बाल कविता: हंस और कौआ | सादगी और घमंड की सीख

Dr. Mulla Adam Ali
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This short children’s poem “Hans and the Crow” beautifully highlights the contrast between pride and simplicity. Through simple characters and an easy narrative style, it conveys an important moral lesson — true respect comes not from arrogance, but from living a humble and content life. Narendra Singh 'Nihar' Poem for Kids.

The Swan and the Crow : A Moral Poem for Children

हंस और कौआ बाल कविता हिंदी में

यह बाल कविता “हंस और कौआ” सादगी और घमंड के अंतर को सरल शब्दों में प्रस्तुत करती है। हंस और कौए के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया है कि सच्चा सम्मान बाहरी आडंबर में नहीं, बल्कि सरल और सच्चे जीवन में छिपा होता है। यह कविता बाल मन में नैतिक मूल्यों का बीज बोने का एक छोटा सा प्रयास है।

सादा जीवन का सुंदर संदेश देती बाल कविता

हंस और कौआ


हुमैद पलंग पर सोया था,

मीठे सपनों में खोया था।

तभी अचानक हंस उड़ आया,

नन्हे मन को बहुत भाया।


बोला – “मुझको भोजन दो,

सच्चे मोती के दाने दो।”

बालक बोला – “गेहूँ खाओ,

बाजरा लो या बिस्कुट पाओ।”


हंस बोला – “मैं राजहंस हूँ,

मोती ही मेरा मधुर अन्न हूँ।

चाहे भूखा रह जाऊँगा,

सादा दाना न खाऊँगा।”


बालक हँसकर यह समझाया –

“घमंड नहीं है अच्छी बात।

देखो कौआ कितना प्यारा,

सादा जीवन उसका सारा।


सुबह-सवेरे हमें जगाता,

जो मिल जाए, खुशी से खाता।

मेहमान का भान कराता,

काँव-काँव के बोल सुनाता।


यही हमारा सच्चा ज्ञान –

सादा जीवन, ऊँचे मान।

कौआ हमको प्रिय लगता,

मन से वो सच्चा रहता।

- नरेन्द्र सिंह 'नीहार'

नई दिल्ली

यह कविता हमें सिखाती है कि घमंड मनुष्य को छोटा बनाता है, जबकि सादगी और संतोष जीवन को सुंदर बनाते हैं। सच्चा मान उसी को मिलता है जो सरल हृदय और विनम्र स्वभाव से जीवन जीता है।

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