प्रेरक बाल कथा – गिदी और पिदी बन गए अच्छे

Dr. Mulla Adam Ali
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This story teaches that true happiness comes from hard work and honesty. The journey of Gidi and Pidi shows how choosing the right path can transform a life and earn real respect.

A Moral Jungle Tale

मेहनत की जीत और चोरी की हार की कहानी

यह कहानी हमें सिखाती है कि मेहनत और ईमानदारी से कमाया गया सुख ही सच्चा सुख होता है। गिदी और पिदी की यह कथा बताती है कि गलत रास्ते पर चलकर मिला लाभ क्षणिक होता है, जबकि परिश्रम मनुष्य को अच्छा और सम्मानित बनाता है।

मेहनत की जीत और चोरी की हार

गिदी पिदी बन गए अच्छे

उस वन का नाम जूही वन था। वहाँ के अधिकांश जानवर खेती करते थे। उ कुछ साल पहले की बात है। वन में अचानक चोरियाँ बढ़ गई। कभी लालू लोमड़ की सब्जियाँ चुरा ली जाती, तो कभी कालू भालू के गन्ने। जानवरों ने मिलकर एक चौकीदार भी रखा और खुद भी पहरा देने लगे। लेकिन चोर पकड़े नहीं गए। क्योंकि चोर जूही वन के ही निवासी थे। कोई सबूत भी नहीं था, इसलिए किसे दोषी बताए, यह दुविधा थी। परन्तु लोगों को गिदी और पिदी नाम के दो गीदड़ भाइयों पर शक था।

गर्मी की छुट्टियों में लालू लोमड़ का रिश्ते का एक भाई पतलू उससे मिलने जूही वन आया। लालू लोमड़ ने पतलू को पूरी बात बताई और कहा कि चोर हमारे गाँव के ही रहने वाले हैं।

पतलू ने कहा, "अगर चोर गाँव के ही हैं, तो आज रात खेत पर पहरा देने मैं जाऊँगा।" पतलू को इस इलाके की अच्छी जानकारी थी। वह यह भी जानता था कि लालू लोमड़ की थोड़ी-सी जमीन पहाड़ी की तलहटी में भी है, पर वह बड़ी उबड़-खाबड़ है। पतलू खेत पर जाते समय अपने साथ एक पुराना मगर मजबूत कागज और दो-तीन रंग के पेन भी ले गया। खेत की मुंडेर पर बैठकर उसने एक नक्शा बनाया और खरबूजों की बेलों के बीच एक खरबूजे के नीचे उसे दबा दिया और घर आ गया। पतलू को घर जाता देख गिदी और पिदी खरबूजे चुराने के लिए खेत में घुस गए। अभी पिदी ने दो चार खरबूजे ही तोड़े थे कि उसकी निगाह उस नक्शे पर पड़ी। उसने नक्शा उठाया और गिदी को दिखाया। चाँद की रोशनी में नक्शे को देखकर गिदी ने कहा "यह तो किसी छिपे हुए खजाने का नक्शा है। छोड़ो खरबूजों को, घर चलो। इस नक्शे के सहारे खजाना ढूँढकर मालामाल हो जाएँगे।"

अगले दिन गिदी, पिदी ने नक्शे को अच्छी तरह से देखा। उस पर बनी लकीरों के सहारे चलते हुए वे लालू लोमड़ की तलहटी वाले खाली पड़े खेत में पहुँच गए। गिदी ने कहा "इसी खेत में किसी जगह खजाना दबा हुआ है। अच्छा हुआ लालू लोमड़ ने इस खेत में कभी खेती नहीं की वरना यहाँ दबा हुआ खजाना उसके हाथ लग जाता।"

"लेकिन अब यदि हम खुदाई करेंगे, तो सारे जूही वन वालों को शक हो जाएगा। हो सकता है, लालू लोमड़ हमें अपने खेत में खुदाई करने से रोक दे", पिदी ने शंका प्रकट की।

"हद हो गई, मेरे जैसे अकलवीर के भाई होकर तुम इन बचकाने सवालों में उलझ रहे हो? मेरे साथ लालू लोमड़ के घर चलो। तुम्हें आज बुद्धि का चमत्कार दिखाऊँगा", गिदी ने कहा।

उधर लालू लोमड़ पतलू से कह रहा था "तुमने तो कमाल कर दिया। रातभर खेत में रहे नहीं, फिर भी खरबूजे चुराने आए चोरों को भगा दिया और चोरों ने जो दो-चार खरबूजे तोड़े थे, वे भी छोड़ गए।"

