शरणार्थी समस्या पर आधारित एक वैचारिक कहानी है : अज्ञेय की ‘मुस्लिम-मुस्लिम भाई-भाई’

Dr. Mulla Adam Ali
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‘मुस्लिम-मुस्लिम भाई-भाई’ - अज्ञेय

Story Muslim Muslim Bhai Bhai by Agyeya

Story Muslim Muslim Bhai Bhai by Agyeya

        अज्ञेय की ‘मुस्लिम-मुस्लिम भाई-भाई’ शरणार्थी समस्या पर आधारित एक वैचारिक कहानी है। इसमें भावुकता से पिंड छुड़ाकर यथार्थ को सही मायने में आंका गया है। यह कहानी सांप्रदायिक उन्माद की गहराती विषाक्त चेतना का यथार्थ चित्रण करने के साथ-साथ विभाजन की कोख से फूट पड़ी दारुण एवं जटिल स्थितियां तथा छार-खार होती हुई मानवीय संबंधों एवं विश्वास मूल्यों का करुण गाथा भी प्रस्तुत करती है। हत्याओं, लूटपाट के परिवेश में समग्र देश, विवेक, संतुलन व मर्यादा को तितर-बितर करके जिस विष में डूबा था, उसका दंश आज तक मिटा नहीं। इन्हीं विसंगत, विश्रृंखल स्थितियों की अभिव्यंजना इस कहानी में की गई है।

     समाज में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठाने के पीछे ठोस व सशक्त कारण कम होते हैं। अफवाहों के कारण ऐसे दंगे फसाद की ईजाद होती है। सरदारपुरे में एक दिन एक दैनिक अखबार में एक छोटी-सी खबर छपी- “अफवाह है कि पाटों के कुछ गिरोह हो इधर-उधर छापे मारने की तैयारियां कर रहे हैं। इस तनिक से आधार को लेकर न जाने कहां से खबर उठी कि जाटों का एक बड़ा गिरोह हथियारों से लैस बंदूकों के गाजे-बाजे के साथ खुले हाथों मौत के नए खेल की पर्चियां लूटता हुआ सरदारपुरे में चढ़ा आ रहा है।“ लोगों में भगदड़ मच गई। सबेरे के गाड़ी निकल चुकी थी। इसमें भारी भीड़ थी। जो लोग उसमें घुस न सके वे डिब्बे के बीच में धक्का संभालने वाली कमानियों पर काठी कसकर जम गए। सकीना, अमीना और जमीला जैसी अधेड़ उम्र की स्त्रियां जिन्हें पाकिस्तान जाना था उसमें फँस गई। भीड़भाड़ के कारण एक गाड़ी छूट गई। अमीना बोली “एक स्पेशल ट्रेन आनेवाली है जो सीधी पाकिस्तान जाएगी, उसमें सरकारी मुलाजिम जा रहे हैं न।“ वह आगे कहती है “आखिर तो मुसलमान होंगे बैठने क्यों न देंगे?” उस वक्त जमीला ने कहा... “हाँ आखिर तो अपने भाई।“ जब गाड़ी आई तो तीनों उसी ओर लपकीं। उसमें भी अतिशय भीड़ थी और वह स्थान पाने में असमर्थ होने के हो जाती है। उलटा उच्च जाति के औरतों ने उन्हें दुत्कार व कहा “ है तो जाओ, थर्ड, में जगह देखो। बड़ी आई हमें सिखाने वाली।“ उसने जाकर गार्ड अमजद मियाँ को बुलाया, वह उन्हें भला-बुरा कहा और उन पर कीचड़ फेंका। अमीना ने कहा- “इस्लाम में तो सब बराबर है।“ गार्ड अमजद मियाँ ने प्रतिवाद करते हुए कहा “बड़ी पाकदाम बनती हो। अरे हिंदूओं के बीच रही और अब उनके बीच से भागकर जा रही हो आखिर कैसे? उन्होंने, क्या यों ही छोड़ दिया होगा? सौ-सौ हिंदूओं से ऐसी-तैसी कराकर पल्ला झाड़ के चली आई पाकदामिनी का दाम भरने।“ उन तीनों के हैंडल ऐसे छोड़ा जैसे कोई गरम लोहा हो। अमीना ने बड़ी लंबी साँस लेकर कहा, “गई पाकिस्तान स्पेशल।“

     इस कहानी में वर्ग बनाम धर्म का मुद्दा उठाया गया है। प्रस्तुत कहानी इसकी ओर इशारा करती है कि धर्म कभी भी धन के पार नहीं। इसमें मानव मन की संकीर्णताओं व निम्न वर्ग के मोहभंग का बेबाक चित्रण भी हुआ है।

     विभाजन से जुड़ी मार्मिक एवं त्रासद समस्याओं को दर्शाने का महत्वपूर्ण कदम अज्ञेय ने इन कहानियों में किया है। सांप्रदायिक दंगे, धर्म के नाम पर होती अमानवीय हत्याएं आदि आज भी भारत की ऐसी जटिल समस्याएं हैं जो राष्ट्रीय अखंडता के हित के बाधक है। समाज को नेस्तनाबूद करने वाली इन समस्याओं का खुलासा अज्ञेय ने कहानियों के जरिए किया है, जो पाठकों के दिल में गहरी छाप छोड़कर अपनी अलग शिनाख्त बनाती है।

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