In the simplicity of village life, even small incidents can turn into mysterious tales. “Bhootu Bandar” by Narendra Singh “Nihar” is a delightful children’s story that reveals the truth behind fear while highlighting courage and presence of mind. It entertains and teaches that every fear has a logical reason behind it.
Bhootu Bandar Story in Hindi | Moral Story About Fear, Courage and Truth
गांव की सादगी भरी जिंदगी में कभी-कभी ऐसी घटनाएं घट जाती हैं, जो साधारण होते हुए भी रहस्य और डर का रूप ले लेती हैं। नरेन्द्र सिंह "नीहार" की बाल कहानी “भूतू बन्दर” एक ऐसी ही रोचक कथा है, जिसमें डर के पीछे छिपी सच्चाई, बच्चों की समझदारी और साहस का सुंदर चित्रण किया गया है। यह कहानी न सिर्फ मनोरंजक है, बल्कि हमें यह भी सिखाती है कि हर डर के पीछे कोई न कोई कारण जरूर होता है।
रहस्य, डर और समझदारी की सीख देने वाली बाल कथा
भूतू बन्दर
बात पुराने दिनों की है, जब लोग कुएं पर पानी भरते थे। निठारी गांव में एक पक्का कुआं था। दिन भर कुएं पर चहल-पहल रहती थी। एक दिन दोपहर का वक्त था। एक बन्दर कुएं की मुंडेर पर आ बैठा। उसने नीचे की और झांका तो अपनी परछाई देखकर खो-खो करने लगा। कुएं में खो-खो की ध्वनि गूंजने लगी। बन्दर को आया गुस्सा और धड़ाम से पानी में कूद गया।मगर वहां कोई था ही नहीं। अब बन्दर लगा डूबने। छपाक .छपाक.. छपाक। किसी तरह उसने कुएं के किनारे बने झरोखे में घुसकर अपनी जान बचाई। लोग पानी भरने आते तो बन्दर उनके डोलू की रस्सी पकड़ कर अपनी ओर खींचने लगता। वे डर के मारे भाग खड़े होते। पूरे गांव में शोर मच गया कि कुएं में भूत है। गांव की औरतें बच्चों को कुएं पर जाने से रोकने लगीं। पूरे गांव में भूत की चर्चा जोरों पर थी।
तभी अनुराग ने कहा – कोई भूत नहीं होगा। जरूर कोई जानवर कुएं में फंस गया है। उसे निकालना होगा। वही रस्सी पकड़ कर बाहर आना चाहता होगा। कुछ निडर लड़कों ने उसकी हां में हां मिलाई । मनवीर काका ने कहा – जोशीले लड़कों हमें होश से काम लेना होगा। पहले यह पता लगाना होगा कि कौन सा जानवर है और फिर उसे बाहर निकालते समय अपनी सावधानी भी रखनी होगी।
जानवरों की आवाज़ निकालने वाले शिकारी को बुलाया गया। उसने शेर, भालू, गीदड़, लोमड़ी और भेड़िये की आवाज़ निकाली मगर कोई उत्तर नहीं मिला। अब उसने बन्दर की तरह खो-खो किया तो कुएं में से बन्दर की असली आवाज़ सुनाई पड़ी। मनवीर काका बोले – तो कपि राज हैं कुंए में। बताओ कैसे निकालोगे राघव ? अनुराग ने पूछा। रस्सी के सहारे नीचे जाऊंगा और पूंछ पकड़कर उस मूर्ख वानर को ऊपर खींच लाऊंगा। मनवीर – तुम्हें पता है कि बन्दर को पूंछ कितनी प्यारी होती है। रामायण में नहीं देखा कि हनुमान ने पूछ के बदले सोने की लंका ही जला दी थी। हम एक काम करते हैं, कुछ केले एक टोकरी में बांधकर नीचे लटकाते हैं। बन्दर केलों की खुशबू से टोकरी पर कूद पड़ेगा फिर हम उसे ऊपर खींच लेंगे। पास खड़े लोगों ने काका की हां में हां मिलाई।
एक बड़ी और गहरी टोकरी में केले का गुच्छा रखकर धीरे-धीरे कुएं में उतरा गया। बन्दर को केलों की खुशबू आ रही थी। वह दो दिन से भूखा भी था। उसने झरोखे से बाहर मुंह निकालकर देखा। मनवीर काका ने झट से अनुराग को इशारा किया। उसने टोकरी झरोखे से थोड़ा दूर हटा ली। बन्दर ने सीधे टोकरी में छलांग लगाई। वह मज़े से केले खाने लगा और अनुराग तथा राघव रस्सी को ऊपर खींचने लगे। अगले कुछ क्षणों में बन्दर कुएं के बाहर आ गया। वह गांव वालों की टोली को देखकर गुलाटियां खाते हुए भाग गया। मनवीर काका ने राहत की सांस लेते हुए कहा – तो ये था भूतू बन्दर । अनुराग और राघव की हिम्मत और बन्दर की शैतानी की किस्से गांव की फिजाओं में तैर रहे थे।
- नरेन्द्र सिंह "नीहार"
निष्कर्ष; यह कहानी हमें सिखाती है कि बिना सच जाने डरना नहीं चाहिए। समझदारी और साहस से हर समस्या का हल निकाला जा सकता है।
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बहुत रोचक कहानी
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