This poem reflects a timeless truth of human life — people will always talk. Through gentle words and deep insight, it reminds us to rise above criticism and stay true to ourselves. “Some People Will Always Speak” is a tribute to inner strength, self-respect, and the courage to live by one’s own values.
Beyond Criticism: A Poem on Inner Strength
समाज की भीड़ में हर व्यक्ति कभी न कभी आलोचना, तिरस्कार और बदनामी का सामना करता है। यह कविता उसी सत्य को स्वीकार करते हुए आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की राह दिखाती है। “कुछ तो लोग कहेंगे” हमें यह सिखाती है कि दूसरों की बातों से नहीं, अपनी अंतरात्मा की आवाज़ से जीवन जीना ही सच्ची शक्ति है।
समाज की सोच पर करारा व्यंग्य और प्रेरणा
कुछ तो लोग कहेंगे
कुछ तो लोग कहेंगे,
गैरों की बातों से हो क्यों दुखी?
अपनी दुनिया में ही खुश रहो सखी,
लोगों का क्या ही कहे सखी।
हर शख्स ही इनको दिखता काला, सखी,
इस दुनिया के लोग बड़े मतवाले हैं।
काले-गोरे में भेद कराते बड़े हैं,
दुनिया ने भला यहाँ कभी किसी को बख्शा है?
राम-कृष्ण पर भी उँगली उठाई है,
माँ सीता हो या रेणुका, चाहे हो अहिल्या।
दामन सभी का ही दागदार हुआ,
नहीं छोड़ा किसी को इस दुनिया ने —
फिर तू तो एक अदना सा मानव है।
भला बदनामी से कौन यहाँ बच पाया है?
नेहरू से लेकर अटल तक को
ज़माने ने खूब कोसा है।
जिनको जो करना था, करते चले,
बोलो, कब किसी ने सोचा था?
सोचने वाले सोचते रह जाते हैं,
नहीं कर पाए कभी कुछ नया।
जब नए ढंग से तुम ढलोगे,
दुनिया तो बात बनाएगी,
अपनी नाकामियों का ठीकरा
तुम्हारी कामयाबी पर ही फोड़ेंगे।
कुछ तो लोग कहेंगे,
गैरों की बातों से हो क्यों दुखी?
अपनी दुनिया में ही खुश रहो सखी,
लोगों का क्या ही कहे सखी।
- डॉ. रानी उर्फ प्रीतम
निष्कर्ष; दुनिया की जुबान कभी शांत नहीं होती, पर आत्मा की आवाज़ अगर स्पष्ट हो, तो शोर भी कम पड़ जाता है। यह कविता हमें सिखाती है कि जो अपने विश्वास के साथ चलता है, वही आलोचना की आँधी में भी दीपक की तरह जलता रहता है। “कुछ तो लोग कहेंगे” हमें अपने होने पर गर्व करना सिखाती है।
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