पर्यावरण, मानवीयता और नैतिक मूल्यों से सजी बाल कथाओं का सुंदर संसार : पानी में पैसा

Dr. Mulla Adam Ali
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“Pani Mein Paisa” by Govind Sharma is a meaningful collection of children’s stories filled with moral values, environmental awareness, humanity, and entertainment. Through simple yet impactful narratives, the book inspires young readers to develop positive thinking, kindness, discipline, and social responsibility while enjoying engaging and thought-provoking stories.

“Pani Mein Paisa: Inspiring Children’s Stories on Moral Values, Environment and Humanity”

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बाल साहित्यकार गोविंद शर्मा का बाल कथा संग्रह ‘पानी में पैसा’ सीख, संवेदना, मनोरंजन और पर्यावरण चेतना से भरपूर कहानियों का सुंदर संकलन है। डॉ. मेघा बंसल द्वारा लिखी गई समीक्षात्मक टिप्पणी और लेखक की ‘अपनी बात’ पाठकों को इन कथाओं के उद्देश्य, मानवीय मूल्यों और बाल मन पर उनके सकारात्मक प्रभाव से परिचित कराती है। यह संग्रह बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ समाज में नैतिकता और जागरूकता का संदेश भी देता है।

  • पुस्तक का नाम : पानी में पैसा
  • लेखक : गोविंद शर्मा
  • संस्करण : प्रथम 2026
  • आईएसबीएन: 978-93-5947-338-3
  • प्रकाशक: साहित्यागार, जयपुर
  • पुस्तक मंगवाने के लिए कॉल करें: 9314202010
  • श्रेणी: बाल कहानी संग्रह
  • मूल्य 150 ₹

“बाल मन में संस्कार और संवेदना जगाती कथाएँ : ‘पानी में पैसा’ का समीक्षात्मक अवलोकन”

बाल साहित्य विषयक अपने शोध कार्य हेतु गोविंद जी के साहित्य का समग्र अध्ययन करते हुए, आज उन्हीं के नव प्रकाशित बाल कथा संग्रह "पानी में पैसा" के लिए लिखने का सौभाग्य मिला। जिसके लिए मैं गोविंद जी के प्रति गहरी कृतज्ञता प्रकट करती हूँ।

"पानी में पैसा" कथा संग्रह में कुल आठ कहानियाँ हैं। सभी कथाएँ आकार में छोटी और प्रभावोत्पादक हैं। संग्रह की प्रथम कहानी 'झबरू की समझ' है। मनुष्य के सभी गुणों में कृतज्ञता सबसे महान गुण है। वर्तमान में यह भावना मनुष्यों से दूर होती जा रही है वहीं झबरू नामक पात्र की सृजना कर मानवीय गुणों की अभिव्यक्ति प्रेरणादायक है। आत्मकथात्मक शैली में लिखी इस कथा में कथावाचक के निःस्वार्थ भाव और परोपकार से प्रेरित हो झबरू कुत्ते द्वारा स्वामी भक्ति और कृतज्ञता की भावना का संचार शिक्षाप्रद है। जीवन में कभी लालच नहीं करने, प्रत्येक छोटी-बड़ी चीज के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, सार्वजनिक सफाई और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण का भाव पैदा करती दूसरी कहानी- 'देखिए और सीखिए' है। 'घंटी तो बंधी थी' और 'बंदर की इंसानियत' कहानियाँ आधुनिक परिवेश में मोबाइल के सीमित व संयमित प्रयोग की आवश्यकता पर बल देती हैं। 'बंदर की इंसानियत' कहानी में सोशल मीडिया व्यसनी इंसानों की संवेदनहीनता और पशुओं की मानवीयता का व्यंग्यात्मक, मनोरंजक और शिक्षाप्रद चित्रण है। 'यह ताला भी खुलेगा' शीर्षक कहानी पुस्तकों के महत्व को बताते हुए शिक्षा के प्रति जागृति पैदा कर नेक सोच को उजागर करती है। 'प्याज एक स्मृति चिन्ह' विशुद्ध हास्य से परिपूर्ण रोचक कथा है।

संकलन की शीर्षक कथा 'पानी में पैसा' है जिसमें अपने दादाजी द्वारा सुनाए किस्सों के अनुरूप बालक का नदी में सिक्का फेंकना परंतु दूषित जल और कचरे के जमाव के कारण उसे ना देख पाने पर उदास हो जाना कथा का उत्कर्ष है। यह कथा बालक को प्रेरणास्रोत बनाकर बड़ों में भी पर्यावरणीय चेतना का संचार करने में सक्षम है। बालकों को क्रोध और शत्रुता जैसे दुर्विकारों से होने वाले नुकसान के प्रति सावधान करते हुए, उनसे दूरी बनाए रखने और जीवन में स्वस्थ प्रतियोगिता को अपनाने की सीख देती शिक्षाप्रद कहानी 'रंग मिल गए' संग्रह की अंतिम कथा है। इस प्रकार सभी कथाओं में गोविंद जी की लेखन शैली, शब्दों का चयन, भाषा का प्रवाह और भावों की अभिव्यक्ति बाल पाठकों के मन पर गहरा प्रभाव छोड़ जाती है।