पतलू ने कहा, "देखते, रहना। कुछ ही देर में चोर तुम्हारे पास आएँगे, कुछ माँगने के लिए। उन्हें देने से इनकार मत करना। उनके लिए यह बहुत बड़ी सजा होगी।"

कुछ ही देर बाद गिदी और पिदी दोनों गीदड़ भाई लालू लोमड़ के सामने खड़े थे। गिदी ने कहा "लालू भाई, सारे गाँववाले हमें निखट्टू और आलसी समझते हैं। हम उनको दिखाना चाहते हैं कि हम कितने हिम्मती और मेहनती है। इसके लिए हम चाहते हैं कि आप हमें पहाड़ी की तलहटीवाली जमीन सीधी और बराबर करने को दे दें।"

लालू लोमड़ ने कहा, "उस जमीन को समतल करना आसान काम नहीं है। तुम जैसे आलसी लोग यह काम कभी भी पूरा नहीं कर सकते। फिर तुम लोगों को काम के बदले देने के लिए मेरे पास पैसे भी नहीं है।"

पतलू बीच में ही बोल पड़ा, "लालू भैया, तुम यह काम इन लोगों को दे दो। इन्हें काम के बदले सिर्फ इतना अनाज दे देना कि ये लोग दो वक्त की अपनी रोटी बना सके।"

गिदी पिदी उस जमीन को समतल करने, पत्थर निकालकर बाहर फेंकने में लग गए। पहले पहल तो जूही वन के लोगों ने उनका खूब मजाक उड़ाया। पर जब आधी जमीन समतल हो गई, तो गाँव वालों के विचार भी बदल गए। अब सब उन्हें हिम्मती और मेहनती कहने लगे।

दो महीने की दिन-रात की मेहनत ने खेत को एकदम समतल कर दिया। पतलू की छुट्टियाँ भी खत्म होने को थी। पतलू के जाने से पहले एक दिन गिदी-पिदी लालू लोमड़ के घर आए और कहने लगे कि "हमने सारा खेत समतल कर दिया है। हमारा काम खत्म हो गया है।"

पतलू बोला, "तुमने बहुत बड़ा काम किया है। लालू तुम्हें इस काम के बदले एक हजार रुपए देगा। यह इसने पहले ही सोच रखा है। इस एक हजार रुपए से तुम अपना कोई धंधा शुरू कर सकते हो। कल पंचायत के सामने तुम्हें इनाम के रूप में एक हजार रुपये दिए जाएँगे।"

अगले दिन पंचायत में एक हजार रुपए पाकर गिदी पिदी की आँखों में आंसू आ गए। उन्होंने भरे हुए गले से कहा, "जिसे आप हमारी हिम्मत और मेहनत बता रहे हैं, वह तो हमारा लालच था और उन्होंने सारी बात बताई। परन्तु हमें यह अक्ल आ गई है कि हमें मेहनत करके ही खाना-कमाना चाहिए। दिनभर की मेहनत के बाद सूखी रोटी में जो स्वाद आता है, वह चोरी के पैसों से खरीदे गए पकवानों में भी नहीं आता है। हाँ, हम लोग ही आपके घरों, खेतों में चोरी करते थे। अब हम वह सब छोड़ रहे हैं। आप जो चाहे, हमें सजा दे सकते हैं।"

पतलू ने खड़े होकर कहा, "सजा तो तुम लोगों ने भुगत ली है। इस भीषण गर्मी में दिन-रात काम कर खेत को समतल करना आसान काम नहीं था। सबसे अच्छी बात तो यह है कि तुम दोनों ने अपनी गलती मान ली है। तुम अच्छे बन गए हो।"

इस पर लालू लोमड़ ने खड़े होकर कहा, "यह हजार रुपए तो तुम्हारी मेहनत का इनाम था। अब तुम अच्छे भी बन गए हो इसलिए एक साल फसल उगाने के लिए तलहटीवाली जमीन तुम्हें मुफ्त में देता हूँ।" गिदी और पिदी की आँखों में पहले जो पश्चाताप के आँसू थे, वे अब खुशी के आँसू बन गए।

- गोविंद शर्मा

निष्कर्ष; गिदी और पिदी की कहानी यह संदेश देती है कि गलती मान लेना और मेहनत का मार्ग अपनाना ही सच्चा सुधार है। परिश्रम से मिला सम्मान और संतोष, चोरी से मिले लाभ से कहीं अधिक मूल्यवान होता है।

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