जंगल में कोरोना: एक शिक्षाप्रद पद्यकथा बच्चों के लिए

Dr. Mulla Adam Ali
0

Hindi Verse Story Jungle Me Corona by Dr. Surendra Vikram, Poetry Story in Hindi, Bal Kavita Shikshaprd, Hindi Kids Poems.

Jungle Mein Corona

jungle me corona bal kavita

शिक्षाप्रद बाल कविता: यह बाल कविता जंगल के जानवरों के माध्यम से कोरोना महामारी के दौरान सावधानी, दूरी और घर पर रहने की सीख देती है। मनोरंजक शैली में बच्चों को सतर्कता और समझदारी का संदेश देती यह पद्यकथा डॉ. सुरेन्द्र विक्रम द्वारा रचित है।

हिंदी शिक्षाप्रद पद्य कथा

रहो सभी घर के अंदर


दस दिन पहले रविवार को 

कोलकाता से नानी आईं।

रसगुल्ला संग दूध की बर्फी

दो -दो डिब्बे भरकर लाईं।।

जब भी नानी आ जाती हैं 

खुश हो जातीं मेरी मम्मी।

पापा जी खुद चाय बनाते 

फूली -फूली दीदी पम्मी ।

रात हुई तो हमें बुलाकर 

नानी ने इक कथा सुनाई।

कैसे जंगल के राजा ने 

नासमझी में जान गवाई।

बुद्धिमान खरगोश बहुत था 

उसने अपनी अकल लगाई।

कूद गया जब शेर कुएँ में 

मिली उसे तब खूब बधाई।

जंगल के सारे पशु -पक्षी 

रोज शाम को मीटिंग करते।

कोई नई मुसीबत ना हो 

मिलते सब पर डरते डरते।

एक शाम को गीदड़ आया 

उसकी दोनों आँखें लाल ।

छींक रहा था बारहसिंगा

उसकी बदल गई थी चाल।।

टें- टें करने वाला तोता 

बोल रहा था भें- भें- भें ।

चीं- चीं करने वाली चिड़िया 

बोल रही थी में-में-में । 

तभी भेड़िया आकर बोला

मुझको आया तेज बुखार।

काँप रहा था थर- थर बंदर

उसने गोली खाई चार।

हिलते -डुलते पंख समेटे 

आसमान से उतरा बाज।

उसने सबको खबर सुनाई

मरे मिले सौ पक्षी आज।

तोता- मैना की शादी में 

जिसने बढ़कर हाथ मिलाया।

सब के सब बेहोश पड़े हैं 

मेरी समझ नहीं कुछ आया।

बीच सड़क पर खड़ी लोमड़ी 

साँस ले रही जल्दी-जल्दी ।

कौवा उसको बता रहा है 

खा लो झट से पीली हल्दी।

बुरा हाल जंगल का सुनकर 

सभी जानवर हुए उदास ।

जल्दी-जल्दी खबर हो गई 

चलो -चलो राजा के पास ।

ऐसे जंगल का क्या होगा 

सोच सभी को रोना आया।

खबर छपी थी बड़ी बड़ी 

कि पड़ा 'करोना' का साया।

'दो गज दूरी माॅस्क' जरूरी 

सबको बता रहा था बंदर ।

राजा ने ऐलान कर दिया 

रहो सभी अब घर के अंदर।


- डॉ. सुरेन्द्र विक्रम

ये भी पढ़ें; परछाईं: बच्चों की कल्पनाशील दुनिया पर एक प्यारी बाल कविता

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. learn more
Accept !
To Top