लालच बुरी बला: शहद और भेड़िये की मनोरंजक बाल कहानी

Dr. Mulla Adam Ali
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This story is about a greedy wolf who becomes fond of honey and troubles the bees for it. With the smart planning of a rabbit, the wolf finally learns a tough lesson that greed always leads to pain and trouble.

The Greedy Wolf and the Honey

बाल कहानी शहद का लालच

यह कहानी एक लोभी भेड़िये की है, जिसे शहद का इतना लालच हो जाता है कि वह दूसरों को परेशान करने लगता है। मधुमक्खियाँ उसकी इस आदत से दुखी हो जाती हैं, लेकिन होशियार खरगोश की बुद्धिमानी से भेड़िये को उसके लालच की कड़ी सज़ा मिलती है। कहानी सिखाती है कि लालच हमेशा दुख और परेशानी ही देता है।

लालच पर आधारित पंचतंत्र शैली की कहानी

शहद का लालच

एक दिन भेड़िये ने मधुमक्खियों के छत्ते को छेड़ दिया। मधुमक्खियाँ उड़ गई। कुछ मक्खियों ने उसे काटा भी। लेकिन छत्ते में से मीठा शहद भी उसे मिला। उसे शहद इतना मीठा लगा कि मक्खियों के डंक से होने वाला दर्द उसे महसूस ही नहीं हुआ। अब तो उसे शहद चाटने की आदत पड़ गई। जहाँ भी मक्खियाँ अपना छत्ता बनातीं, वह वहीं पहुँच जाता और सारा शहद चाट जाता।

मक्खियों ने उससे छुटकारा पाने की बहुत कोशिश की मगर भेड़िया नहीं टला। मक्खियों ने जंगल के राजा शेर से शिकायत की। भेड़िया राजा की सेना का सिपाही था। इसलिये शेर ने उस ओर ध्यान नहीं दिया।

एक दिन मक्खियाँ उदास होकर एक पेड़ पर चुपचाप बैठी थीं, उन्हें खरगोश ने देख लिया। खरगोश ने कहा, "मक्खियों, तुम तो हरदम काम करने वाली हो। तुम्हें देखकर तो लोग मेहनत करने और अपने काम में लगन से जुट जाने की प्रेरणा लेते हैं और तुम निठल्ली बैठी हो? क्या बात है?"

मक्खियों ने राजा शेर के वजीर खरगोश को अपनी समस्या बताई। खरगोश ने एक मिनट सोचा और फिर बोला, "यह तो कोई समस्या नहीं है। बस, तुम्हें एक बार और तकलीफ होगी। फिर हमेशा के लिए उस भेड़िये से तुम्हारा पीछा छूट जायेगा। आओ, मैं तुम्हें तरीका बताता हूँ।"

खरगोश ने उन्हें तरीका बताया। मक्खियों ने वैसा ही किया। अगले दिन भेड़िये ने देखा कि आज मधुमक्खियों ने बहुत बड़ा छत्ता बनाया है। इसमें दो-चार किलो शहद मिलेगा ही। उसने तुरन्त ही अपना मुँह सीधा छत्ते में घुसेड़ दिया। उसे ऐसा करते देख सारी मक्खियाँ एक साथ उड़ गईं। छत्ते में एक बूँद भी शहद नहीं था। भेड़िये को गुस्सा आ गया और उसने छत्ते को मुँह से पकड़कर जोरों से हिला दिया।

वास्तव में वह छत्ता मक्खियों का नहीं था। वह तो ततैया का था। छत्ते के हिलने से उसमें बैठे बड़े-बड़े ततैया बाहर निकल आये और लगे भेड़िये को डंक मारने। भेड़िये को बड़ा दर्द हुआ। वह खूब चिल्लाया मगर ततैयों ने उसका पीछा नहीं छोड़ा।

वह जान बचाने के लिए भागा। ततैया सेना ने कुछ दूर तो उसका पीछा किया, फिर वापस अपने छत्ते में लौट आई। ततैया के डंकों से होने वाली जलन को मिटाने के लिए वह एक रेत के टीले पर लोटपोट होने लगा। उस रेत के टीले में बिच्छुओं का एक बिल था। एक-दो बिच्छू बाहर आ गये और भेड़िये के पेट में उन्होंने भी अपने डंक चुभो दिये।

अब क्या था? भेड़िया मारे दर्द के दस-दस फीट ऊँचा उछलने लगा। साथ ही चिल्लाता रहा कि अब कभी शहद नहीं खाऊँगा। अगर कभी भूल से खा भी लिया तो रेत के टीले पर नहीं लोदूँगा।

उस दिन के बाद मधुमक्खियों को उसने तंग नहीं किया। मक्खियों ने खरगोश को धन्यवाद दिया।

- गोविंद शर्मा

निष्कर्ष; इस कहानी से हमें सीख मिलती है कि लालच का अंत हमेशा बुरा ही होता है। भेड़िये ने शहद के लालच में दूसरों को दुख दिया, पर अंत में उसे खुद कड़ी सज़ा मिली। इसलिए हमें लालच नहीं करना चाहिए और मेहनत व ईमानदारी से ही खुश रहना चाहिए।

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