“Keel Wali Billi” (The Nail Cat) is an engaging Hindi children’s verse story by renowned children’s writer Suryakumar Pandey. Originally published in Navjeevan daily on 15 December 1968, the poem combines humor, rhythm, and a meaningful moral lesson about the consequences of dishonesty, deceit, and wrongdoing.
“Keel Wali Billi” (The Nail Cat): Suryakumar Pandey’s Classic Hindi Children’s Poem with a Moral Lesson
सूर्यकुमार पांडेय की पद्य-कथा ‘कील वाली बिल्ली’ बाल साहित्य की उस सादगीपूर्ण और रोचक परंपरा का सुंदर उदाहरण है, जिसमें मनोरंजन के साथ सहज रूप से जीवन-मूल्य भी प्रस्तुत किए जाते हैं। ‘नवजीवन’ दैनिक के 15 दिसंबर 1968 के अंक में प्रकाशित यह रचना आज भी अपनी कथात्मकता, लय और संदेश के कारण प्रासंगिक लगती है। बिल्ली की शरारत, उसकी चालाकी और अंततः अपनी करनी का फल पाने की कथा बच्चों को सरल ढंग से यह सीख देती है कि कपट और चोरी का परिणाम कभी अच्छा नहीं होता।
रोचक बाल कथा और जीवन-संदेश
कील वाली बिल्ली
आओ बच्चो, तुम्हें सुनाऊँ
बिल्ली की मैं एक कहानी,
एक गाँव में रहती थी वह-
बिल्ली, यह है कथा पुरानी।
पांव दबाए चुपके-चोरी;
छिपी घरों में आ जाती थी,
दूध-मलाई चट कर जाती,
नहीं पकड़ में वह आती थी।
बिगड़ चुकी थी आदत उसकी;
किसी एक घर में घुस आई,
ज्यों ही खाने को वह लपकी,
गिरी कटोरी भरी मलाई।
कमरे में बर्तन का गिरना-
सुनकर घर की औरत आई,
भाग सकी दिल्ली न बेचारी,
जमकर उसकी हुई पिटाई।
छोड़ दिया लोगों के घर पर;
उस दिन से बिल्ली ने जाना,
वह अब से चूहे खाएगी,
यह विचार तब मन में ठाना।
बिल्ली बूढ़ी हुई और फिर;
खतम हुए चूहे भी सारे,
परेशान थी, क्या खाए वह,
एक-एक सब चूहे मारे।
खाने को जब कुछ न मिला तब;
लंबी कील उठा कर लाई,
जा पहुँची चूहों के बिल के-
बाहर लेकर एक चटाई।
निकला चूहा एक; देखकर-
बिल्ली बोली लेटे-लेटे,
कील गड़ गई आज आँख में,
इसे निकालो चूहे बेटे।
कील आँख के पास ले गई;
धँसा आँख में सूजा सारा,
बिल्ली रोती रही बेचारी,
बहने लगी खून की धारा।
कपट और चोरी का फल है बुरा;
यही अब सबसे कहती,
अपनी करनी पर पछ्ताती,
कानी होकर रोती रहती।
- सूर्यकुमार पांडेय
निष्कर्ष: ‘कील वाली बिल्ली’ मनोरंजन और सीख का सुंदर संगम है। सरल भाषा, रोचक कथानक और सहज लय के माध्यम से सूर्यकुमार पांडेय ने बच्चों को यह संदेश दिया है कि चोरी, कपट और बुरे कर्मों का परिणाम अंततः बुरा ही होता है।
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