टीना ने चोरी पकड़वाई | सूझबूझ और साहस की प्रेरक बाल कहानी

Dr. Mulla Adam Ali
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"Tina Caught the Thieves" is an inspiring children's story by Prabhudayal Srivastava. It highlights how a young girl's intelligence, observation skills, and courage help uncover a series of thefts in her neighborhood. The story teaches children the importance of alertness, critical thinking, and taking the right action at the right time.

Tina Caught the Thieves: A Moral Story for Kids

tina caught the thieves story for kids

बाल मन की जिज्ञासा, सूझ-बूझ और सतर्कता कई बार बड़े-बड़ों को भी चौंका देती है। प्रसिद्ध बाल साहित्यकार प्रभुदयाल श्रीवास्तव की रोचक बाल कहानी "टीना ने चोरी पकड़वाई" ऐसी ही एक समझदार बच्ची की कहानी है, जिसने अपनी तीक्ष्ण निगाह और बुद्धिमानी से एक बड़े चोरी गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया। यह कहानी बच्चों को सजग रहने, घटनाओं का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करने और सही समय पर साहस दिखाने की प्रेरणा देती है।

बच्चों के लिए प्रेरक और शिक्षाप्रद कहानी

टीना ने चोरी पकड़वाई

“दरियां ले लो, दरियां, रंग बिरंगी मजबूत टिकाऊ दरियां”

जैसे ही टीना ने आवाज सुनी वह बस्ता जस का तस छोड़कर बाहर की तरफ भागी, अम्मा चिल्लाईं “अरे कहाँ भाग रही है, पढ़ाई तो पूरी कर ले?” परन्तु टीना को तो भागना ही था दरीवाले की आवाज पर।“ पता नहीं क्या हो गया है इस टीना को, दरी वाले की आवाज आती है तो सब काम छोड़कर भाग जाती है।“ अम्मा मन ही मन बुदबुदातीं। उन्होंने टीना के बापू से शाम को इस बावत चर्चा की परन्तु बाबू जमना लालजी ने हंसकर कहा “तुम भी कहाँ की बातें ले बैठती हो, अरे बच्ची है, दरीवाले की आवाज सुनकर दरी देखने दौड़ जाती है तो इसमें क्या बुराई है। मैं भी तो बचपन में ठेले वालों की आवाज सुनकर खाने की थाली छोड़कर भाग जाता था। ”बात तो सच थी। वह भी तो जब छोटी थी तो आसमान में हवाई जहाज की आवाज सुनकर बाथ रूम में से आधी नहाई ही बाहर दौड़ पड़ती थी। खैर बात आई गई हो गई।

दूसरे दिन मोहल्ले में हल्ला मचा कि मोहनराम जी के घर में चोरी हो गई। पुलिस की गाडी हूटर बजाती हुई आई और चोरी वाले घर के सामने भीड़ लग गई। मोहनराम जी एक दिन पहले ही से नागपुर गए थे और सुबह ही वापस आये थे।

घर का सारा सामान उन्होंने बिखरा पाया और अलमारी का ताला टूटा पड़ा था। चोरों ने अलमारी की नगदी और सोनें चांदी के जेवरों पर हाथ साफ़ कर दिया था। पुलिस अपनी कागजी खानापूर्ति करके चली गई थी।

“मैं जानती थी आज कहीं न कहीं चोरी होगी “टीना धीरे धीरे बड़बड़ा रही थी। “क्या कह रही है बिटिया, क्या बुदबुदा रही है?” अम्मा नीलू ने प्रश्न किया तो वह बोली कुछ नहीं अम्मा बाद में बताउंगी। नीलू सोच रही थी कि टीना को जाने क्या हो गया है। कुछ तो बड़बड़ाती रहती है।

उस दिन रविवार था। जमना लालजी का आज अवकाश था। कभी- कभी वे अवकाश के दिन भी कार्यालय चले जाते थे। काम ही इतना ज्यादा था कि छुट्टी के दिन भी कार्यालय में बैठना पड़ता था। किन्तु आज उनका मूड था कि घर पर ही पत्नी और बच्चों के साथ रहकर वह थोड़ा मनोरंजन करें। खाना खाया और टीना के साथ लूडो खेलने बैठ गए। अचानक दरीवाले की आवाज सुनाई पड़ी। टीना कुछ चौंकी और उठकर बाहर भागने लगी। परन्तु कुछ सोचती हुई वापस पलटी और जमना लालजी से बोली “बापू आज आप भी चलिए न दरीवाले को देखने।”

