"Guru Mahima" by Madhu Maheshwari is a beautiful Hindi children's poem that highlights the importance of teachers in shaping knowledge, values, and character. Written in simple and engaging language, it inspires young readers to respect their gurus and follow the path of wisdom and morality.
Guru Mahima | Inspirational Hindi Poem on Guru Purnima
मधु माहेश्वरी की प्रेरणादायक बाल कविता
भारतीय संस्कृति में गुरु को ज्ञान, संस्कार और जीवन-दर्शन का सर्वोच्च मार्गदर्शक माना गया है। गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व हमें अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने का अवसर देता है। कवयित्री मधु माहेश्वरी की कविता "गुरु महिमा" सरल, सरस और बाल-मन के अनुरूप रचित है। यह कविता गुरु के महत्व, उनके उपकार तथा नैतिक शिक्षा के मूल्यों को सहज भाषा में प्रस्तुत करते हुए बच्चों को गुरु का सम्मान करने और उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
गुरु महिमा
आओ प्यारे मित्रों आओ,
मिलकर गुरु पूर्णिमा मनाऍं।
वन्दन करके गुरु चरणों में,
बैठ सभी गुरु महिमा गाऍं।।
वेदव्यास जी का जन्मदिन,
जगाए मन में अति उल्लास।
गुरु चरणों का आश्रय पाकर,
जीवन में भरें ज्ञान-उजास।।
चिंटू मिंटू भोला आओ,
मिलकर चलें गुरु कुल के द्वार।
गुरु कृपा मिल जाए अगर तो,
नव जीवन को मिले आधार।।
शिष्य कुम्भ गुरु कुम्भकार है,
हमको देता सही आकार।
बुराइयों से हमें बचाकर,
सबपर करते बड़ा उपकार।।
चलो सारे गुरुजनों का हम,
मन से आदर सम्मान करें।
अच्छी उन्नत शिक्षा पाकर,
संकल्प नैतिकता का धरें।।
गुरु पूर्णिमा का पुण्य अवसर,
हम हर्षोल्लास से मनाऍं।
श्रीफल भेंट आदि अर्पित कर,
सभी गुरु-आशीर्वाद पाऍं।।
- मधु माहेश्वरी
निष्कर्ष; "गुरु महिमा" कविता गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का सुंदर संदेश देती है। यह बच्चों को गुरु के मार्गदर्शन में ज्ञान, संस्कार और नैतिक मूल्यों को अपनाकर आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करती है।
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