Suryakumar Pandey’s 12 patriotic poems for children beautifully celebrate India, the national flag, freedom, unity, and love for the nation. Written in simple and engaging language, these poems inspire young readers to respect the country, value freedom, and become responsible citizens.
12 Patriotic Poems for Kids by Suryakumar Pandey | Indian Flag, Freedom & Love for India
स्वतंत्रता दिवस की 12 देशभक्ति कविताएँ
देशप्रेम, राष्ट्रभक्ति, स्वतंत्रता, तिरंगे और राष्ट्रीय पर्वों की भावनाओं को सरल, सहज और बालमन के अनुकूल शब्दों में व्यक्त करने वाली सूर्यकुमार पांडेय जी की ये 12 कविताएँ बच्चों में देश के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और एकता की भावना जगाती हैं। इन रचनाओं में राष्ट्र की सुंदरता के साथ स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संविधान के सम्मान और आजादी के सही अर्थ को भी रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। प्रस्तुत है सूर्यकुमार पांडेय जी की देशभक्ति से ओत-प्रोत 12 बाल कविताओं का यह सुंदर संकलन।
देश हमारा बने महान — राष्ट्रनिर्माण की प्रार्थना
यह प्रार्थना गीत एक सुंदर और समृद्ध भारत की कामना करता है, जहाँ हरियाली, स्वच्छ जल, शांति, भाईचारा और विज्ञान की उन्नति हो। कविता बच्चों में देश के प्रति सकारात्मक सोच जगाती है।
1. प्रार्थना गीत - विनती
देश हमारा बने महान,
इतनी विनती है भगवान!
इस धरती पर हो हरियाली,
फूल खिले हों डाली-डाली।
मीठे फल हों, चिड़ियाँ चहकें,
साफ हवा हो, साँसें महकें।
भरें अन्न से घर-खलिहान,
देश हमारा बने महान।
ताल-तलैया, झील-नहर से,
नदियों की हर एक लहर से;
कलकल- छलछल, छलछल-कलकल
हम सबको ही मिले स्वच्छ जल।
स्वस्थ-सुखी हो हर इंसान,
देश हमारा बने महान।
हो हम सबमें भाईचारा,
चम-चम चमके देश हमारा।
हो न उपद्रव, हिंसा, दंगा,
लहर-लहर लहराए तिरंगा।
और करे उन्नति विज्ञान,
देश हमारा बने महान।
तिरंगा हमारी शान — भारत की पहचान
तिरंगे के तीन रंगों और अशोक चक्र के माध्यम से यह कविता भारत की आन-बान और प्रगति का संदेश देती है। बच्चों के मन में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और गर्व जगाने वाली यह सुंदर रचना है।
2. भारत की पहचान तिरंगा
आन-बान है, शान तिरंगा,
भारत की पहचान तिरंगा।
नगर-नगर में, डगर-डगर पर,
गांव- गली में, सीमाओं पर।
लहर- लहर कर, फहर-फहर कर,
देशभक्ति भरता है घर-घर।
है उत्सव, अभियान तिरंगा।
हम सबका अभिमान तिरंगा।
भारत की पहचान तिरंगा।
आजादी वाला यह परचम,
तीन रंग का है यह संगम।
शौर्य, शांति, हरियाली के संग,
चक्र प्रगति का घूमे हरदम।
हम सब का अरमान तिरंगा।
रहता सीना तान तिरंगा।
भारत की पहचान तिरंगा।
वीरों का प्यारा झंडा — तिरंगे का गौरव
इस कविता में तिरंगे को वीरों का प्यारा और भारत की आन-बान का प्रतीक बताया गया है। इसके तीन रंगों और अशोक चक्र के माध्यम से राष्ट्रगौरव की भावना को सरल शब्दों में व्यक्त किया गया है।
3. झंडा
है वीरों को प्यारा झंडा,
न्यारा, राजदुलारा झंडा।
फहर-फहर नभ में लहराया,
देखो, आज हमारा झंडा।
तीन रंग कितने सुंदर हैं,
मनमोहक है सारा झंडा।
एक चक्र है बना बीच में,
यह आँखों का तारा झंडा।
यूँ तो शांतिदूत; पर रण में,
बन जाता अंगारा झंडा।
भारत माँ की आन-बान है,
