डॉ. शकुंतला कालरा की बाल कविता ‘सपेरा’ | बाल कविता | हिंदी बाल साहित्य

Dr. Mulla Adam Ali
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Dr. Shakuntala Kalra’s children’s poem “Sapera” (The Snake Charmer) beautifully captures children's curiosity, excitement, and courage through a lively depiction of a snake charmer and his performance.

Sapera (The Snake Charmer) | Hindi Children's Poem by Dr. Shakuntala Kalra

डॉ. शकुंतला कालरा की मनोरंजक बाल कविता सपेरा

बच्चों के कौतूहल और साहस का रोचक चित्रण

डॉ. शकुंतला कालरा की बाल कविता ‘सपेरा’ बच्चों के कौतूहल, उत्सुकता और साहस को सरल एवं मनोरंजक ढंग से प्रस्तुत करती है। बीन की धुन सुनकर सपेरे के चारों ओर जमा होते बच्चे साँपों को देखकर डरकर भागते हैं, लेकिन रामू का निर्भीक व्यवहार सबका ध्यान आकर्षित करता है। कविता में बालसुलभ जिज्ञासा, मनोरंजन और निडरता का सुंदर चित्रण है। सरल भाषा, सहज लय और रोचक वर्णन इसे बच्चों के लिए आकर्षक बनाते हैं।

डॉ. शकुंतला कालरा की मनोरंजक बाल कविता

सपेरा


बीं-बीं, बीं-बीं बीन बजाता,

आया एक सपेरा

सरपट भागे बच्चे सारे,

आकर उसको घेरा ।


कंधे पर झोला लटकाए,

उसमें लिए पिटारी ।

झूम-झूम कर बीन बजाते,

उसने खोली सारी ।


फन फॅलाकर साँप उठे सब,

डरकर बच्चे भागे।

ऐसे भागे ऐसे भागे,

पीछे कोई आगे ।


लेकिन रामू डरा नहीं बस,

खड़ा रहा वह आगे।

लगा बुलाने उन बच्चों को,

डर कर जो थे भागे ।


आऐं बच्चे देख तमाशा,

खूब बजाई ताली ।

धीरे-धीरे करी सभी ने,

अपनी जेबें खाली ।


- डॉ. शकुंतला कालरा

निष्कर्षतः ‘सपेरा’ कविता बच्चों के कौतूहल, साहस और बालसुलभ उत्साह को रोचक ढंग से अभिव्यक्त करती है। सरल भाषा और लयात्मकता इसे बच्चों के लिए मनोरंजक बनाती है।

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