प्रत्येक कहानी के साथ बने चित्र पाठकों को सजीव अनुभव प्रदान करने में सक्षम है। अभिभावकों से मेरा अनुरोध है कि वे यह पुस्तक अपने बच्चों को एक बहुमूल्य भेंट की तरह दें ताकि वे इन कहानियों को पढ़ते हुए बड़े हो और उनके बहुआयामी व्यक्तित्व का निर्माण हो सके।

मैं इस कथा संग्रह की सफलता के लिए आदरणीय गोविंद शर्मा जी को अग्रिम शुभकामनाएँ व बधाई प्रेषित करती हूँ। मैं ईश्वर से आपके स्वस्थ जीवन की कामना करती हूँ ताकि आपकी लेखनी बाल साहित्य जगत को समृद्ध और बाल पाठकों को उपकृत करती रहे।

- डॉ. मेघा बंसल
5-ओ-8 जवाहरनगर, श्रीगंगानगर (राजस्थान)
पिन : 335001

पानी में पैसा’ : सीख, प्रेरणा और मनोरंजन से भरपूर बाल कहानियों का अनमोल संग्रह

apni baat by govind sharma

अपनी बात

सन 1971 से बाल साहित्य लिख रहा हूँ। अधिकांश रचनाएँ कहानी विधा में की है। प्रस्तुत पुस्तक 'पानी में पैसा' में ग्यारह कहानियाँ हैं। इन कहानियों में वे सब विषय हैं जो मुझे पसंद है अर्थात सीख, प्रेरणा और मनोरंजन । प्रेरणा-सीख आगे बढ़ाने की, आगे पढ़ने की और मानवीयता के साथ पर्यावरण की सुरक्षा करने की।

इन रचनाओं की एक विशेषता यह भी है कि ये सब मेरी नवीनतम रचनाएँ हैं। इनमें से कुछ कहानियाँ स्तरीय बाल पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है। यह तो हम जानते हैं कि पत्रिकाओं के पाठक अलग-अलग स्थान पर होते हैं। किसी पाठक समुदाय को कोई कहानी तो किसी को कोई कहानी पढ़ने को मिलती है। अब हिंदी बाल साहित्य के विशाल पाठक वर्ग को इस बाल कथा संग्रह के माध्यम से एक साथ ये कहानियाँ उपलब्ध होंगी। इसके लिए मेरे साथ आप भी प्रकाशक जी को धन्यवाद दे सकते हैं। इन कहानियों में क्या सीख है और क्या प्रेरणा यह कथा पढ़ते ही आप समझ जाएंगे। वैसे एक कहानी 'झबरू की समझ' है। आप धैर्य और सजगता से अपना कर्तव्य निभाएँ तो अपना लक्ष्य पाने में अवश्य सफल होंगे। जैसे झबरू ने प्राप्त किया। एक पर्यावरण की रक्षा के लिए सफाई और हरियाली आवश्यक है- 'देखिए और सीखिए'। इससे अगली कहानी 'घंटी तो बंधी थी' का संदेश है- हर वक्त मोबाइल पर लट्टू बने रहने से नुकसान होता है। हाँ, पढ़ना जरूरी है और पढ़ने के इच्छुकों को सुविधा देना आपका कर्तव्य है- कहानी 'यह ताला भी खुलेगा' कहती है। हास्य भी है, सफाई और हरियाली का संदेश भी है कहानी- 'प्याज- एक स्मृति चिन्ह' में। मानवता की सीख लीजिए कहानी 'बंदर की इंसानियत' से। आज की प्रमुख आवश्यकता है नदियों और दूसरे जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाने की और इनकी साफ सफाई की 'पानी में पैसा'। इन सब के साथ स्कूल, गली, मोहल्ले में मित्रों से मैत्री भावना रखना भी जरूरी है- यह कहती है कहानी 'रंग मिल गए'। बालभास्कर में प्रकाशित होने वाली कहानी 'रंग सिखाए ढंग' को भी खूब पसंद किया गया है। कुछ और भी मिलेगा इन कहानियों में। आप पढ़िए इन कहानियों को और मुझे बताइए कि आपको यह सब कैसा लगा। मेरी शुभकामनाएँ स्वीकार करें।

- गोविंद शर्मा
9414482280

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