Hindi Diwas, celebrated on 14 September, is an occasion to appreciate the importance and beauty of the Hindi language. These three simple and melodious children’s poems by Suryakumar Pandey inspire children to love, learn, speak, and respect Hindi.
Hindi Diwas: 3 Beautiful Children’s Poems by Suryakumar Pandey on the Importance of Hindi
हिंदी के महत्व पर तीन बाल कविताएं
14 सितंबर को मनाया जाने वाला हिंदी दिवस हिंदी भाषा के महत्व, सरलता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को याद करने का अवसर है। बाल साहित्य के प्रसिद्ध रचनाकार सूर्यकुमार पांडेय ने अपनी सहज, सरस और बालमन को आकर्षित करने वाली कविताओं के माध्यम से हिंदी के प्रति प्रेम और अपनत्व का भाव जगाया है। प्रस्तुत तीन बाल कविताओं में हिंदी को अपनाने, पढ़ने-बोलने और उसके महत्व को समझने का सुंदर संदेश दिया गया है।
हिंदी दिवस पर सूर्यकुमार पांडेय की 3 बाल कविताएँ: हिंदी के महत्व पर सुंदर कविताएँ
१
हिंदी दिवस मनाएं हम
हिंदी को अपनाएं हम,
हिंदी पढ़ें, पढ़ाएं हम।
बोलें और बतियाएं हम,
हिंदी दिवस मनाएं हम।
हिंदी की जयकार सुनें,
सात समंदर पार सुनें।
इसकी बोली-बानी में,
भारत की ललकार सुनें।
हिंदी जिन्हें नहीं आती,
उनको इसे सिखाएं हम।
हिंदी पढ़ें, पढ़ाएं हम।
हम करते सबसे विनती,
हिंदी की सीखें गिनती,
रटें पहाड़े हिंदी में,
कभी नहीं होगी गलती।
कितनी मीठी भाषा है,
इसके गाने गाएं हम।
हिंदी को अपनाएं हम।
२
हिंदी सरल है
हिंदी सहज है, हिंदी सरल है।
भाषा की झीलों में खिलता कमल है।
यह हमको प्यारी, यह सबको प्यारी,
इसमें ही बसती है दुनिया हमारी।
इसकी पढ़ाई, इसमें लिखाई,
बोलें जो हिंदी में, होती बड़ाई।
भारत की वाणी का यह गंगाजल है।
हिंदी सहज है, हिंदी सरल है।
भाषा की झीलों में खिलता कमल है।
दादा और दादी, नाना और नानी,
हिंदी में हमको सुनाते कहानी।
हिंदी के गाने, मीठे तराने,
सब ही समझते हैं उनके माने।
यह मातृ भाषा है, पावन प्रबल है।
हिंदी सहज है, हिंदी सरल है।
भाषा की झीलों में खिलता कमल है।
३
हिंदी
भारत मां की आशा हिंदी।
हम सबकी अभिलाषा हिंदी।
तमिल, मराठी, तेलुगु, कन्नड़,
सबकी प्यारी भाषा हिंदी।
अ-आ-इ से क्ष-त्र-ज्ञ तक,
करती खेल-तमाशा हिंदी।
संस्कृत दूध, केक अंग्रेजी,
लेकिन एक बताशा हिंदी।
- सूर्यकुमार पांडेय
निष्कर्ष; सूर्यकुमार पांडेय की ये बाल कविताएँ बच्चों में हिंदी के प्रति प्रेम, सम्मान और अपनत्व का भाव जगाती हैं। सरल और मधुर शब्दों में रची ये कविताएँ हिंदी के महत्व को समझाने के साथ-साथ इसे पढ़ने, लिखने और बोलने की प्रेरणा देती हैं।
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