Book Review : गांवों की पहचान है मिट्टी की सोंधी महक - अजीत शर्मा आकाश

गांवों की पहचान है मिट्टी की सोंधी महक

अजीत शर्मा ‘आकाश’

पुस्तक: सोंधी महक (काव्य संग्रह), कवि: अशोक श्रीवास्तव ‘कुमुद’, प्रकाशक: गुफ़्तगू पब्लिकेशन, प्रयागराज, मूल्य रू 175 रुपये’

अशोक श्रीवास्तव ‘कुमुद’ के ‘सोंधी महक’ काव्य संग्रह में आज के ग्राम्य जीवन एवं ग्रामीण परिवेश की अनेक परिदृश्य प्रस्तुत किये गये हैं। संग्रह में कुल 30 कविताएं सम्मिलित हैं, जिनमें गांव एवं उसके जन-जीवन’ का चित्रण परिलक्षित होता है। कविताओं में गांव के साथ-साथ समाज और देश की चिन्ताओं को भी उजागर करते हुए अनेक सामाजिक एव राजनीतिक विसंगतियों पर प्रहार करने का प्रयास किया गया है। रचनाकार ने वर्तमान ग्रामीण जीवन का यथार्थ चित्रण करने की चेष्टा की है। किसानों को कभी सूखा और कभी बाढ़ का क़ह्र झेलना पड़ता है। कर्जों में फंसे, तंगी में जीते, छोटे-छोटे झगड़ों को निपटाने के लिए कचहरी के चक्कर लगाते हुए भोले-भाले ग्रामीण अपना जीवन बिता देते हैं। कृषि कार्य से अब एक सामान्य कृषक के पूरे परिवार की ज़रूरतें को पूरी नहीं हो पाती। इसके अतिरिक्त जनसंख्या विस्फोट, रूढ़िवादिता तथा अंधविश्वासों से भी ग्रामीण जन ग्रसित हैं। गरीबी और अशिक्षा के कारण पुरानी परंपराओं तथा सामाजिक बंधनों ने उन्हें जकड़ रखा है। आज गांव में भी बदलाव आता जा रहा है। अनेक विसंगतियाँ ग्रामीण जनों को भी घेरती सी दृष्टिगत होती हैं। गांववासी विशेषकर युवा, नगरों की चकाचौंध से प्रभावित होते जा रहे हैं। उन्हें गांवों में रहना अब अच्छा नहीं लगता। वह शिक्षा, नौकरी और सुख सुविधाओं का पीछा करते हुए नगर पहुंचना चाहता है। इन सभी समस्याओं को संग्रह की कविताओं में स्थान दिया गया है।

 संग्रह की लगभग सभी कविताओं में बुधिया नामक पात्र एक आम ग्रामीण का प्रतिनिधित्व करता है, जिसको केन्द्रित कर ग्रामीणजन की छटपटाहट एवं उसके भीतर की कसक तथा गांवों की दशा-दुर्दशा को शब्दचित्रों के माध्यम से उजागर किया गया है। कहा जा सकता है कि सभी रचनाएँ ग्राम्य जनों के मनोभावों एवं ग्रामीण परिवेश को व्यक्त करने में काफ़ी हद तक सफल रही हैं। पुस्तक को पढ़ना ग्राम्य जीवन को समझना है। संग्रह की कविताएँ गाँव में बोली जाने वाली सहज एवं सरल भाषा में हैं, जिनमें आम बोलचाल के शब्दों का ही प्रयोग किया गया है। पुस्तक का मुद्रण एवं कवर पृष्ठ आकर्षक है। 

- अजीत शर्मा ‘आकाश’

167, अतरसुइया, प्रयागराज

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