भोलाराम और ठग की कहानी – जैसे को तैसा नैतिक शिक्षा कहानी

Dr. Mulla Adam Ali
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This story highlights how wit and presence of mind can defeat deceit. Though Bhola Ram appears simple and innocent, he cleverly teaches a greedy trickster a lesson. It reminds us that dishonesty and greed eventually backfire, while wisdom and honesty always win. Tit for Tat: A Wise Farmer Teaches a Trickster a Lesson.

Short Moral Story for Kids

हिन्दी बाल कहानी जैसे को तैसा

यह कहानी चतुराई, समझदारी और जैसे को तैसा के सिद्धांत को मज़ेदार तरीके से प्रस्तुत करती है। भोलाराम जैसा सरल किसान भी अपनी बुद्धि से ठग को सबक सिखा सकता है—यही इसका संदेश है। कहानी बच्चों को यह सिखाती है कि लालच का अंत बुरा होता है और ईमानदारी हमेशा जीतती है।

समझदारी और चालाकी की प्रेरक कथा

जैसे को तैसा

भोलाराम गाँव का भोलाभाला किसान था। उसके पास एक घोड़ा था। पर वह भोलाराम के लिये ज्यादा उपयोगी था। उसने सोचा घोड़े की बजाय भैंस पाली जाये तो फायदा होगा। उसने घोड़े को बेचने की सोची। घोड़े को लेकर वह मेले में गया।

मेले में कई किस्म के पशु बिकने आये हुए थे। मेले में एक ठग भी आया हुआ था। उसने पहचान लिया कि भोलाराम भोला है। इसे ठगा जा सकता है। ठग ने भोलाराम से चिकनी-चुपड़ी बातें की। उसने पता लगा लिया कि भोलाराम घोड़ा बेचना चाहता है और भैंस खरीदना चाहता है।

मेले में घोड़े के साथ भोलाराम इधर-उधर घूम रहा था। उसने देखा वही आदमी एक भैंस के साथ आ रहा है। उस आदमी के हाथ में एक बड़ी बाल्टी है, जो दूध से भरी हुई है। भोलाराम के पूछने पर उस आदमी ने बताया कि यह इसी भैंस का दूध है। अभी निकाला है उसने यह दूध । बाल्टी बड़ी होती तो वह और भी दूध निकालता।

भोलाराम दूध की मात्रा देखकर भैंस खरीदने को इच्छुक हो गया। दोनों में बातें हुई और वह आदमी घोड़े के बदले में भैंस देने को तैयार हो गया। सौदा चटपट हो गया। वह आदमी भैंस देकर और घोड़ा लेकर चला गया।

कुछ ही देर में उस भैंस की पोल खुल गई। लोगों ने भोलाराम को बताया कि यह भैंस दूध नहीं देती है। यह दूध तो उसने हमारे से खरीदा था। भैंस बूढ़ी और बीमार है। उसने तुम्हें ठग लिया है।

भोलाराम ने उस ठग की तलाश शुरू की। एक जगह वह मिल गया। उस आदमी ने बेशरमी से कहा "तुम्हें जाँच करके और पूछताछ करके सौदा करना चाहिए था। अब तो सौदा हो चुका। अब तो तुम चाहो तो यह भैंस मैं वापस खरीद सकता हूँ। घोड़ा नहीं दूँगा।"

भोलाराम ने कहा "मत दो घोड़ा। घोड़ा तो मुझे बेचना ही था। मेरा घोड़ा एक हजार रुपये का था। मुझे एक हजार रुपये दे दो।"

उस ठग आदमी ने कहा "माना कि तुम्हारा घोड़ा एक हजार रुपये का था। तुम्हारा घोड़ा भैंस के बदले में बिक चुका है। अब तो तुम भैंस बेच रहे हो। चार जनों से पूछ लो। लोग कहेंगे वही कीमत भैंस की दे दूँगा।"

किसी ने भी भैंस की कीमत एक सौ रुपये से अधिक नहीं बताई। बेचारा भोलाराम सौ रुपये लेकर घर की तरफ चल पड़ा। रास्ते में वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया। वहाँ बैठकर वह अपने सौ रुपये गिनने लगा। अभी वह आधे ही गिन सका था कि वहाँ अचानक एक लोमड़ी आ गई। लोमड़ी का घूरा उस पेड़ के नीचे बना हुआ था। लोमड़ी नई ब्याई हुई थी। उसने भोलाराम पर झपट्टा मारना चाहा। पर भोलाराम ने अपनी फुरती दिखाते हुए लोमड़ी के दोनों कान पकड़ लिये। कान पकड़ने से लोमड़ी काबू में आ गई। वह अपने को छुड़ाने की कोशिश करने लगी। इस खींचतान में उसके रुपये बिखर गये।

काफी देर बाद वह ठग आदमी भोलाराम से लिये घोड़े पर सवार होकर वहाँ से गुजरने लगा। उसका ध्यान भोलाराम की तरफ चला गया। वह भोलाराम से पूछने लगा-"तुमने इस लोमड़ी को क्यों पकड़ रखा है? इधर-उधर इतने रुपये क्यों बिखरे हुए हैं?"

भोलाराम उसे सच बताने जा रहा था कि अचानक उसे खयाल आया कि इस आदमी ने उसे ठगा था। क्यों न इसे सबक सिखाया जाये। उसने कहा "मेरे पास एक मंत्र है। यदि नई ब्याई लोमड़ी के कान पकड़कर वह मंत्र बोला जाये तो लोमड़ी के मुँह से रुपयों की बरसात हो सकती है।

ठग आदमी लालच में आ गया। उसने कहा "तुम यह मंत्र मुझे बता दो तो मैं तुम्हारा घोड़ा वापस कर दूँगा।"

भोलाराम ने कहा "ठीक है, बता दूँगा। पहले तुम मेरे द्वारा लोमड़ी के मुँह से निकाले गये ये रुपये एक पोटली में बाँधकर घोड़े के पास रखो। लोमड़ी के कान पकड़ो। फिर मंत्र बताऊँगा।"

उस आदमी ने ऐसा ही किया। भोलाराम रुपयों की पोटली लेकर घोड़े पर सवार हो गया। घोड़े पर बैठकर बोला "तुमने मुझसे घोड़ा ठग लिया था। मैंने अपना घोड़ा वापस ले लिया है। कोई मंत्र-यंत्र नहीं होता है। तुम लोमड़ी के कान पकड़े रखना। यदि कान छोड़ दिया तो यह तुम्हें काट खायेगी। मैं तो चला।

यह कहकर उसने घोड़े को अपने गाँव की तरफ भगा दिया।

- गोविंद शर्मा

निष्कर्ष ; इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि लालच और ठगी का फल अंत में बुरा ही होता है। सरल दिखने वाला व्यक्ति भी समय आने पर बुद्धि और धैर्य से चालाक को मात दे सकता है। इसलिए सदैव ईमानदारी से काम करना चाहिए और दूसरे को ठगने की आदत से बचना चाहिए—क्योंकि अंततः होता है जैसे को तैसा।

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