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Pulwama Attack: पुलवामा शहीद दिवस पर एक कविता

🇮🇳 पुलवामा शहीद दिवस पर 🇮🇳

प्रेम दिवस पर आओ अपने उन वीरों को याद करें 

दिया बलिदान जिन्होंने कि घर हमारे आबाद रहें 

प्रेम में सबसे ऊँचा दर्जा देश प्रेम कहलाता है 

नमन हर उस शहीद को जो लौट के घर ना आता है 

करवा चौथ हुआ सूना किसी का 

सदा के लिए किसी की राखी छूटी 

नन्हे हाथों से छिन गए खिलौने 

कहीं बुढ़ापे की भी लाठी टूटी 

आँखें नम है उनकी, हर दिन जिनके बिन खलता है  

गुलाब सहित एक दीपक तो उनके लिए भी बनता है।

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डॉ. मंजु रुस्तगी

हिंदी विभागाध्यक्ष(सेवानिवृत्त)
वलियाम्मल कॉलेज फॉर वीमेन
अन्नानगर ईस्ट, चेन्नई