"Badal Garje" is a delightful children's poem by Madhu Maheshwari that beautifully captures the joy of the rainy season. With rhythmic verses, playful activities, and the warmth of family, the poem inspires children to enjoy nature, celebrate togetherness, and express themselves through fun and creativity.
Badal Garje Poem in Hindi | Beautiful Rain Poem for Childrens
वर्षा ऋतु पर मनमोहक कविता
"बादल गरजे" मधु माहेश्वरी जी की एक मनोरम बाल कविता है, जिसमें वर्षा ऋतु का उल्लास, बच्चों का उत्साह और दादी के स्नेहिल सान्निध्य का सुंदर चित्रण किया गया है। सरल भाषा, मधुर लय और खेल-खेल में सीख देने वाली यह कविता बच्चों को प्रकृति के आनंद से जोड़ते हुए सामूहिकता, खुशी और रचनात्मक अभिव्यक्ति का संदेश देती है।
बादल गरजे
गड़ -गड़ गड़ -गड़ बादल गरजे,
चपला चम-चम-चम-चम चमके।
थप-थप थप-थप करके देखो,
बच्चे नाच रहे हैं जमके।।
उत्साह देख दादी बोली
आओ बच्चो समीप आओ।
खेल सुन्दर तुम्हें सिखाऊॅं,
बीच ऑंगन गोला बनाओ।।
मौसम बना है अति सुहाना,
आओ खेलें खेल निराला।
टेडी पकड़ का खेल प्यारा,
मस्ती संग झूमने वाला।।
ताली संग घूमते प्यारे,
टेडी को पकड़ाते जाऍं।
थमे ताली जब रूकें सभी,
टेडी वाला दण्ड चुकाऍं।।
कोई गाना ,कोई कविता,
कोई सुन्दर नाच दिखाऍं।
बरखा का आनन्द अनोखा,
नाचें-गाऍं धूम मचाऍं।।
मधु माहेश्वरी, राजस्थान
निष्कर्ष; "बादल गरजे" केवल वर्षा का चित्रण नहीं, बल्कि बचपन की निश्छल खुशी, पारिवारिक स्नेह और मिल-जुलकर आनंद मनाने की सुंदर प्रेरणा देने वाली कविता है। यह कविता बच्चों के मन में प्रकृति-प्रेम, उत्साह और सामूहिक सहभागिता का भाव सहज रूप से जगाती है।
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