चीकू को मिला अनमोल ज्ञान | प्रेरणादायक हिंदी बाल कहानी

Dr. Mulla Adam Ali
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Written by Rekha Shah RB, the inspiring children’s story “Chiku’s Precious Lesson” beautifully highlights the values of friendship, humility, and hard work. It reminds readers that true success comes not just from talent, but from consistent effort and the right mindset.

Moral Story for Kids: Chiku and the Tortoise’s Valuable Lesson

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लेखिका रेखा शाह आरबी द्वारा लिखित प्रेरक बाल कहानी “चीकू को मिला अनमोल ज्ञान” दोस्ती, सीख और समझदारी का सुंदर संगम है। यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि निरंतर मेहनत, विनम्रता और सही सोच से मिलती है। चीकू और मेडी की यह कहानी बच्चों के साथ-साथ बड़ों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश छोड़ती है।

रेखा शाह आरबी की प्रेरक बाल कहानी

चीकू को मिला अनमोल ज्ञान

चीकू खरगोश और मेडी कछुआ दोनों एक ही स्कूल में एक ही क्लास में पढ़ते थे । इसीलिए रोज स्कूल साथ आते थे ।

उनका घर भी आस -पास था। सुंदरबन में तालाब किनारे तालाब में कछुआ अपने परिवार के साथ रहता था। और चीकू खरगोश का वहीं पर बिल था। जहां पर उसके भी मम्मी -पापा उसके साथ रहते थे ।

स्कूल से आने के बाद चीकू और मेडी दोनों साथ ही खेलते थे, उनमें खूब गहरी दोस्ती थी।

लेकिन एक दिन क्रिकेट खेलते हुए उन दोनों में खूब लड़ाई हो गई। मेडी गुस्से में भर उठा और चीकू को अनाप-शनाप बोलने लगा।

चीकू को भी बहुत गुस्सा आया और बोला- “कुछ भी मत बोलो.. अगर तुम्हें चीटिंग करके जीतना है तो मुझे नही खेलना है.. ईमानदारी से खेलना है तो खेलो “

अब तो और भी ज्यादा तेज में आवाज़ में मेडी बोला – “क्यों ना बोलु .. मैं तुमसे बहुत अच्छा हुं.. मेरे परदादा ने तुम्हारे परदादा को रेस में हरा दिया था.. और तुम मुझे चीटिंग बाज कह रहे.. मैं तो हमेशा से जीतने वाला कछुआ हुं... तुम भला मुझे क्या हराओगे “

चीकू—“ झूठ बोलने की भी एक सीमा होती है.. क्या भला ऐसा कहीं हो सकता है कि... एक कछुआ एक खरगोश को रेस में हरा दे ..तुम जरा अपनी चाल ढाल और चलने की गति को देखो ....तुम्हें खुद ही जवाब मिल जाएगा“

“ज़बाब तुम्हें पाना है तो जाकर ...अपने घर अपने मम्मी -पापा से पूछो कि मेरे परदादा ने तुम्हारे परदादा जी को रेस में हराया था कि नहीं?..”

 मेडी बहुत ही आत्मविश्वास के साथ बोला ।

उसका आत्मविश्वास देखकर चीकू एक बार संसय में पड़ गया । और फिर सोचने लगा... नहीं यह हो नहीं सकता.. जरूर यह कछुआ झूठ बोल रहा है... ऐसा संभव ही नहीं है कि कोई कछुआ किसी खरगोश को हरा दे ..और वह भी रेस में ..जब जंगल के बड़े-बड़े दौड़ने वाले नहीं हरा सकते हैं ...तो भला इस कछुए की क्या बिसात है ... जरूर यह झूठ बोल रहा है!

