Hindi Bal Kavita : खा ली मैंने मिर्च उई माँ - फहीम अहमद

Dr. Mulla Adam Ali
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Dr. Faheem Ahmad Ki Hindi Bal Kavitayen

Hindi Children's Poem Kha Li Mirchi

कविता कोश में आज आपके समक्ष डॉ. फहीम अहमद जी द्वारा लिखी गई बाल कविता "खा ली मैंने मिर्च, उई माँ !" पढ़े और शेयर करें।

बाल कविता 

खा ली मैंने मिर्च, उई माँ !

खा ली मैंने मिर्च, उई माँ !


टॉफी केक जलेबी छोड़ी,

डलिया में थी मिर्च निगोड़ी,

सोचा लाओ चख लूँ थोड़ी।


मुझसे तीखी भूल हुई, माँ!


चखी मिर्च मै लगा उछलने,

जीभ लगी उफ़ मेरी जलने,

आंसू फ़ौरन लगे निकलने।


कान गरम हैं नाक चुई, माँ!


तोता खाए टें -टें बोले,

नहीं मिठाई को मुंह खोले,

बिना मिर्च पिंजड़े में डोले,


कैसी उसकी जीभ मुई, माँ!


गई नहीं अब तक कड़वाहट,

अम्मा दे दो मुझे अमावट,

कान पकड़ता हूँ मै झटपट।


फिर जो मैंने मिर्च छुई, माँ!

डॉ. फहीम अहमद

असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, हिंदी विभाग,
महात्मा गांधी मेमोरियल पी.जी.कालेज,
सम्भल 244302 (उ.प्र.)
मोबाइल 8896340824
Email drfaheem807@gmail.com

ये भी पढ़ें; बात करो न मुझसे टैडी : फहीम अहमद की बाल कविता

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