घमंड बनाम समझदारी: सुन्दर सजावट की प्रेरक बाल कथा

Dr. Mulla Adam Ali
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This story highlights how true beauty lies in creativity, wisdom, and harmony with nature. Through a simple competition, it teaches that intelligence and ethical thinking can outshine wealth and arrogance.

Moral Story About Wisdom, Creativity, and Nature

सुन्दर सजावट बाल कहानी

यह कहानी सजावट के बहाने बुद्धि, सादगी और प्रकृति से मित्रता की सुंदर सीख देती है। घमंड और दिखावे के बीच खैरू यह सिद्ध करता है कि सच्ची सुंदरता संसाधनों की अधिकता में नहीं, बल्कि समझदारी और रचनात्मक सोच में होती।

तितलियों और जुगनुओं की अनोखी कहानी

सुन्दर सजावट

कुंजवन के निवासी प्रतिवर्ष अगस्त में अपना स्वतन्त्रता दिवस मनाते हैं। इस दिन वे काम की पूरी छुट्टी नहीं करते। आधे दिन कारखानों और दफ्तरों में काम होता है, स्कूलों में पढ़ाई होती है। आधे दिन समारोह और प्रतियोगिता होती है।

एक प्रतियोगिता घर और दुकानों की सजावट की होती है। घर की सजावट का पुरस्कार गत कई वर्षों से राजा शेर का बेटा शेरू लेता रहा है। वह अपने घर की सजावट इतनी ज्यादा करता कि लोग दूर-दूर से उसका घर देखने आते। उसे घमंड भी हो गया था। वर्ष भर वह अपने घर की सजावट की डींग मारता रहता।

इस बार एक नई बात हुई। स्वतन्त्रता दिवस के कुछ दिन पहले ही खैरू नामक खरगोश ने कहना शुरू कर दिया कि इस बार घर की सजावट की प्रतियोगिता में वह जीतेगा। घर की सजावट के बारे में उसके दिमाग में नया विचार आया है। यह बात सुनकर शेरू सावधान हो गया। उसने भी ठान लिया कि वह खैरू को जीतने नहीं देगा।

कुंजवन में घरों की सजावट के लिए विभिन्न किस्म के फूल और बिजली के रंग-बिरंगे बल्ब इस्तेमाल किए जाते थे। शेरू के पास रुपये-पैसे की कमी नहीं थी। उसने एक चाल चली। उसने बिजली के बल्ब लगाने वालों और फूल बेचने वालों को पहले ही पैसे दे दिए और कहा कि उस दिन जितने फूल लगे, सब मेरे घर भेज देना। बिजली के जितने बल्ब कुंजवन में है, सब मेरे घर पर लगा देना।

लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि इस बार भी शेरू ही जीतेगा। जब दूसरे घरों के लिए फूल और बल्ब बचेंगे ही नहीं तो लोग घर सजाएँगे कैसे? लगता है इस बार खैरू की खैर नहीं।

दूसरे वन में रहने वाले फूल विक्रेता और बल्ब विक्रेता छिपकर खैरू के पास आए। खैरू से कहा, "हम चुपके से आपका घर सजा जाएँगे। हमें फूलों और बल्बों के दोगुने पैसे देने होंगे।"

खैरू ने कहा, "मैं चोरी नहीं करता। जब हमारे वन में आपको फूल और बल्ब बेचना मना है तो मैं छिपकर आपसे यह सामान क्यों खरीदूँ? फिर सजावट के लिए बिजली जैसी कीमती चीज को क्यों जलाऊँ? इसका उपयोग खेतों और कारखानों में होना चाहिए। एक ही दिन में सारे फूल तोड़कर मैं बागों की सुंदरता नष्ट नहीं करना चाहता।"

"फिर आप घर की सजावट कैसे करेंगे?" प्रश्न किया गया।

"दोस्तों के सहारे, मेरे दोस्त सजाएँगे मेरा घर" खैरू ने कहा।

आखिर वह दिन आ गया, जिसका सबको इंतजार था। सारे कुंजवन से ढेरों फूल शेरू के घर पहुँच गए। रंग-बिरंगे फूलों से सजा शेरू का घर देखते ही बनता था। उधर खैरू ने कमाल कर दिया। खैरू ने फूलदार पौधों के गमले अपने घर की दीवारों पर यहाँ-वहाँ रखवा दिए। तितलियों से उसकी दोस्ती थी। हजारों की संख्या में तितलियाँ खैरू के घर पहुँच गईं। कुछ तितलियाँ दीवारों पर चिपक गईं। कोई कोण बना रही थीं, कोई त्रिकोण। कुछ गोल बनाकर बैठ गईं तो कुछ चक्र की तरह घूमने लगीं। पूरा घर रंग-बिरंगी तितलियों से सज गया। लोगों के लिए यह अजीब नजारा था। इतनी तितलियाँ किसी ने अब तक एक साथ नहीं देखी थीं। लोगों को लगा कि शेरू ने फूलों को उसी पुराने तरीके से सजाया है, जिसे हम गत कई वर्षों से देखते आ रहे हैं। सभी खैरू का घर देखने लगे और वाह-वाह करने लगे।

फिर भी शेरू ने अभी हार नहीं मानी थी। वह कहने लगा "ठीक है अभी दिन है। खैरू की दोस्त तितलियों ने लोगों को आकर्षित किया है। थोड़ी देर में रात होने वाली है। रात में तितलियाँ सी जाती हैं, अँधेरे में दिखाई भी नहीं देतीं। फिर वह मेरे जगमगाते बिजली के बल्बों का मुकाबला कैसे करेगा?"

रात हो गई। लोगों ने देखा शेरू का घर जगमगा रहा है। हरे, नीले, लाल, पीले बल्बों की छटा निराली है। लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि अब खैरू हार जाएगा। सारे बल्ब तो शेरू के पास हैं। चलो देखते हैं अँधेरे में खैरू का घर कैसा दिखाई देता है?

अँधेरे में खैरू का घर लोग देखते रह गए। वहाँ बिजली का एक भी बल्ब नहीं जल रहा था। पर छोटे-छोटे बल्ब जगमगा रहे थे। इतने छोटे बल्ब तो कभी नहीं देखे गए। टॉर्च का बल्ब भी इससे बड़ा होता है। खैरू ने किसी कम्पनी को इतने छोटे बल्ब बनाने का विशेष आदेश दिया होगा।

खैरू के छोटे बल्ब कई जगह कतारों में थे, कई जगह गोल घेरा बनाए थे। सभी जल-बुझ कर रहे थे। कुछ बल्ब इधर-उधर उड़ भी रहे थे। पास जाने पर पता चला ये तो जुगनू हैं।

पहला इनाम खैरू को ही मिला। शानदार सजावट हो गई थी, पर न तो कीमती बिजली फिजूल की गई और न फूलों की क्यारियों की रौनक खत्म हुई।

- गोविंद शर्मा

निष्कर्ष; यह कहानी सिखाती है कि सच्ची जीत दिखावे से नहीं, समझदारी और प्रकृति के सम्मान से मिलती है। जब रचनात्मक सोच और नैतिकता साथ हों, तो सीमित साधनों में भी असाधारण सुंदरता रची जा सकती है।

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