सबका सबल सहारा झंडा।
अमर तिरंगे की जय — शहीदों को नमन
स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, संविधान के निर्माण और गणतंत्र दिवस के गौरव को समेटे यह कविता देश के वीर सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित करती है और तिरंगे के प्रति सम्मान जगाती है।
4. अमर तिरंगे की जय
फांसी के फंदों पर झूले,
स्वतंत्रता सेनानी।
आजादी लाने को दे दी,
जीवन की कुर्बानी।
वीर शहीदों ने गाया, मां-
रंग दे बसंती चोला।
यह सुनकर अंग्रेजी शासन-
का, सिंहासन डोला।
स्वाधीनता मिली, आया फिर
संविधान वह प्यारा।
जिसके नियमों पर चलता है
भारत देश हमारा।
सन् उन्नीस सौ पचास की वह तिथि,
थी छब्बीस जनवरी।
भारत में गणतंत्र दिवस की,
अमर पताका फहरी।
उसे हर बरस याद करें हम,
झंडा फहरे निर्भय।
भारत माता की जय बोलें,
अमर तिरंगे की जय।
आई आजादी — स्वतंत्रता का उत्सव
यह कविता 15 अगस्त और भारत की स्वतंत्रता की खुशी को स्वर देती है। इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान के साथ लोकतंत्र और देश की प्रगति की सुंदर भावना दिखाई देती है।
5. आयी आजादी
गिरीं गुलामी की दीवारें
बाहर आई आजादी
था पंद्रह अगस्त का दिन जब
हमने पाई आजादी।
सदियों से परतंत्र धरा थी
अपना देश स्वतंत्र मिला
राजतंत्र का अंत हो गया
लोकतंत्र का मंत्र मिला
मुक्त गगन में उच्च तिरंगा
बन लहराई आजादी
भारत माता के आंगन में
फिर इठलाई आजादी।
अनगिन वीर सपूतों ने
अपना तन-मन बलिहार किया
अंग्रेजी शासन को वापस
सात समंदर पार किया
भारत-भू के कण-कण में
यूं खुशियां लाई आजादी
नई प्रगति की राह दिखाती
हमको भाई आजादी।
हर मौसम में रंगों का देश — अपना भारत
भारत की प्राकृतिक सुंदरता, ऋतुओं, पर्वों, लोकनृत्यों और सांस्कृतिक विविधता का मनमोहक चित्र इस कविता में दिखाई देता है। यह रचना भारत की ‘विविधता में एकता’ को उत्सवधर्मी अंदाज में प्रस्तुत करती है।
6. अपना देश
गर्मी का मौसम जब आए,
सूरज रंग-गुलाल लुटाए।
वर्षा में बादल; पिचकारी-
बनकर हमें भिगोता जाए।
जाड़ों में कोहरे के उजले-
कपड़े लाता, अपना देश
हर मौसम में होली का-
त्योहार मनाता, अपना देश।
गंगा की लहरों-सा चंचल,
दृढ़ विन्ध्याचल-सा ठहरा।
तन हिमगिरि से भी ऊँचा है,
मन सागर से भी गहरा।
केसर की क्यारी-सा हर पल-
गन्ध लुटाता, अपना देश।
हर मौसम में होली का-
त्योहार मनाता, अपना देश।
कहीं डांडिया, गरबा, गिद्दा,
बीहू, कथक भरत-नाट्यम।
बिरहा कहीं, कहीं पर चैता,
कहीं मृदंग, ढोल ढम-ढम।
फागुन आते ही मस्ती में-
तान लगाता, अपना देश।
हर मौसम में होली का-
त्योहार मनाता, अपना देश।
खेत और खलिहानों में,
हर पल इठलाता, अपना देश।
कितना प्यारा देश हमारा,
हँसता-गाता अपना देश।
सारा देश हमारा घर — देश की रक्षा का संकल्प
यह कविता बच्चों को देश को अपना घर मानने और उसकी रक्षा करने का संदेश देती है। देशप्रेम, जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना इसकी प्रमुख विशेषता है।
7. हमारा घर
ना मेरा,
तुम्हारा घर,
सारा देश हमारा घर.
हम इसमें रहने वाले,
हम इसके रखवाले हैं.
दुश्मन आँख उठाए तो,
आफत के परकाले हैं.
इसकी रक्षा
करनी है,
यह प्राणों से प्यारा घर.
सारा देश हमारा घर.
फूल खिलाएँ खुशियों के,
सारा देश बगीचा है.
अपने खून- पसीने से,
हमने इसको सींचा है.
आँच नहीं
आए कोई,
है आँखों का तारा घर.
