आदमी को एडिट करते जीनोमाचार्य: बी. एल. आच्छा

Dr. Mulla Adam Ali
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दैनिक अमर उजाला में प्रकाशित लेख

आदमी को एडिट करते जीनोमाचार्य

                   बी. एल. आच्छा 

        यों आदमी होना ही बड़ी बात है। पर आदमियत भी हो तो क्या कहने! पर इन दिनों आदमी अंग्रेजी- छपाक में मैन हो गया है, मैनियत का पता नहीं। और मैन ही क्या सुपरमैन और स्मार्ट मैन । मैन के भीतर रोबोटिक | मैन के भीतर मिसाइल मैन । यो बात की जाती थी जेनेरेशन गैप की। अब जेनेरेशन गैप की बात मानसून की तरह कमजोर | मोबाइल पीढ़ियों की चर्चा का जोर | मिसाइल पीढ़ियों की आकाशी- फेंक | सुपरसोनिकों की छठी पीढी! और इसमें बिन-मैन की सुपरसोनिक- फेंकफांक।

         नजर दौड़ाते हैं तो आदमी इन्ही टेक्नो- पीढ़ियों में उलझा-सुलझा है। जनरेशन गैप होते ही पुरानी मोबाइल पीढ़ी को फेंकछू। हाँडी वाली स्वादिष्ट पीढ़ी कड़ाही में उबलते- उबलते प्रेशर कुकर में सीटी बजा रही है। बेलन-चकले अब मशीनों में थोकमंद रोटियां फुला रहे हैं। रसोईघर की पीढ़ी किचन - मेन्युअल में। दाँतों से अमरूद-सेबफल को खाती पुरानी पीढ़ी के आगे नयी पीढ़ी की प्लेट में नया कटिंग- सौन्दर्य । हाथी-घोड़ों की चतुरंगिणी सेना से रिटायर हाथी-घोड़े महावतों-नचैयों के लिए पैसा कमा रहे हैं। खुद फकत केलों-पत्तों पर दिन गुजार रहे हैं। बंदूक-राइफलें एके-47 से अब स्नायपर मोड में। | फाइटर प्लेन सुपरसोनिक | और लिखते- लिखते लव हो जाए वाली स्याही-कलम- बालपेन-पीढ़ी लेपटॉप के आगे फेंकछू ।और अब विडिओ पीढ़ी आई तो चिट्‌ठी- पीढ़ी फेंकछू।

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        चलो ये तो सभ्यता की बदलती पोषाकें हैं। आखिर आदमी कब तक मोहनजोदड़ो-हड़प्पा में बसा रहता | मगर कुछ सालों से छेड़छाड़ अन्दर से हो रही है। शुरु हुई भेड़ों से | तब क्लोनाचार्य अपना करतब दिखा रहे थे । फिर टेस्टट्‌यूबाचार्यों की पीढ़ी ने ज्योतिष को ठेंगा बताया। बात हार्मोन्स की आई तो स्त्रीलिंग- पुल्लिंग अदला-बदली करते रहे। कुछ सालों से जीन्स को दुलारते जीनोमाचार्य आदमी को ही एडिट करने पर तुले हुए हैं।

           तरक्की तो है। आदमी का आउटवियर तो क्रीम-पाउडर के सौन्दर्यशास्त्र से बदल गया। मगर इनरवियर भी चहेते जीन्स से रचा-बुना हो। बिल्कुल जीनोमिक्स का बाजारवादी स्पाइडर-मैन। अपनी अपनी कूट-नीति और युद्ध-नीति का नया सैन्य जमावड़ा। बाजार सभ्यता में आदमी के अंगों का नया बाजार | युद्ध-नगाड़ों में नया युद्ध-शिल्प। जीवाणु युद्धों के नये वुहानाचार्य। न सुपरसोनिक गड़गड़ाहट, न विश्व-युद्धों का परमाणु कहर। दुनिया अश्वमेध के

घोड़े दौड़ाने की साम्राज्य लिप्सा का नया चक्र। न घोड़े की अश्वमेधी दौड़, न सुपरसोनिक नगाड़े। | फिर भी विजयी भव के आकाशी नारे।

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           सुना है कि अब सैनिकों के जीनोम बदलने की तैयारी है। बर्फीली माइनस तीस की सर्दियों में भी आदमी

 बेअसर! युद्धों की नयी व्यूह- रचना | आखिर हर कंस को नये बाजार के लिए जरासंध तो चाहिए ही। क्या जीनोम था जरासंध का ! कितना ही अलग-थलग कर दो, फिर जुड़ जाएगा। जीनोमाचार्य नये युग के जरासंधों की पीढ़ी रच रहे हैं। ऐसी कि कटे सिर वाले केतु की तरह सिर्फ तलवार का धुआँधार । यों बरसों पहले रूसी वैज्ञानिकों ने आगाह किया। आदमी की जीन्स से छेड़छाड़ करते-करते कहीं हम राक्षस पैदा न कर दें। पर युद्धनीति कहाँ देवता- राक्षस से चकराती है। अश्वमेध की नयी सभ्यता के संस्करण आकाश में सुपरसोनिक हैं। और आदमी को एडिट करते नये जीनोमाचार्य आदमियत को ही नयी जीन-सभ्यता का बाजार बना रहे हैं! महाभारत प्रलाप करती थी- मनुष्य से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं। अब जीनोमाचार्यों की जीवाणु-सभ्यता के बाजार से बढ़कर कुछ भी नहीं।

बी. एल. आच्छा 

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