‘Sorry Mansi’ or ‘Best Friend’ by Vimla Rastogi is a heartwarming children’s story about friendship, care, and understanding. Through Mansi and Avya’s friendship, the story beautifully shows that a true friend stands by us in difficult times and values love and support over show and material things.
“Sorry Mansi” or “Best Friend”: A Heartwarming Children’s Story About True Friendship by Vimla Rastogi
बच्चों की दोस्ती बहुत सहज और निश्छल होती है, लेकिन कभी-कभी दिखावे और आकर्षण के कारण रिश्तों में दूरी आ जाती है। विमला रस्तोगी की बाल कहानी ‘सॉरी मानसी’ या ‘बेस्ट फ्रेंड’ इसी भाव को सरल और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है। कहानी मानसी और आव्या की मित्रता के माध्यम से बताती है कि सच्चा मित्र वही होता है जो सुख-दुःख में साथ खड़ा रहे, न कि केवल अपनी सुविधा या दिखावे के समय।
कहानी बच्चों को मित्रता, संवेदना, सहयोग और अच्छे संस्कारों का सहज संदेश देती है। सरल भाषा और जीवन से जुड़े प्रसंग इसे बाल पाठकों के लिए रोचक एवं शिक्षाप्रद बनाते हैं।
बच्चों की सच्ची दोस्ती पर सुंदर बाल कहानी
‘साॅरी मानसी’ या ‘बेस्ट फ्रेंड’
मानसी सातवीं कक्षा में आई है। स्कूल खुलने वाले हैं। मानसी को स्कूल खुलने का इंतजार है। वह कभी यह नहीं कहती, छुट्टियंा क्यों खत्म हुई । वह खुश है कि स्कूल खुलने पर संगी साथी मिलेंगे। विशेषकर सहेली आव्या मिलेगी।
स्कूल खुलने का निश्चित दिन आया। मानसी स्कूल पहुंचते ही आव्या को ढूंढने लगी, वह सामने से आती दीख गई, उसके साथ एक और लड़की थी।
“हैलो आव्या“ कहकर मानसी आव्या के गले मिली, लेकिन आव्या ने उसके हाथ हटाते हुए कहा- “मानसी, ये अन्विता है, हमारे क्लास में एडमिशन लिया है। बम्बई से आई है।“
दोनों में “हाय“ “हैलो“ हुई।
“मैं अन्विता को अपने क्लॉस के और स्टूडेन्स से मिलवाती हूँ।“ कहकर आव्या अन्विता के साथ चली गई।
उस दिन आव्या अन्विता के साथ ही रही मानसी को अजीव लगा, उसने सोचा न था कि स्कूल खुलने का पहला दिन ऐसा होगा।
मानसी ने घर आकर मम्मी को सब बातें बताई, मम्मी ने उसे समझा दिया।
अगले दिन आव्या ने मानसी को अपना स्कूल बैग दिखाते हुए कहा - “देख, ये अन्विता ने मुझे दिया है और यह लंच बोक्स भी। दोनो बहुत मंहगे हैं।“
मानसी का क्लासमेट अभिनव आव्या का बदला हुआ रूप देख रहा था। मानसी लंच टाइम में अकेले खाना खा रही थी कि अभिनव अपना लंच बाक्स लेकर आ गया।
“मुझे आव्या पर बहुत गुस्सा आ रहा है।“ “गुस्सा मत कर, खाना खा।“ मानसी के कहने पर अभिनव चुप रह गया ।
एक दिन स्कूल में लंच टाइम में जल्दी चलते हुए मानसी का पैर मुड़ा वह गिर गई और बच्चों के साथ आव्या भी हंसने लगी
मानसी को बुरा लगा, वह जैसे तैसे चलकर क्लास में आ गई. मानसी की आंखें भर आई।
“ज्यादा चोट तो नहीं लगी ?“ अभिनव ने क्लास में आते ही पूछा।
“नहीं। थोड़ा दर्द है, ठीक हो जाएगा।“
“मन कर रहा है अभी जाकर आव्या को सबक सिखाऊ।“ अभिनव ने कहा।
“रहने दे, अभिनव।“ मानसी ने मना कर दिया मानसी घर आई। उसे लंगड़ाते हुए चलते देख मां ने पूछा- “क्या हुआ?“
