सच्ची मित्र कहानी: बाल कहानी में किताबों की अहमियत

Dr. Mulla Adam Ali
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“True Friend” by Govind Bhardwaj is a heartwarming children’s story that highlights the value of books and the joy of reading. Through the efforts of a little squirrel, Gillu, the story teaches that books are our true friends, guiding us toward knowledge and wisdom.

True Friend Story: A Heartwarming Children’s Tale on the Value of Reading

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ज्ञान, मित्रता और समझदारी का सुंदर संदेश देती गोविन्द भारद्वाज की बाल कहानी “सच्ची मित्र” एक छोटी-सी गिलहरी गिल्लू के प्रयासों के माध्यम से हमें किताबों का महत्व समझाती है। यह कहानी न केवल पढ़ने की आदत को बढ़ावा देती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि सच्चा ज्ञान हमें सही और गलत में अंतर करना सिखाता है।

पुस्तक प्रेम और सीख से भरपूर बाल कहानी

सच्ची मित्र

गिल्लू गिलहरी आज सुबह से बड़ी व्यस्त थी।उसे नीम के पेड़ की टहनियों पर दौड़ते भागते सब देख रहे थे। हीरू तोते ने पूछा,”गिल्लू आज तो बहुत भाग दौड़ कर रही हो...।“ “हाँ.. हीरू भैया कल पुस्तक दिवस है इसलिए...।“ गिल्लू ने जवाब दिया। “पुस्तक दिवस..?”

हीरू ने पूछा। “अरे भैया..पुस्तक अर्थात किताब पढ़ने वालों में रूचि जाग्रत करने और पुस्तकों के रख रखाव,उनकी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय पुस्तक दिवस मनाया जाता है।“ गिल्लू किताबों को उठाते हुए बोली। हीरू उड़कर उसके पास आया तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ।नीम के बड़े से कोटर में गिल्लू ने किताबों का ढेर लगा रखा था। “अरे इतनी सारी किताबें, कौन पढ़ेगा इनको?” हीरू तोते ने पूछा। “कौन पढ़ेगा...हम सब पढ़ेंगे...मधुवन के सारे पशु और पंछी पढ़ेंगे।“ गिल्लू गिलहरी ने पूँछ को हिलाते हुए कहा।

अगले दिन गिल्लू गिलहरी ने मधुवन में नीम के पेड़ पर एक भव्य पुस्तक प्रदर्शिनी का आयोजन किया। दूर-दूर से पुस्तक प्रेमी अपनी अपनी पसंद की किताबें खरीद रहे थे।“गिल्लू यह किताब कितने की है?” कूकी कोयल ने पूछा। “कूकी बहन ये मात्र बीस रूपए की है..।“ गिल्लू ने कहा। “किंतु इस पर तो चालिस रूपए लिखे हैं।“ कूकी बोली। “अरी बहन जी.. पुस्तक दिवस पर पचास प्रतिशत की छूट मिल रही है।“ गिल्लू ने जवाब दिया। देखते ही देखते गिल्लू की प्रदर्शिनी में ग्राहकों की भीड़ लग गयी।

अचानक एक बंदरों की टोली वहां आ गयी। उन्होंने किताबों को उलट-पलट कर देखना शुरू किया। कुछ बंदर तो किताबों के पन्ने फाड़ने लगे।“अरे यह क्या कर रहे हो तुम..?” गिल्लू ने उन्हें टोकते हुए कहा। “यह क्या बकवास लगा रखी है....जंगल के निवासी कोई किताब पढ़ते हैं... बड़ी आई... पुस्तक बेचने वाली।“

लालू बंदर ने कहा। “देखो लालू भैया मुझे कुछ भी कह लो...लेकिन... लेकिन मेरी किताबों को फाड़ो मत।ये मेरी पूँजी हैं...ज्ञान का ख़ज़ाना हैं।“ गिल्लू गिलहरी ने हाथ जोड़कर कहा। “अरे हम सब जंगली हैं... जंगली...हमें ज्ञान किताबों से नहीं अनुभवों से मिलता है।हम कोई मानव नहीं,जो पढ़ने लिखने का नाटक करें।“ “नाटक मतलब..क्या मनुष्य पढ़ने का सिर्फ नाटक करते हैं?” हीरू ने पंख फड़फड़ाते हुए पूछा।

