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डाकिया डाक लाया : खुशी का संदेश लाया

 डाकिया डाक लाया : खुशी का संदेश लाया
डॉ. मुल्ला आदम अली

     आज सवेरे मुझे डाकिय का फोन आया पता चला मेरी पुस्तकों की प्रतियां मेरे पुराने पते पर पहुंच गई हैं। यह मेरे लिए बहुत खुशी का पल है। मैं अपनी पुस्तक को प्राप्त कर खुशी से भर गया, प्रकाशक द्वारा भेजी गई किताबों के साथ में आदरणीय डॉ. प्रदीप जैन जी द्वारा विरचित "सोजे वतन : जब्ती की सच्चाई" के लोकार्पण कार्यक्रम में मेरी किताब "हिन्दी कथा-साहित्य में देश-विभाजन की त्रासदी और साम्प्रदायिकता" का विमोचन हुआ था वह प्रति भी प्राप्त हुई।

    मेरी मातृभाषा उर्दू रही है, मेरा गांव आंध्र प्रदेश और कर्नाटक की सीमा रेखा में आता है जहां कन्नड़ और तेलुगु भाषा का प्रयोग ज्यादा करते हैं। आज मुझे यह कहते हुए गर्व हो रहा है की हिंदी मुझ में समा चुकी है और मैं हिंदी का हो चुका हूं। हिंदी पढ़ना मैंने आठवीं कक्षा से सीखा है, क्योंकि यहां गांव में सातवीं कक्षा तक हिंदी पढ़ाई नहीं जाती थी। फिर भी मेहनत कर हिंदी पढ़ना-लिखना सीख गया और नौवीं कक्षा तक आते-आते सबसे अधिक अंक प्राप्त करता रहा, गुरुजन और माता-पिता भी अचंभित रहते की हिंदीतर भाषी बच्चा हिंदी में कैसे अव्वल आता है, हिंदी से मेरा प्रेम यूं ही बढ़ता चला गया आगे इंटरमीडिएट में साइंस और डिग्री में इतिहास की पढ़ाई किया। आखिर में मैंने हिंदी में अध्ययन शुरू कर दिया, रास्ता आसान नहीं था परिवार संयुक्त था पिताजी गरीब किसान थे घर का आर्थिक स्तर कमजोर ऐसे में खुद को संगठित कर मैंने कई मुश्किलों से युद्ध किया। आज भी गांव के लोग शिक्षा को उतना महत्व नहीं देते जितना देना चाहिए, परिवार का दबाव था मैं पढ़ाई छोड़ कर गांव में रहूं, मैंने सपने देखे और उन्हें पूरा करने की यात्रा पर निकल पड़ा विपरीत परिस्थितियां बार-बार मेरे धैर्य की परीक्षा लेती रही। फिर भी मैं अपनी यात्रा जारी रखूंगा हिंदी के प्रति मेरा प्रेम और सेवा कार्य अनवरत जारी है और रहेगा।

अपनी पुस्तक "हिन्दी कथा-साहित्य में देश-विभाजन की त्रासदी और साम्प्रदायिकता" देख कर मैं भावुक हो गया हूं। मैं अपने जीवन में माता-पिता, सभी गुरुजनों और प्रिय मित्रों तथा पराग कौशिक (पराग बुक्स प्रकाशन) जी का और आदरणीय डॉ. प्रदीप जैन जी जिन्होंने मेरी किताब उद्घाटन कर मुझे अपना आशीर्वाद प्रदान किया इन सभी के प्रति दिल से शुक्रिया अदा करता हूं।🙏💞

किताब : "हिन्दी कथा-साहित्य में देश-विभाजन की त्रासदी और साम्प्रदायिकता"

लेखक : डॉ. मुल्ला आदम अली

मूल्य : ₹ 500

20% छूट और डाक खर्च भी हम वहन करेंगे

प्रथम संस्करण : 2021

प्रकाशक : पराग बुक्स

ISBN : 978-93-84774-90-5

भूमिका : डॉ. प्रीति कौशिक

अपनी प्रति प्राप्त करने के लिये सम्पर्क या व्हाट्सएप करें:

पराग कौशिक :  09911179368


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मेरी अपनी कविताएं : डॉ. मुल्ला आदम अली