चीकू को सोच में डूबा देखकर मेडी ताली बजाकर हंसने लगा कहा कि ..” सोच में क्या पड़े हो ..अगर नहीं विश्वास है तो जाओ.. घर पर पूछना”

    चीकू को मेडी के बातों का विश्वास तो नहीं हुआ ...लेकिन फिर भी उसके मन में एक बार शंका तो आ ही गई कि... जब यह इतने आत्मविश्वास से कह रहा है तो ...कोई ना कोई बात तो जरूर रही होगी।

वह घर आकर अपनी मम्मी से सारी बात बताई और पूछा –“ मम्मी क्या सच में.. कछुए के परदादा जी मेरे परदादा जी को रेस में हरा दिया था ?”

तो उसकी मम्मी बोली-“ नहीं बेटा.. कछुए ने तुम्हारे परदादा जी को रेस में नहीं हराया था .. बल्कि तुम्हारे परदादा जी को उनके अति आत्मविश्वास.. प्रतिद्वंदी को गंभीरता से नहीं लेना और आलस्य ने उन्हें इस रेस में हराया था.. तुम ही सोचो भला क्या किसी खरगोश के दौड़ने में कोई कछुआ मुकाबला कर सकता है ..बिल्कुल नहीं कर सकता है.. लेकिन तुम्हारे दादाजी अति आत्मविश्वास के शिकार थे... और अपने प्रतिद्वंद्वी को उन्होंने कमजोर समझने की गलती की.. और उन्होंने रेस बीच में छोड़कर सो गए और कछुआ लगातार मेहनत करके चलता रहा.. जिसका नतीजा यह निकला कि.. कछुए की धीमी गति होने के बावजूद वह जीता और तुम्हारे परदादा जी हार गए ..”

चीकू बहुत ही ध्यान से सारी बातें सुन रहा था।

चीकू बोला –“ मां मैं समझ गया इंसान कितना भी काबिल हो.. लेकिन यदि वह लगातार मेहनत ना करें ..अति आत्मविश्वास के अभिमान में पड़ा रहे और अपने प्रतिद्वंद्वी को कम करके आंके.. तो उसकी हार तय है.. जीवन में जीतना है तो मेहनत लगातार करते रहनी चाहिए “!

“ बिल्कुल बेटा.. तुम्हें भी पढ़ाई में अपना लगातार मन लगाकर पढ़ते रहना चाहिए.. यदि तुम अपने क्लास में सबसे अच्छा परफॉर्म करना चाहते हो तो ...कभी भी इस भुलावे में नहीं रहना चाहिए कि.. मुझे सब कुछ आता है .. लगातार मेहनत ही जीत का मंत्र होता है “!

अगले दिन स्कूल जाते समय मेडी ने फिर से चीकू को चिढ़ाते हुए सवाल किया- “ क्या तुमने अपने घर पर पूछ लिया कि कौन विजेता था ..किसकी रेस में जीत हुई थी “

तो चीकू बहुत ही शांत स्वर में बोला- “हां ..मुझे पता चल चुका है कि.. उस रेस में कछुए की जीत हुई थी ...लेकिन मेरे परदादा को किसी कछुए ने नहीं ...बल्कि उनके अति आत्मविश्वास और प्रतिद्वंदी को कम करके आंकने, आलस्य ने हराया था “!

चीकू का जवाब सुनकर कछुआ अपनी हंसी भूल कर चीकू का चेहरा देखने लगा। क्योंकि बात तो एकदम चीकू की सत्य थी ।

इस बात को तो नकारना असंभव था, तो तुरंत ही मेडी अपने चिढ़ाने के लिए माफी मांगने लगा और बोला- “ मैं तुम्हारे जैसे समझदार दोस्त को खोना नहीं चाहता.. वाकई उस दिन क्रिकेट में ..मैं चीटिंग करके जीतना चाहता था “

तो चीकू ने भी पिछली बातों को भूला कर कछुए को गले लगा लिया। और फिर से दोनों अच्छे मित्र बन गए।

- रेखा शाह आरबी

निष्कर्ष; यह कहानी हमें सिखाती है कि अति आत्मविश्वास और आलस्य सफलता के सबसे बड़े शत्रु हैं। सच्ची जीत उसी की होती है जो निरंतर मेहनत करता है, विनम्र रहता है और अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहता है।

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