These 5 fun and engaging children’s poems bring joy, laughter, and learning together. Through playful verses about nature, friendship, and everyday life, kids can enjoy reading while exploring important life lessons.
5 Fun and Educational Poems for Children
बच्चों की दुनिया रंगीन, खुशमिजाज और कल्पनाओं से भरी होती है। मुट्ठी में है लाल गुलाल (121 बाल कविताएँ) से प्रभुदयाल श्रीवास्तव की 5 मजेदार बाल कविताएँ – ले गए पेड़ लुटेरे, पेड़ नीम का, हरे आम की चटनी, फूलों की बातें, और यह सबको समझाती नदियाँ – बच्चों के लिए पढ़ने और सुनने का आनंद बढ़ाती हैं। हर कविता में नन्हें पाठकों के लिए सीख, प्रकृति का प्यार और हँसी-खुशी का संदेश है। इन्हें पढ़कर बच्चे न केवल भाषा और रचना की सुंदरता सीखेंगे, बल्कि पर्यावरण, भोजन और मित्रता जैसी अहम बातें भी समझेंगे।
मजेदार हिंदी बाल कविताएँ
ले गए पेड़ लुटेरे
मैं हूँ नन्हीं परी, बगल में,
पंख छुपे है मेरे।
आसमान से उड़कर आई,
बिलकुल सुबह सवेरे।
जीभी, ब्रश, मंजन भी भूला,
दाँत घियूँ मैं कैसे।
कैसे यह सामान खरीदूँ
नहीं जेब में पैसे।
नहीं अभी तक मुँह धो पाई,
इससे आलस घेरे।
कच्चे दाँत दूधवाले है,
कैसे इन्हें बचाऊँ।
सोच रही हूँ नीम वृक्ष से,
दातुन लेकर आऊँ।
नहीं दिख रहे नीम वृक्ष पर,
लगा लिए कई फेरे।
अगर नीम के पेड़ कहीं,
दो चार मुझे मिल जाते।
आसमान से रोज़ उतरकर,
दातुन लेने आते।
पता नहीं कब लूट यहाँ से,
ले गए पेड़ लुटेरे ।
पेड़ नीम का
घर के बाहर छाता बनकर,
खड़ा हुआ है एक हकीम सा।
पेड़ नीम का।
हवा चली तो डाली पत्ते,
झूमे, छिवा छिवौअल खेले।
सुबह धूप के हरकारों ने,
हर दिन दंड तने पर पेले।
सेवक बनकर दरवाजे पर,
अड़ा हुआ है बली भीम सा।
पेड़ नीम का।
चाचा, पापा, बड़ी बुआ ने,
यहीं बटोरी पकी निबौली।
यहीं बैठकर भरी सभी ने,
शुद्ध हवा से अपनी झोली।
देता रहा निरंतर सबको
खुशी-खुशी से सुख असीम सा।
पेड़ नीम का।
गुड़ की लैया, तिल की पट्टी,
यहीं बैठकर सबने खाई।
बात-बात में आपस में ही,
हुई दोस्ती हुई लड़ाई।
इन सबसे बेखबर खड़ा है,
पढ़े-लिखे अच्छे मुनीम सा।
पेड़ नीम का।
हरे आम की चटनी
हरे आम की चटनी कितनी,
खट्टी मिट्ठी है।
सिलबट्टे पर माँ ने पीसी,
अदरक धनियाँ डाल।
उसमें मिला दिया है मन का,
सब स्नेह दुलार।
लगता है घर में खुश्बू की,
आई चिट्ठी है।
दादाजी ने खाई चटनी,
पापा ने खाई।
दादी ने दो बार मँगाई,
खाकर मुस्कराई।
दीदी ने आकर चटनी से,
भर ली मुट्ठी है।
चाचाजी, चाची भी चटनी,
खाने के शौकीन ।
आम तले से लाते हर दिन,
कच्ची अमियाँ बीन।
खुश रहते चाचाजी, चाची,
हट्टी कही है।
फूलों की बातें
सुबह-सुबह फूलों को देखा,
आपस में बतियाते।
गले मिल रहे थे खुशियों से,
अपनी कथा सुनाते।
कहा एक ने, आज रात तो,
बहुत मजा था आया।
जब चंदा की एक किरण ने,
उससे हाथ मिलाया।
चंचल हवा पास से गुजरी,
गाना गाते-गाते।
तभी दूसरे ने खुश होकर,
अपनी कही कहानी।
उससे मिलने रात आई थी,
इक पारियों की रानी।
धौल जमाकर पंखुड़ियों पर,
भागी थी इतराते ।
बोला फूल तीसरा हँसकर,
मेरी भी तो सुनलो।
पड़े ओस के हीरे मुझ पर,
एकाधा तो चुन लो।
खुलकर हँसे खूब फिर तीनों,
अपने सिर मटकाते।
यह सबको समझाती नदियाँ
बहुत दूर से आतीं नदियाँ,
बहुत दूर तक जाती नदियाँ।
थक जाती जब चलते-चलते,
सागर में खो जाती नदियाँ।
गडे, घाटी, पर्वत, जंगल,
सबका साथ निभाती नदियाँ।
मिल-जुलकर रहना आपस में,
यह सबको समझाती नदियाँ।
खेत-खेत को पानी देती,
तट की प्यास बुझाती नदियाँ।
फसलों को हर्षा-हर्षाकर,
हँसती है, मुस्काती नदियाँ।
घाट कछारों और पठारों,
सबका मन बहलाती नदियाँ।
सीढ़ी पर हँसकर टकरातीं,
बलखाती, इठलाती नदियाँ।
गर्मी में जब तपता सूरज,
बन बादल उड़ जाती नदियाँ।
पानी बरसे जब भी झम-झम,
रौद्र रूप धर आतीं नदियाँ।
जब आता है क्रोध कभी तो,
महाकाल बन जाती नदियाँ।
जंगल, पशु, इंसान घरों को,
बहा-बहा ले जाती नदियाँ।
सूखे में पर सूख-सूखकर,
खुद काँटा बन जातीं नदियाँ।
पर्यावरण बचाना होगा,
चीख-चीख चिल्लाती नदियाँ।
- प्रभुदयाल श्रीवास्तव
ये 5 मजेदार बाल कविताएँ बच्चों के लिए मनोरंजन और सीख दोनों का बेहतरीन संगम हैं। प्रकृति, मित्रता, भोजन और नदियों जैसी जीवन-संबंधी बातें सरल और रंगीन भाषा में प्रस्तुत की गई हैं। इन्हें पढ़कर बच्चे न केवल हँसेंगे, बल्कि सोचने और समझने की क्षमता भी बढ़ाएँगे।
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