काला तोता कहानी | गोविन्द भारद्वाज की प्रेरक हिंदी बाल कहानी

Dr. Mulla Adam Ali
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Kala Tota is a delightful children's story by Govind Bhardwaj that highlights the values of friendship, kindness, courage, and freedom. With its simple language and engaging narrative, the story inspires young readers to show compassion toward birds and animals while enjoying an entertaining tale.

Kala Tota Story in Hindi

काला तोता गोविन्द भारद्वाज की प्रेरक हिंदी बाल कहानी

बाल साहित्यकार गोविन्द भारद्वाज की कहानी 'काला तोता' मनोरंजन के साथ-साथ संवेदना, मित्रता, साहस और स्वतंत्रता का सुंदर संदेश देती है। सरल भाषा और रोचक घटनाओं के माध्यम से यह कहानी बच्चों को पशु-पक्षियों के प्रति प्रेम, सहयोग की भावना तथा विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देती है। आइए, इस प्रेरक एवं रोचक कहानी का आनंद लें।

बच्चों के लिए रोचक और प्रेरक हिंदी कहानी

काला तोता

‘अरे ये देखो अपने उपवन में यह कैसा तोता आ गया?’ हरियल तोते ने चिल्लाते हुए कहा। ‘कहां आ गया...कैसा आ गया?’ सभी तोते कहते हुए कोटर से बाहर आ गये। ‘ये देखो...काला तोता।‘ हरियल ने एक काले तोते की ओर इशारा करते हुए कहा। सोनू तोता हरियल के पास पहुंच कर बोला, ’अरे हाँ!ये तो सचमुच काला तोता है।‘ हरियल ने पूछा, ‘अरे भई कौन से देश से आए हो?’ काला तोता भयभीत सा लग रहा था।उसने डरते हुए कहा, ’भैया मुझे बचा लो,कुछ बच्चे मुझे पकड़ने आ रहें हैं। मैं बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर इधर आया हूँ।‘ ‘अरे है तो यह अपनी बिरादरी का ही...तभी तो जुबान भी अपनी जैसी बोल रहा है। ‘सोनू तोते ने कहा। ‘हाँ...हाँ बिल्कुल अपनी जैसी बोली है।‘ पीलू तोते ने पंख फड़फड़ाते हुए कहा।

इस पर हरियल तोते ने कहा, ’चलो अब बाकी बातें बाद में...पहले इसे हम अपने कोटर में छुपाते हैं, वरना शैतान बच्चे आ गये तो, यह बेचारा मुसीबत में फंस जाएगा।‘

कुछ देर बाद कुछ बच्चे वहां आ गये। एक लड़के ने कहा,’यही कहीं होगा, अपना कालू।‘ ‘जाएगा कहां, आखिर अपने हाथ आ ही जाएगा। बस देखते ही जाल फैला देना।‘ दूसरे लड़के ने कहा। उपवन के सारे तोते उनकी हरकत पर नजर रखे हुए थे।काफी देर इधर-उधर ढूँढ़ने के बाद बच्चे वहां से कहीं ओर चले गये। हरियल‌‌ ने आवाज़ लगाती, ’कालू बाहर आ जाओ। शरारती बच्चे चले गये।‘ ‘अरे भैया तुम्हें मेरे नाम का पता कैसे चला?’ काले तोते ने पूछा। ‘अरे भाई..उन बच्चों के मुँह से सुना था।‘ ‘अब बताओ भाई मामला क्या है?’ सोनू ने लपककर पूछा।

कालू ने बताया, ’कुछ महीने पहले मुझे एक बहेलिए ने पकड़ कर पास की बस्ती में रामू को बेच दिया। ‘काला था इसलिए?’ पीलू ने बीच में उछल कर पूछा। ‘नहीं भाइयों मैं आप के जैसा ही हरे रंग का था, मेरी चोंच भी बिल्कुल आप जैसी लाल थी।‘ कालू ने दुःखी होकर कहा। ‘तो फिर यह सब कैसे हुआ?’ सोनू ने उत्सुकता से पूछा। कालू बोला,’एक दिन रामू और उसका परिवार एक दिन के लिए बाहर चला गया। भूल से पिंजरा खुला रह गया।मैंने पिंजरे से निकलकर घर से बाहर जाने का रास्ता ढूँढ़ने लगा।लेकिन खिड़की-दरवाजे सब बंद थे। पूरे दिन इधर से उधर तक फड़फड़ाता रहा।‘ ‘फिर क्या हुआ?’ सोनू ने पूछा।

‘अरे चुप तो रह...बता तो रहा है।‘ हरियल ने उसे टोकते हुए कहा। ‘भाई तेरी कहानी में मजा आ रहा है।‘ पीलू बोला। कालू ने बात आगे बढ़ाते हुए कहा,’थोड़ी देर बाद दरवाजे कोई हलचल से हुई। मैंने सोचा रामू का परिवार आ गया। मैं डर के मारे तहखाने में घुस गया। वहां एक बड़ा सा डिब्बा देखकर मैं उस में घुस गया। फिर मत पूछो भाई...।‘ ‘क्या हुआ बताओ भाई?’ हरियल ने पूछा। वह बोला, ’दरअसल वो डिब्बा काले रंग के पेंट का था। दीपावली का बचा पेंट उन्होंने बिना ढक्कन लगाए रख दिया था। मैं पेंट में डूब गया।बड़ी मुश्किलों से बाहर तो आ गया लेकिन...!’ ‘लेकिन क्या?’ एक और तोते ने सांस रोककर पूछा। कालू ने कहा, ’बाहर निकलते ही मुझसे उड़ा नहीं गया। दोनों पंख चिपक गये। दूसरे दिन मुझे रामू ने ढूँढ़ ही लिया। उसने मेरे पंख तो धीरे-धीरे खोल दिए, लेकिन रंग काला ही रहने दिया।‘ ‘वो क्यों?’ सोनू तोते ने पूछा।

‘वो इसलिए कि मेरा काला रंग उनको अद्भुत सा दिखाई देने लगा। इसलिए वो मुझे कालू कहकर बुलाने लगे।‘ ‘फिर आज यहाँ कैसे आए?’ हरियल तोते ने पूछा। ‘आज रामू मुझे छत पर बैठा कर मिर्ची खिला रहा था कि अचानक एक पतंग कट कर वहां आ गयी। रामू मुझे भूलकर पतंग लपकने के लिए दौड़ पड़ा और मैं वहां से मौका देखकर फुर्र हो गया।‘ कालू ने मुस्कुराते हुए बताया। ‘अरे यह तो तुमने बड़ा अच्छा काम किया। अब घबराने की बात नहीं है। तू अब कभी उनके हाथ नहीं आएगा।‘ पीलू तोता ने उसको हिम्मत देते हुए कहा। ‘भाइयों, अब मैं अपनी दुनिया में लौटकर बहुत खुश हूँ। आप सभी का बहुत- बहुत धन्यवाद। आप नहीं बचाते तो वो मुझे फिर पकड़ ले जाते।‘

कालू ने सबका आभार जताते हुए कहा।

- गोविन्द भारद्वाज

निष्कर्ष; 'काला तोता' एक प्रेरक बाल कहानी है, जो सिखाती है कि सच्ची मित्रता, सहयोग और साहस से हर कठिन परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। साथ ही, यह कहानी सभी जीवों के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता का संदेश भी देती है।

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