मानसी ने बताया । “परेशान न हो बेटा। जो बच्चे तेरे गिरने पर हंसे हैं, वे या तो नासमझ हैं या उन्हें परिवार से संस्कार नहीं मिले हैं।“
“मां, उस समय मुझे बहुत बुरा लगा।“
“कोई बात नहीं बेटा, मैं अभी दवाई लगाकर सिकाई कर दूंगी सुबह तक ठीक हो जाएगा।“
अगले दिन मानसी स्कूल गई, आव्या ने ढंग से उसके हाल चाल भी नहीं पंूछे। आव्या पूरी तरह अन्विता के रंग में रंगती जा रही थी।
मानसी सोचती कि क्लास में कोई न कोइ नया स्टूडेन्ट हर साल आता है, सब उसे सहयोग देते हैं, यह नहीं कि पुराने फ्रेन्ड को भूल जाएं।
मानसी की माँ मानसी को समझाती रहती। आव्या और अन्विता ज्यादातर कैन्टीन में ही लंच करती थीं।
एक दिन स्कूल में भागते हुए आव्या ऐसी गिरी, कि उसके पैर मुड़ा बहुत दर्द हुआ। कुछ बच्चे हंसे तो मानसी बोली किसी के गिरने पर हंसना नहीं चाहिए। मानसी ने आव्या को उठाया सहारा देकर क्लास रूम में पहुंचाया। अन्विता उस दिन स्कूल नहीं आई थी।
आव्या के पैर की सूजन को देख स्कूल से आव्या की मम्मी को फोन किया गया मम्मी आकर आव्या को ले गई।
मानसी का घर आव्या के घर के पास में नहीं था। अगले दिन मानसी आव्या से मिलने गई, उसकी मम्मी ने छोड़ दिया था।
मानसी को देखकर आव्या चैंक गई। “कैसी है आव्या ?“ मानसी ने पूछा।
“दर्द है। फ्रेक्चर नहीं है। सूजन है। डाक्टर ने दवाईयां दी हैं। ठीक हो जाएगा, समय लगेगा।
“अन्विता आई होगी ?“ मानसी ने पूछा
“वह अपनी रिश्तेदारी में किसी की शादी में गई है।“ आव्या ने कहा।
“तुमने अपनी चोट के बारे में बताया होगा“ मानसी ने कहा।
“हां बताया था, पता नहीं कितना सुना उसने ? वह तो फाइव स्टार होटल में हो रही शादी के बारे में ही बताती रहती है।“ आव्îा ने कहा।
“स्कूल से मिला होमवर्क तेरे लिए ले आई हूँ। तू कर लेना।“ मानसी ने होमवर्क का पेपर देते हुए अन्य पीरियड की पढ़ाई के बारे में भी बताया।
मानसी रोज नहीं आती पर आव्या को फोन पर होम वर्क बता देती।
आव्या सोचती कि अन्विता फोन पर उसके हालचाल पूछने से पहले शादी के फंक्शन के बारे में बताना शुरु कर देती है। कौन से फंक्शन मैं उसने कौन सी ड्रेस पहनी उसके फोटो भेज देती है। उसे पढ़ाई की भी चिंता नहीं, उसने ट्यूशन लगा रखी है।
मानसी कितनी बार मुझसे मिलने आई है। इतनी दूर आना आसान नहीं। अन्विता अपनी शान दिखाने में लगी रहती है वह मेरी बेस्ट फ्रैन्ड नहीं हो सकती।
अगले दिन मानसी आई, आव्या को पढ़ाई संबंधी बातें बताई तो आव्या ने उससे कहा- “सारी मानसी मुझे माफ करदे, मैंने तुझ जैसी फ्रेन्ड का दिल दुखाया। मैं अन्विता की झूठी शान में आ गई।“ कहते हुए उसने मानसी को गले लगा लिया। आव्या के आंसुओं में सब गिले शिकवे धुल गए।
- विमला रस्तोगी
निष्कर्ष; ‘सॉरी मानसी’ या ‘बेस्ट फ्रेंड’ बच्चों को सच्ची मित्रता का सुंदर संदेश देती है। कहानी बताती है कि मित्रता दिखावे से नहीं, बल्कि प्रेम, संवेदना, सहयोग और कठिन समय में साथ देने से मजबूत होती है। मानसी का व्यवहार आव्या को यह समझाता है कि सच्चा दोस्त वही है जो सुख-दुःख में साथ खड़ा रहे।
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