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कीर्ति मल्लिक की दो कविताएं


🎭 लोग मतलब से मिलते हैं 🎭

लोग मतलब से मिलते हैं आज की दुनिया में
बेमतलब तो बस हम आईने में खुद से मिला करते है।

मेरे ही शहर में है मुझसे ही अंजान है
वो जो हमें अपना दिल-ए-अज़ीज़ कहा करते हैं।
 
गलती करते हैं हम, जो सोचते हैं तू मानता है हमको अपना
सच जानकर भी हम हर बार ये गलती किया करते हैं। 

ना ख़ौफ़ है ख़ुदा का ना खोने को कुछ पास है 
कुछ इस तरह बेफिक्र हम अपनी ज़िंदगी बसर किया करते हैं

गम जो आ जाए कभी हयात में हमारे
हम तो उसे भी मोहब्बत से गले लगा लिया करते हैं।
 
कीर्ति मल्लिक


🌍 दुनिया खूसूत लगने लगती है 🌍

दुनिया खूबसूरत लगने लगती है 
तेरा हाथ मेरे हाथ में होने से। 
तमाम मुश्किलें आसान लगती हैं 
मेरे माथे पर तेरे अधरों की छाप होने से। 
सुबह से साँझ हो जाए 
पता नहीं चलता
व्यस्तता में भी चेहरे पर 
मुस्कान दौड़ जाती है 
तेरे साथ का एहसास होने से।

कीर्ति मल्लिक

कीर्ति मल्लिक (Kirti Mallick)
शोध छात्रा
दिल्ली विश्वविद्यालय
दिल्ली

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