सारा देश हमारा घर।
यह देश हमारा है — एकता का सुंदर संदेश
भारत की प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सद्भाव को केंद्र में रखकर रची गई यह कविता राष्ट्रीय एकता का संदेश देती है। विभिन्न धर्मों और परंपराओं के बीच भाईचारे की भावना इसमें विशेष रूप से उभरती है।
8. यह देश हमारा है
वतन हमारा, देश हमारा,
राष्ट्र हमारा है,
हमको प्यारा, सबको प्यारा,
जग से न्यारा है।
यह देश हमारा है।
इसकी माटी चंदन सोना
सुंदर इसका कोना कोना
इसका अपना रूप सलोना
राजदुलारा है।
यह देश हमारा है।
गहरा सागर पाँव पखारे
अडिग हिमालय मुकुट संवारे
लेकिन यदि दुश्मन ललकारे
यह अंगारा है।
यह देश हमारा है।
इसके कण कण में तरुणाई
इसकी कीर्ति चतुर्दिक छाई
हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई
भाईचारा है।
यह देश हमारा है।
विविध रंग इसके अति सुंदर
धड़कन एक, एक इसका स्वर
यह मंंदिर, मस्जिद, गिरजाघर
यह गुरुद्वारा है।
यह देश हमारा है।
धम्मकधम्मक-धम — गणतंत्र दिवस का उल्लास
गणतंत्र दिवस के उल्लास और तिरंगे की शान को लयात्मक शब्दों में प्रस्तुत करती यह कविता बच्चों के लिए विशेष रूप से आकर्षक है। संविधान के सम्मान, परिश्रम, शांति और अहिंसा का संदेश भी इसमें मिलता है।
9. धम्मकधम्मक-धम
आई है छब्बीस जनवरी,
खुशियों का आलम।
लहर रहा हर ओर तिरंगा,
फहर रहा परचम।
धम्मकधम्मक-धम।
धम्मकधम्मक-धम।
संविधान की रक्षा की,
खाते हैं आज कसम।
'जन-गण-मन' के साथ गा रहे,
'वंदे मातरम्' हम।
धम्मकधम्मक-धम।
धम्मकधम्मक-धम।
देश हमारा दिन-दिन विकसित,
करें सभी परिश्रम।
शांति-अहिंसा वाला मौसम,
बना रहे हरदम।
धम्मकधम्मक-धम।
धम्मकधम्मक-धम।
अमर रहेगा नाम — महात्मा गांधी को नमन
महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, सादगी और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को सरल बालभाषा में प्रस्तुत करती यह कविता बच्चों को बापू के जीवन-मूल्यों से परिचित कराती है।
10. अमर रहेगा नाम
अंग्रेजों की क्रूर गुलामी से हम सबको करने दूर।
एक महामानव धरती पर आया, ताकत थी भरपूर।
दया और करुणा की मूरत, सत्य-अहिंसा थे हथियार।
जिसके बल पर गए फिरंगी, वापस सात समंदर पार।
जिसको जंग पसंद नहीं थी, न ही तोप, गोला, बारूद।
सादा जीवन जीता था वह, पीता था बकरी का दूध।
आंखों पर चश्मा, हाथों में लाठी, थी जिसकी पहचान।
पहनी एक लंगोटी, चादर ओढ़ी, खूब मिला सम्मान।
नाम महात्मा गांधी उसका, युग-युग अमर रहेगा नाम।
दो अक्टूबर जन्मदिवस पर, उस बापू को करें प्रणाम।
आजादी का सही मतलब — अधिकार और जिम्मेदारी
यह कविता बच्चों को स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ समझाती है। इसमें आजादी के अधिकारों के साथ अपनी सीमाओं, दूसरों के अधिकारों और सामाजिक जिम्मेदारियों का सुंदर संतुलन प्रस्तुत किया गया है।
11. आजादी का मतलब
खेलकूद की, पढ़ने की आजादी है,
हमको आगे बढ़ने की आजादी है।
अमन- चैन से रहने की आजादी है,
अपनी बातें कहने की आजादी है।
हर थल आने- जाने की आजादी है,
अपना धर्म निभाने की आजादी है।
मन का खाने- पीने की आजादी है,
खुशियों के संग जीने की आजादी है।
लेकिन अपनी सीमा है आजादी की,
वरना बनती यही वजह बर्बादी की।
आजादी का मतलब, दंगा; खून नहीं,
जिसको सब छेड़ें, ऐसा कानून नहीं।
आजादी का मतलब है उत्पात नहीं,
औरों का हक छीनें,अच्छी बात नहीं।
आजादी का मतलब, प्रेम राम-रब में,
सबका हो उत्थान, एकता हो सब में।
आजादी का मतलब, देश सँवारें हम,
शान तिरंगे की कुछ और निखारें हम।
देश हमारा — नन्हे देशभक्तों का संकल्प
देश को अपनी आँखों का तारा मानने वाले बच्चों की देशभक्ति और साहस इस कविता में दिखाई देता है। अच्छे कर्म करने, निडर बनने और राष्ट्र को गौरवान्वित करने का प्रेरक संदेश इसकी विशेषता है।
12. देश हमारा
देश हमारा, हमको प्यारा,
यह अपनी आँखों का तारा।
इसकी आन नहीं जा सकती,
हम बच्चे इसके रखवाले।
अंधकार में नयी रोशनी-
ला सकते, हम हिम्मत वाले।
नहीं किसी से भी हम डरते,
विपदाओं से खेला करते,
हम आगे बढ़ते जाएँगे,
एक हमारा, अपना नारा।
हम भारत के वीर- बाँकुरे,
नन्हे बच्चे, मन के सच्चे।
नहीं किसी को दुःख पहुँचाते,
काम सभी हम करते अच्छे।
हम घर भर के चाँद- सितारे,
सबके प्यारे, राज दुलारे,
अच्छे- सच्चे काम करेंगे,
अमर रहेगा देश हमारा।
- सूर्यकुमार पांडेय
निष्कर्ष; इन 12 कविताओं में सूर्यकुमार पांडेय जी ने देशप्रेम, स्वतंत्रता, एकता, भाईचारे और राष्ट्रीय गौरव को बालमन की सहज भाषा में अभिव्यक्त किया है। ये कविताएँ बच्चों को केवल देश से प्रेम करना ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील और अच्छे नागरिक बनने की प्रेरणा भी देती हैं।
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