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'परिश्रम और सफलता' - निधि 'मानसिंह' (आलेख)

परिश्रम में ही विकास का रहस्य निहित है। "परिश्रम सफलता की कुंजी है"। अगर मनुष्य परिश्रम करता है तो वह कभी व्यर्थ नहीं जाती, किसी न किसी रूप में सामने आ ही जाती है और उसका फल बड़ा आनन्ददायी होता है। परिश्रम के बल पर ही मानव ने ज्ञान - विज्ञान के क्षेत्र में उपस्थित सभी उपलब्धियों को प्राप्त किया है। परिश्रम करके ही मानव अपने जीवन को सुखमयी बना सकता है। परिश्रम रहित व्यक्ति का जीवन सदैव दुखों व संकटों से भरा रहता है क्योंकि वह बिना मेहनत करें ही सब कुछ प्राप्त कर लेना चाहता है। परंतु मेहनत करे बिना हम कुछ भी नहीं पा सकते।

ईश्वर भी उसी व्यक्ति का साथ देता है जो व्यक्ति परिश्रमी हो, मेहनती हो और मेहनत करने को ही अपना कर्म और धर्म समझता है। कहा भी गया है -

"मेहनत एक ऐसी कुंजी है जो सफलता के सभी द्वार खोल देती है"

इतिहास भी साक्षी है कि जिन लोगों ने निरंतर परिश्रम किया है उन्होंने सदैव अपना लक्ष्य प्राप्त किया है और सफलता ने उनके कदम चूमे है। प्राचीन काल में ऋषि मुनि निरंतर तपस्या करके सिद्धियां प्राप्त करते थे। हमारे चिकित्सक, वैज्ञानिक, खिलाड़ी और अभिनेता आदि सभी की सफलता के पीछे उनकी लगन और परिश्रम है।

परिश्रम के बिना कोई भी उपलब्धि हम प्राप्त नहीं कर सकते। परिश्रम रहित व्यक्ति का जीवन अभिशाप एवं बोझ बनकर रह जाता है। मनुष्य के भाग्य का निर्माण उसकी प्रगति परिश्रम से ही होती है। राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त ने भी कहा है -

"बनता बस उदयम ही विधि है,

मिलती जिससे सुख की निधि हैं।"

एक विधार्थी के जीवन के लिए निरंतर परिश्रम और अभ्यास नितांत आवश्यक है। जो विधार्थी सदैव परिश्रम करके अध्ययन करते हैं वे हमेशा सफलता प्राप्त करते हैं। उनका जीवन हमेशा खुशियों से भरा होता है और वो सभी के प्रिय होते हैं। जो विधार्थी परिश्रम से जी चुराते है वह अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं इस संसार की सभी उपलब्धियों के पीछे परिश्रम का हाथ है। परिश्रम मे असंभव को भी संभव कर दिखाने की अदुभत शक्ति है।

मानव को परिश्रम रूपी अमूल्य निधि को अपनाकर अपना जीवन सुखमय और सुंदर बनाना चाहिए। एक सरस और सुखमय जीवन का राज भी तो परिश्रम में ही निहित है। कहते हैं

"जिसने परिश्रम किया

उसका जीवन सफल रहा"

परिश्रम का सबसे सुंदर महत्व हम किसान से सीखते है। वह कडी मेहनत करता है, खेतों में हल चलाता है अपनी फसलों की देखभाल करता है, न दिन देखता है न रात देखता है और अंत में उसे उसकी मेहनत का बहुत मीठा फल मिलता है। जब उसकी फसल तैयार होती है तो उसके चेहरे पर उसकी मेहनत की सफलता की जो आभा होती है वह सूर्य की किरणों से कम नहीं होती।

सारे जग का अन्नदाता

दुख में भी वो सुखपाता।

गर्मी, जाड़ा या हो बसंत

सब मौसम में मुस्काता।

हर मौसम ने उसे है पाला

धरती मां का लाल वो,

खेतों का रखवाला।

परिश्रम करने वाला व्यक्ति कभी विफल नहीं होता, उसे अपनी मेहनत का फल जरूर मिलता है चाहे देर से ही सही पर वह सफल जरूर होता है। इसलिए मानव को अगर अपना जीवन खुशहाल बनाना है तो उसे समझना होगा कि "परिश्रम ही सफलता है"।

निधि 'मानसिंह'
कैथल, हरियाणा
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