पहला दिन शुभ दिन बाल कहानी | मित्रता और सकारात्मक सोच का संदेश

Dr. Mulla Adam Ali
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Govind Sharma’s inspiring children’s story “First Day – An Auspicious Day” highlights the importance of friendship, humility, and a positive attitude. It teaches children to rise above jealousy, celebrate others’ achievements, and understand that good character matters more than marks and rankings.

First Day – An Auspicious Day | Inspirational Hindi Children’s Story

गोविंद शर्मा की प्रेरक बाल कहानी पहला दिन : शुभ दिन

गोविंद शर्मा की बाल कहानी ‘पहला दिन : शुभ दिन’ बच्चों को ईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर मित्रता, उदारता तथा सकारात्मक सोच अपनाने की प्रेरणा देती है। प्रभात और विजय के माध्यम से लेखक ने समझाया है कि जीवन में अंकों से अधिक महत्त्व अच्छे व्यवहार, सच्ची मित्रता और दूसरों की सफलता को सहर्ष स्वीकार करने का है। आइए, पढ़ते हैं संग्रह ‘पानी में पैसा’ से प्रस्तुत यह प्रेरक बाल कहानी।

गोविंद शर्मा की प्रेरक बाल कहानी

पहला दिन : शुभ दिन

आज एक महीने बाद स्कूल खुल गए। बच्चे खुश थे और गंभीर भी थे। कुछ चहक रहे थे। बात उनकी है जो एक महीने पहले नवमी कक्षा के विद्यार्थी थे और आज मे दसवीं के।

इन्हीं में से एक प्रभात, एक कोने में खड़ा था। उसके पास उसके दो परिचित लड़के आए और हाथ पकड़ कर उसे खींचते हुए कहा - अरे प्रभात, यहाँ कोने में चुपचाप क्यों खड़े हो। चल, अपने भी विजय को बधाई देते हैं।

प्रभात ने एक झटके में अपना हाथ छुड़ा लिया और बोला- इसमें रोज-रोज बधाई वाली क्या बात है। उसने मेरे से दो नंबर ही ज्यादा लिए थे। दो नंबर ज्यादा होने के कारण व कक्षा में प्रथम आ गया और मैं द्वितीय रह गया। इस बार देखना उससे कई दो नंबर ज्यादा मैं लूँगा। वह मेरे आस पास भी नहीं होगा। अभी आए उन दोनों लड़कों ने यह सुना और हँस पड़े। एक बोला- अरे प्रभात, तुम पिछली कक्षा के आखिरी दिन की बात लिए बैठे हो। तब नौवीं कक्षा का परिणाम घोषित हुआ था। तुम विजय से दो नंबर नीचे रह गए थे, यह सब हमें मालूम है। विजय खुशी से चीख रहा था और विजय को बधाइयाँ मिल रही थी। तुमने भी अच्छे नंबर लिए थे पर मायूस थे। हम तुम्हारे सहपाठी तो तुम दोनों को बेस्ट बॉय मान रहे थे। तुम अभी तक उस दर्द को लिए बैठे हो। अरे छुट्टियों के दिन बड़े-बड़े दुखों को भुला देते हैं। हम तुम दोनों की प्रतिस्पर्धा में उसकी जीत की बधाई देने नहीं जा रहे हैं। जानते हो उसने छुट्टियों में क्या किया? उसने एक खेल समिति द्वारा आयोजित शतरंज प्रतियोगिताओं में भाग लिया और जिला चौंपियन बन गया। अब वह एक और प्रतियोगिता में भाग लेगा। जीत गया तो स्टेट चौंपियन बन जाएगा।

प्रभात हैरान रह गया यह सुनकर । पढ़ाई में भी आगे और खेलकूद में भी। वाह विजय। यह उसने मन ही मन कहा। फिर बोला- नहीं मैं नहीं जाऊँगा बधाई देने। वह मुझे चिढ़ाएगा। पर वे दोनों लड़के माने नहीं। प्रभात को खींचकर उस बरामदे में ले गये, जहां विजय खड़ा था और दूसरे बच्चे उसे बधाई दे रहे थे। लड़के आते, हाथ मिलाते हैं और बधाई देते हैं। कभी-कभी कोई शिक्षक आ जाते हैं तो विजय आगे बढ़कर पाँव छूता और आशीर्वाद लेता है। प्रभात एक तरफ खड़ा यह सब देखता रहा। वह आगे नहीं बढ़ा।

-अचानक विजय की नजर प्रभात की ओर चली गई। विजय ने अपने पास खड़े लड़कों को हटाया और तेजी से प्रभात के पास पहुँचा। प्रभात कुछ बोले, उससे पहले ही विजय ने प्रभात को बाहों में भर लिया और बोला थैंक यू मेरे दोस्त, धन्यवाद । अब मिली सबसे अच्छी बधाई मुझे। तेरी शुभकामनाएँ मिल गई, अब अगली प्रतियोगिता मैं ही जीनूँगा। वाह, आज स्कूल का पहला दिन मेरा शुभ दिन बन गया। कितनी अच्छी बात है कि पिछले सत्र के आखिरी दिन मिले परीक्षा परिणाम की कड़वाहट तुम्हारे मन में जरा भी नहीं है।

प्रभात पहले भी नहीं बोला था। अब तो हैरान था और बोल नहीं पा रहा था। कहना चाहता था कि यह पहला दिन तो सिर्फ तुम्हारे लिए नहीं, मेरे लिए भी शुभ दिन बन गया है। मुझे नई सीख मिली है कि पढ़ाई और अंकों के साथ और भी बहुत कुछ सीखना जरूरी होता है। वह आज तुमने अपने व्यवहार से मुझे सिखा दिया। थैंक यू मेरे दोस्त।

- गोविंद शर्मा

निष्कर्ष : गोविंद शर्मा की कहानी ‘पहला दिन : शुभ दिन’ संदेश देती है कि सच्ची सफलता केवल अच्छे अंक पाने में नहीं, बल्कि ईर्ष्या त्यागकर दूसरों की उपलब्धियों का सम्मान करने में है। सकारात्मक सोच और मित्रता ही जीवन को सचमुच शुभ बनाती हैं।

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