“क्या! मैं चलूँ, क्यों, क्या मैं बच्चा हूँ? वे ठहाका मारकर हंसने लगे। जा तू ही जा उस दरीवाले को देखने। ”इतने सारे प्रश्न सुनकर पहले तो वह कुछ नर्वस हुई किन्तु तुरंत संभल गई।

“नहीं बापू कुछ ख़ास बात है, मैं आपको ........कुछ बताना चाहती हूँ। ”वह थोड़ी झिझकी और उनका हाथ पकड़कर बाहर खीचने लगी। आखिर जमना लालजी थे तो एक बेटी के बाप ही, उठकर खड़े हो गए।” कहाँ ले चलती है चल, ये लड़की भी.......” यह कहते हुए उसके पीछे चल दिए।

बाहर उन्हें वह दरी वाला दिखाई दिया। दूसरी गली की और वह मुड़ रहा था।

टीना उन्हें घसीटकर दूसरी गली के किनारे तक ले गई। धीरे से बोली “बापू यह गली तो आगे बंद है, इसमें से ही किसी घर में आज चोरी होगी।“

“क्या पागलों सी बातें करती है? क्या तू सी. आई. डी. है? तुझे कैसे पता?”

“बापू मैं सच्ची कह रही हूँ। इस गली का कोई घर मालिक जरूर ताला लगाकर बाहर गया होगा। उसके यहाँ चोरी होगी।“

जमना लालजी को याद आया की इस गली में रहने वाले उसके एक मित्र रतन लाल जी सुबह ही कानपूर एक विवाह समारोह में गए हैं। उन्होंने पूंछा “तुमने यह कैसे अंदाज लगाया कि आज यहाँ चोरी होगी।

“बापू मैं तीन माह से इस दरी वाले को देख रही हूँ। जब भी यह आता है और जिस गली में जाता है, वहां चोरी होती है।“

“मगर तुम गारंटी से कैसे कह सकती हो? अंदाज गलत भी हो सकता है। किसी पर शक करना......वे.” वाक्य पूरा कर पाते इसके पहले ही टीना चहक उठी।

“बापू अपने घर के सामने पुलिस अंकल रहते हैं उन्हें बताने में क्या हर्ज है”। टीना ने अपनी छोटी सी बुद्धि का गोला दागा।

शाम को जमना लालजी ने अपने पड़ोसी पुलिस इंसपेक्टर शुक्लजी को टीना की बातों से अवगत कराया। उन्होंने सादी वर्दी में एक पुलिस वाले को उस गली के आसपास तैनात कर दिया। रात को तो कमाल ही हो गया। दो चोर रंगे हाथों घर के फाटक के भीतर घुसते हुए पकड़े गए।

दूसरे दिन उस दरी वाले को भी पकड़ लिया गया।थाने में ले जाकर जब उसकी पिटाई हुई तो उसने दो दर्जन चोरियों का खुलासा किया जो पिछले तीन साल से शहर में हो रहीं थीं और पुलिस पकड़ने में नाकाम रही थी।

पुलिस इंसपेक्टर शुक्ल ने टीना से पूछा “बेटी तुमने कैसे जाना कि इस दरी वाले का चोरियों से कुछ सबंध है?”

“अंकल अपने मुहल्ले में जब लगातार दो चोरियां हुई तो मैनें अनुभव किया कि चोरी उसी दिन होती है जब यह दरीवाला आता है। फिर अगली बार जब यह दरी वाला आया तो मैंने उसका चोरी से पीछा किया। उसी दिन उस गली में चोरी हुई जिस गली में वह फेरा लगाने भीतर तक गया था। फिर तो यह निश्चित हो गया कि चोरी और इस दरी वाले के बीच कुछ तो सम्बन्ध है और मैं अपने बापू को साथ ले गई।“

टीना की सूझ बूझ से चोरियों का भंडाफोड़ हो गया|

अब दरीवाला नहीं आता। आएगा कहाँ से, वह तो हवालात में है। टीना की अम्मा को भी अब टीना के बाहर भागने की चिंता नहीं सताती।

- प्रभुदयाल श्रीवास्तव

निष्कर्ष; "टीना ने चोरी पकड़वाई" कहानी हमें सिखाती है कि सूझ-बूझ, सतर्कता और साहस से बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान किया जा सकता है। टीना की समझदारी ने न केवल चोरों को पकड़वाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि बच्चे भी अपनी बुद्धिमत्ता से समाज की मदद कर सकते हैं।

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