“Sabke Pyare Nandlal” by Suryakumar Pandey is a beautiful poetic retelling of Lord Krishna’s birth and childhood. Written in a simple and rhythmic style, the poem presents the story of Krishna’s divine birth, his childhood in Gokul, and his victory over Kansa, making it engaging and meaningful for young readers.
Sabke Pyare Nandlal: A Beautiful Krishna Janmashtami Poem by Suryakumar Pandey
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रस्तुत सूर्यकुमार पांडेय की पद्य-कथा ‘सबके प्यारे नंदलाल’ भगवान श्रीकृष्ण के जन्म और बाल-लीलाओं की कथा को सरल, सरस और बालमन के अनुकूल भाषा में प्रस्तुत करती है। कविता में कंस के अत्याचार, देवकी-वसुदेव की पीड़ा, श्रीकृष्ण के अवतरण और गोकुल में उनके पालन-पोषण से लेकर कंस-वध तथा गीता के संदेश तक की कथा को रोचक ढंग से पिरोया गया है। इसकी सहज लयात्मकता और कथात्मक प्रवाह बच्चों को श्रीकृष्ण की कथा से जोड़ते हैं। यह रचना जन्माष्टमी के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को बाल पाठकों तक पहुँचाने का सुंदर प्रयास है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी विशेष पद्य कथा
सबके प्यारे नंदलाल
थी रात अँधेरी भादो की,
बादल करते थे मनमानी।
यमुना उफनाई बहती थी,
था सभी ओर पानी-पानी।।
वसुदेव-देवकी बंदीगृह में,
बैठे थे हारे-हारे।
बाहर पहरे पर डटे हुए थे,
मथुरा के सैनिक सारे।।
मथुरा पर राज कंस का था,
तब नहीं सुखी था कोई भी।
थे बरसों से कैदी उसके,
निज बहन और बहनोई भी।।
जिनके पुत्रों को मार-मार,
उसने आतंक मचाया था।
थी धरा पाप से लदी हुई,
हर ओर अधर्म समाया था।।
असुरों का अत्याचार देख,
देवता सभी जब घबराए।
भगवान विष्णु के पास सभी,
विनती की मुद्रा में आए।।
हे ईश्वर, धरती पर जाकर
सारी वसुधा का ताप हरें।
पामर दनुजों का अंत करें,
सज्जन का प्रभु! उद्धार करें।।
तब कृपासिंधु प्रभु ने हँसकर,
उनका कहना स्वीकार किया।
श्रीकृष्ण रूप में मथुरा में
जाकर प्रभु ने अवतार लिया।।
आठवें पुत्र बनकर कान्हा,
वसुदेव- देवकी घर आए।
देवों ने फूलों की वर्षा की,
सबने भक्ति-गीत गाए।।
यूँ प्रकट कन्हैयालाल हुए,
सब का पालन करने वाले।
सब पहरेदार अचेत हुए,
खुल गए कैद-गृह के ताले।।
वसुदेव टोकरे में लेकर
उस शिशु को यमुना के पार गए।
चौकसी कंस की व्यर्थ हुई,
सब हथकण्डे बेकार गए।।
तब नंद यशोदा के घर में,
पलकर प्रभुवर गोपाल बने,
वंशीधर- माखनचोर बने,
सबके प्यारे नंदलाल बने।।
वध किया कंस का माधव ने,
सारे जग में सम्मान मिला।
इस धरती को आदर्श मिला,
गीता का सुंदर ज्ञान मिला।।
- सूर्यकुमार पांडेय
निष्कर्ष; ‘सबके प्यारे नंदलाल’ श्रीकृष्ण के जीवन और उनके लोकमंगलकारी संदेश को सरल, रोचक और लयात्मक रूप में बच्चों तक पहुँचाने वाली सुंदर पद्य-कथा है। यह रचना बालमन में प्रेम, साहस, सत्य और धर्म के प्रति विश्वास जगाती है। जन्माष्टमी के अवसर पर इसका पाठ बच्चों के लिए आनंद के साथ संस्कार और प्रेरणा का भी माध्यम बनता है।
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