This story teaches children the values of courage, cleverness, and honesty. It shows how Chiku the rabbit uses his wits to achieve his goal while staying alert to tricks, offering both fun and an important lesson about right and wrong.
Double the Money Story for Kids in Hindi
यह कहानी बच्चों के लिए साहस, चतुराई और ईमानदारी की शिक्षा देती है। इसमें चीकू खरगोश अपने लक्ष्य को पाने के लिए न केवल होशियारी दिखाता है, बल्कि ठग भालू जैसी चालाकी से भी सावधान रहता है। बच्चों को यह कहानी न केवल मनोरंजन देती है, बल्कि सही और गलत की समझ भी सिखाती है।
साहस और चालाकी की कहानी
दोगुना धन
चीकू खरगोश अपने ट्रैक्टर के लिए हल खरीदना चाहता था। उसके पास एक हजार रुपये थे। नई किस्म के हल के लिए उसे दो हजार रुपयों की आवश्यकता थी। वह एक हजार रुपये लेकर शहर की ओर चल पड़ा। उसने सोचा वहाँ किसी मित्र से वह उधार ले लेगा।
रास्ते में उसे एक साधुवेशधारी भालू मिल गया। भालू ने उसे पुकारते हुए पूछा, "बेटा, किस चिंता में डूबे हुए हो?"
चीकू ने लापरवाही से उत्तर दिया, "महाराज आपने तो दुनियादारी से नाता तोड़ लिया है। आपको हमारी चिंता से क्या लेना-देना है।"
"नहीं, नहीं, हमें बताओ। हम तुरन्त तुम्हारी चिंता दूर कर देंगे," भालू ने हाथ की माला के मनके ऊपर-नीचे करते हुए कहा।
"मुझे एक हजार रुपयों की आवश्यकता है। क्या करनी पड़ती है तब जाकर वह मंत्र देते हैं। निकालो, तुम्हारे पास जितना भी रुपया-पैसा है, मैं उसे अभी दोगुना किए देता हूँ।"
चीकू ने जेब से एक सौ रुपये का नोट निकालते हुए कहा, "अभी तो मेरे पास यह एक ही नोट है। इसे आप दोगुना करके दिखाइए। यदि यह दोगुना हो गया तो शहर के बैंक में रखे अपने सारे रुपये निकालकर आपसे दोगुने करवा लूँगा।"
भालू ने सौ का नोट पकड़े हुए चीकू को दो मिनट के लिए आँखें बन्द करने के लिये कहा। चीकू ने जब आँखें बन्द कर लीं तो भालू ने अपने जेब में से एक और सौ का नोट निकाला और चीकू के नोट के साथ मिलाकर, कुछ बड़बड़ाने लगा। फिर उसने दोनों नोट हवा में झुलाते हुए चीकू से कहा, "बेटा अब आँखें खोल लो। यह देख लो तुम्हारे एक नोट के दो नोट बन गए हैं।"
चीकू गद्गद होकर भालू के चरणों में गिर पड़ा। भालू ने समझा कि चीकू जाल में फँस गया है।
चीकू भालू के पाँवों को पकड़े-पकड़े बोला, "चलो, महाराज शहर चलें। वहाँ बैक में से सारे रुपये निकलवाकर उन्हें दोगुना कर लेंगे।"
"नहीं बच्चा, हम यहीं बैठे हैं। तुम रुपये ले आओ। यहाँ बैठकर ही हम उन्हें दोगुना करेंगे। हाँ, शहर में किसी को बताना मत, वरना लोग पीछे पड़ जायेंगे। हम हर किसी का धन दोगुना नहीं करते हैं। यह तो तुम जैसे भक्तों का ही करते हैं।" भालू महाराज अपनी दाढ़ी पर हाथ फिराते हुए बोले।
चीकू दोनों नोट अपनी जेब में डालकर शहर की ओर चल पड़ा। वह अभी थोड़ी ही दूर गया था कि उसे भालू के पुकारने की आवाज सुनाई दी। वह रुक गया। भालू उसके पास आकर बोला, "वह एक सौ का नोट दक्षिणा के रूप में मुझे दे दो। इसके अलावा मैं कुछ नहीं लूँगा।"
चीकू समझ गया कि यह ठगराज अपना सौ रुपया छोड़ना नहीं चाहता। वह दृढ़ता से बोला, "यह नोट तो मैं हरगिज नहीं दूँगा क्योंकि यह तो मेरे नोट से पैदा हुआ है। हाँ, दक्षिणा के रूप में कुछ-न-कुछ मैं आपको अवश्य दूँगा।"
भालू मन मारकर चुप हो गया।
चीकू शहर जाकर सीधे पुलिस स्टेशन में गया और वहाँ उसने पुलिस अधिकारी को सारी घटना बताई। अधिकारी खुश होकर बोला, "भैया, उस ठग की तो हमें काफी दिनों से तलाश थी। उसे पकड़ने या पकड़वाने वाले को इनाम देने की घोषणा भी सरकार की तरफ से की गई है।
योजना के अनुसार चीकू रद्दी कागजों से भरा एक थैला लेकर भालू के पास पहुँचा। थैला देखकर भालू उछल पड़ा, बोला, "सारे रुपये ले आए न? लाओ, मुझे पकड़ा दो।"
"आपको पकड़वाने के लिये ही तो आया हूँ," कहते हुए चीकू ने सीटी बजा दी और पास ही छिपे हुए पुलिस वाले बाहर आ गए। उन्हें देखकर भालू ने भागने की कोशिक की मगर पुलिस वालों ने उसे पकड़ ही लिया।
एक ठग को पकड़वाने पर चीकू को एक हजार रुपया इनाम मिला। अब हल खरीदने के लिये उसके पास दो हजार रुपये हो गये।
- गोविंद शर्मा
निष्कर्ष; इस कहानी से बच्चों को यह शिक्षा मिलती है कि ईमानदारी, साहस और चतुराई से हर मुश्किल का हल निकल सकता है। भले ही सामने धोखेबाज क्यों न हो, सही निर्णय और होशियारी से सफलता निश्चित होती है।
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