राखी : सूर्यकुमार पांडेय की रक्षाबंधन पर सुंदर बाल कविता | भाई-बहन के प्रेम की कविता

Dr. Mulla Adam Ali
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“Rakhi” by Suryakumar Pandey is a sweet and meaningful children’s poem about the love and bond between brothers and sisters. Through simple and melodious words, the poem beautifully presents Raksha Bandhan as a celebration of love, trust, care, and togetherness.

Rakhi Poem by Suryakumar Pandey | Beautiful Raksha Bandhan Poem for Children

childrens poem on raksha bandhan in hindi

रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और आत्मीयता का पर्व है। सूर्यकुमार पांडेय की बाल कविता ‘राखी’ इसी पवित्र रिश्ते की भावनात्मक सुंदरता को सरल और मधुर शब्दों में प्रस्तुत करती है। कविता बताती है कि राखी केवल धागा नहीं, बल्कि प्रेम, मेल और रिश्तों की पहचान है। बालमन को सहजता से जोड़ने वाली यह कविता रक्षाबंधन के पर्व की आत्मीयता को सुंदर ढंग से अभिव्यक्त करती है।

रक्षा बंधन पर बाल कविता 

राखी


राखी धागा नहीं, प्यार है

भाई और बहन का।


राखी है बहनों की रक्षा

भाई का नाता है

रक्षाबंधन का दिन, यह ही

बतलाने आता है

राखी धागा नहीं, फूल है

रिश्तों के उपवन का।


बंधी कलाई पर सुंदर-सी

रंग-बिरंगी प्यारी

चमक रही चमचम चंदा-सी

बहना है बलिहारी

राखी धागा नहीं, मेल है

धरती और गगन का।


- सूर्यकुमार पांडेय

निष्कर्ष; ‘राखी’ कविता भाई-बहन के प्रेम और आत्मीय रिश्ते को सरल, मधुर और प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त करती है। राखी को केवल धागा न मानकर प्रेम, विश्वास और रिश्तों के सुंदर प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करना कविता की विशेषता है। बालमन को सहज रूप से छू लेने वाली यह कविता रक्षाबंधन के भाव को सार्थक बनाती है।

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