुझे व पापा को ऑफिस भेजने के बाद काम में लग जाती हैं। और मेरे आने तक भी काम करती हैं। और शाम को फिर काम पर लग जाती हैं सोचते-सोचते उसका सिर भारी होने लगा उसका नन्हा सा मन भर आया।उसको तो केवल पढ़ना ही रहता है।जरा सा होमवर्क उसको ज्यादा सा लगता है। इसी कारण आज स्कूल न जाने की वजह से वो बहुत खुश था। इसी होमवर्क की वजह से। इसका मतलब रवि सही कह रहा था। और माँ पापा भी तो कहते हैं कि पहले अपना काम समय से करके फिर खूब खेलो कूदो। वो क्यों नही समझ पाया। तभी यकायक उसका मन खुश हो गया और वो तुरंत सो भी गया।
सुबह माँ ने जगाया तो बिना अलसाये डबलू उठ कर माँ के गले लग गया।जब तक माँ कुछ पूछतीं वो बाथरूम में घुस गया। फिर तैयार होकर नाश्ता किया। माँ ने पूछा—“क्या बात है? आज तो अचानक से मेरा राजा बेटा सयाना हो गया है”।तो डबलू मुस्कुराते हुए बोला---“हाँ माँ--- मैं समझ गया जो अपना काम समय से पूरा करता है वो हर काम कर सकता है। सब कुछ। हमको अपने काम से कभी नहीं घबराना चाहिए।अच्छा माँ-टाटा-बाय---”और मुस्कुराते हुए माँ ने भी हाथ हिला दिया।
- पूनम श्रीवास्तव
निष्कर्ष; यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि हमें अपने काम से कभी नहीं घबराना चाहिए। समय पर जिम्मेदारियाँ पूरी करने से पढ़ाई, खेल और जीवन के हर काम में सफलता और खुशी मिलती है।
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