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स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति और अद्वितीय प्रतिभा के धनी भारत रत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जयंती पर विशेष

भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 137वीं जयंती पर विशेष

      आज (दिसंबर-3) भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की 137वीं जयंती है। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (3 दिसम्बर 1884 – 28 फरवरी 1963) महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे, और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Indian National Congress) के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संविधान (Indian Constitution) के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। राष्ट्रपति होने के अतिरिक्त उन्होंने 1946 एवं 1947 मेें भारत के पहले मंत्रिमंडल में कृषि और खाद्यमंत्री का दायित्व भी निभाया था। सम्मान से उन्हें 'राजेन्द्र बाबू' कहकर पुकारा जाता है।

उनके पिता महादेव सहाय (फारसी एवं संस्कृत के विद्वान), माता कमलेश्वरी (धर्मपरायण महिला) थी। बारह वर्ष की आयु में राजवंशी देवी से डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का विवाह हुआ था।

 26 जनवरी,1950 में भारत को गणतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिलने के साथ ही डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति (President of India) बने। वर्ष 1957 में वे दोबारा राष्ट्रपति चुने गए। इस तरह वे भारत के एकमात्र राष्ट्रपति थे, जिन्होंने लगातार दो बार राष्ट्रपति (President of India) पद प्राप्त किया था। उन्हें सन् 1962 में अपने राजनैतिक और सामाजिक योगदान के लिए भारत के सर्वश्रेष्ठ सम्मान 'भारत रत्न' (Bharatratna) से भी नवाजा गया।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने कई पुस्तकें भी लिखीं, इनमें से उनके आत्मकथा के अलावा 'बापू के कदमों में बाबू' (Bapu Ke Kadmon Mein), 'गांधीजी की देन', 'सत्याग्रह ऐट चम्पारण' (Satyagraha at Champaran), 'इंडिया डिवाइडेड' (Division of India), और 'भारतीय संस्कृति व खादी का अर्थशास्त्र' भी शामिल हैं।

बीमारी के कारण उनका निधन 28 फरवरी, 1963 को पटना के निकट एक आश्रम में हुआ।

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद (भारत के पहले राष्ट्रपति) उनकी 137वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए ट्वीट (Twitt) किया।


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