लालू ने आग बबूला होते हुए कहा,”हाँ..हाँ... मनुष्य ने पढ़ने का ढोंग ही किया है... बड़ी-बड़ी डिग्रियाँ लेकर भी वे अज्ञानी हैं।“ ‌”कैसे लालू भाई?” कूकी ने बड़ी शांति से पूछा। “इन किताबों को पढ़कर लोगों ने जात-पात,धर्म के नाम पर लड़ना और लड़ाना सीखा है। अमीर-गरीब की खाई को गहरा किया है...।भाषा,क्षेत्र और सभ्यता के नाम पर एक दूसरे से लड़ते आए हैं..क्या हम अनपढ़ रहकर भी उनके जैसा व्यवहार करते हैं।“ लालू ने समझाने के अंदाज में कहा।

इस पर गिल्लू गिलहरी बोली,”लालू भैया...बात तो तुम ठीक कह रहे हो... लेकिन इसमें किताबों का क्या दोष? किताबें तो ज्ञान का भंडार हैं..ये कभी ग़लत रास्ते पर जाने के लिए नहीं कहती..इसमे लिखी बातों पर अमल किया जाए,तो संसार में कभी भी कहीं भी अत्याचार नहीं हो...।“ “गिल्लू ठीक कह रही है..लालू..देखों इनमें कितनी अच्छी-अच्छी और ज्ञानवर्धक बातें लिखी हुई है।“ हीरू तोते ने कुछ किताबों को दिखाते हुए कहा।

“अरे ज्ञानी हीरू.. आजकल तुम टीवी देख रहे हो इन दिनों,या अखबार पढ़ रहे हो...पढ़ें लिखे विकसित देश आपस में घातक हथियारों से लड़ रहे हैं।“ लालू ने कहा। “कौन..न..न कौन लड़ रहें हैं?” चीनू चिड़िया ने पूछा।जो अभी तक सबकी बातें बड़ी ध्यान से सुन रही थी। लालू बोला,”यूक्रेन और रूस का नाम सुना है तुम सब ने?” “हाँ..मैंने इनके बारे में पढ़ा है किताबों में।“

“हाँ..वही दोनों पढ़े-लिखे समझदार और विकसित देश आपस में एक दूसरे को नष्ट करने पर तुले हैं। सुना है वे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं..यह पूरी दुनिया के लिए खतरनाक होगा।“ लालू ने एक किताब को फेंकते हुए कहा।

“यह बात तो तुम सच कह रहो लालू..लेकिन इसमें सभी पढ़े-लिखों या फिर किताबों को दोष देना बिल्कुल ग़लत है... । किताबें तो हम सब की सच्ची मित्र है...हमारी मार्गदर्शक हैं..।“ गिल्लू ने बड़े प्यार से समझाया। “मान जाओ लालू..एक दो किताब पढ़कर देखो...अपने साथियों को समझाओं.. किताबें फाड़ना पाप है पाप...।“ कुकी ने गिल्लू का साथ देते हुए कहा।

इतनी देर में एक किताब पर लालू की नज़र आयी।उसे उठाते हुए बोला,”यह कौन सी किताब है..गिल्लू। इसमें हमारे पूर्वजों की तस्वीर कैसे?” “यह रामचरित मानस है भैया...।“ गिल्लू बोली। “वही रामचरित मानस जिसमें हमारे पूर्वजों ने भगवान का साथ अन्याय के विरुद्ध दिया था।“ लालू ने कुछ याद करते हुए कहा।

“हाँ..भैया..।“ गिल्लू गिलहरी ने जवाब दिया। लालू ने सभी बंदरों को किताबों को न छेड़ने का आदेश दिया।

फिर सभी ने एक-एक किताबें खरीदी। लालू ने गिल्लू से माफी माँगी और वहाँ से चला गया।

देखते ही देखते गिल्लू की सारे किताबें बिक गयीं।

- गोविन्द भारद्वाज

निष्कर्ष; “सच्ची मित्र” कहानी हमें यह सिखाती है कि किताबें हमारी सच्ची दोस्त होती हैं, जो हमें सही राह दिखाती हैं। उनका सही उपयोग हमें ज्ञान, समझ और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है।

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